Mahashivratri 2024: काशी में आज आधी रात को पंचकोसी परिक्रमा करने निकलेंगे लाखों श्रद्धालु, जानिए क्या है महत्व
Mahashivratri 2024: बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में महाशिवरात्रि पर्व को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। काशी की गलियों से लेकर ग्रामीण इलाकों में आज से ही महाशिवरात्रि की धूम देखने को मिल रही है। आज रात में करीब 10 लाख श्रद्धालु श्री काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन करेंगे।
महाशिवरात्रि पर्व के पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन की ओर से तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई हैं। मंदिर प्रबंधन की ओर से जारी सूचना में बताया गया कि महाशिवरात्रि पर भक्तों पर पुष्प वर्षा की जाएगी।

इसके अलावा मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए आने वाले लोगों के लिए जगह-जगह पेयजल, दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए व्हीलचेयर और ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है। आने वाले श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए रूट डायवर्जन प्लान भी जारी किया गया है।
पंचकोसी परिक्रमा के लिए निकलेंगे लाखों भक्त
वाराणसी में महाशिवरात्रि पर्व पर लाखों की संख्या में वाराणसी समेत पूर्वांचल के आसपास जनपदों के लोग लोग काशी पंचकोसी परिक्रमा करने के लिए निकलते हैं। इस परिक्रमा की शुरुआत मध्य रात्रि में मणिकर्णिका घाट से होती है।
रात में मां गंगा में स्नान करने के बाद तीर्थ यात्री मणिकर्णिका घाट से प्रस्थान करते हैं। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 8 मार्च को है ऐसे में 7/8 की रात्रि में ही वाराणसी से काफी संख्या में भक्त श्री काशी पंचकोसी परिक्रमा करने के लिए निकलेंगे।
क्यों करते हैं काशी पंचकोसी परिक्रमा?
श्रीकाशी पंचकोसी परिक्रमा करने के लिए कई कथाएं प्रचलित हैं। लेकिन भगवान श्री राम से जुड़ी कथा सर्वाधिक प्रचलित है। ऐसा कहा जाता है कि काशी पंचकोसी परिक्रमा की शुरुआत त्रेता युग में हुई थी। उसके बाद से यह परिक्रमा आज भी जारी है।
ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्री राम ने पिता दशरथ जी को श्रवण कुमार की हत्या से मुक्ति दिलाने के लिए काशी पंचकोसी परिक्रमा की थी। परिक्रमा के दौरान जिन स्थानों पर भगवान श्री राम विश्राम किए थे उन स्थानों पर आज तीर्थ स्थल बने हुए हैं।
काशी पंचकोसी परिक्रमा करने के लिए निकलने वाले भक्त भी इन तीर्थ स्थलों पर कुछ देर ठहरने के बाद अगले पड़ाव के लिए निकल जाते हैं। कहा जाता है कि श्री काशी पंचकोसी परिक्रमा करने के बाद लोगों को उनके किए पाप से मुक्ति मिलती है तथा मनवांछित फल मिलते हैं।
इस तरह संपन्न होती है काशी पंचकोसी परिक्रमा
महाशिवरात्रि की एक दिन पहले वाली रात्रि में गंगा नदी में स्नान कर संकल्प पर काशी के मणिकर्णिका घाट से यह यात्रा प्रारंभ होती है। यात्रा प्रारंभ किए जाने के बाद श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा मार्ग से होते हुए पहले पड़ाव करमेश्वर महादेव पहुंचते हैं। वहां दर्शन पूजन करने के बाद दूसरा पड़ाव भीम चंडी है।
दूसरे पड़ाव पर पहुंचने के बाद श्रद्धालु राजा तालाब से होते हुए रामेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने हैं। रामेश्वर महादेव मंदिर काशी पंचकोसी परिक्रमा का तीसरा पड़ाव है। यहां पर दर्शन करने के बाद श्रद्धालु अगले पड़ाव शिवपुर के लिए प्रस्थान करते हैं।
शिवपुरी के पांच पंडवा इलाके में पांचो भाइयों का मंदिर है। पांचो पंडवा में दर्शन पूजन करने के बाद श्रद्धालु अगले पड़ाव कपिलधारा के लिए प्रस्थान कर जाते हैं। कपिलधारा श्री काशी पंचकोसी परिक्रमा का अंतिम पड़ाव है। यहां पहुंचने के बाद यात्रा पूरी हो जाती है।
उसके बाद कपिलधारा में दर्शन पूजन कर काशी पंचकोसी परिक्रमा पर निकलने वाले श्रद्धालु वापस मणिकर्णिका घाट पहुंचते हैं और उनकी यात्रा पूरी हो जाती है। यह परिक्रमा रात 12:00 बजे प्रारंभ होती है और पैदल ही दौड़ते व चलते हुए दोपहर 12:00 तक यात्रा पूरी करनी होती है।












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