नहीं रहे काशी के 'दादा', वाराणसी शहर दक्षिणी से 7 बार विधायक रहे श्यामदेव राय चौधरी का निधन, शोक में काशीवासी
Shyamdev rai chaudhari dada: वाराणसी के शहर दक्षिणी विधानसभा से सात बार विधायक रहे श्यामदेव राय चौधरी दादा का मंगलवार को शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। श्यामदेव राय चौधरी दादा के निधन से काशीवासी शोक में हैं।
श्यामदेव राय चौधरी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बीते करीब 10-15 दिन पूर्व शहर के रविंद्रपुरी कॉलोनी में स्थित एक निजी अस्पताल में उनकाे भर्ती कराया गया था। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनका हाल जानने के लिए अस्पताल में पहुंचे थे।

वाराणसी की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले और काशी की समस्याओं को लेकर हमेशा मुखर रहने वाले तथा सादा जीवन उच्च विचार वाले श्यामदेव राय चौधरी दादा के निधन पर सभी दलों के नेता शोक में हैं। इस बारे में कांग्रेस के महानगर कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि आज काशी ने लोकतंत्र के सच्चे सेनानी को खो दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि शहर दक्षिणी के पूर्व विधायक श्री श्याम देव राय चौधरी के निधन से हम सभी काशीवासी मर्माहत हैं। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के साथ ही अन्य दलों के नेता भी उनके निधन पर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
1989 से 2017 तक रहे विधायक
पूर्व विधायक श्यामदेव राय चौधरी पार्षद के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। उसके बाद पहली बार उन्होंने 1985 में विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन उनको सफलता हासिल नहीं हुई। बाद में 1989 में उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे साल 1989 से 2017 तक विधायक रहे।
हालांकि 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान उनका उम्र अधिक होने के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा उन्हें टिकट नहीं दिया गया। श्यामदेव राय चौधरी का टिकट काट दिए जाने के बाद दक्षिण विधानसभा के मतदाताओं में भी नाराजगी दिखाई दी थी। उनकी जगह नीलकंठ तिवारी को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया था।
स्कूटर और मोटरसाइकिल से चलते थे
काफी सरल स्वभाव के बेहद सादगी भरा जीवन जीने वाले श्यामदेव राय चौधरी दादा कभी स्कूटर तो कभी रिक्शे से और कभी अपने करीबी लोगों की मोटरसाइकिल पर बैठकर सफर तय करते थे। यही कारण था कि काशी के लोग उन्हें बहुत मानते थे।
कैबिनेट मंत्री रह चुके थे दादा
श्यामदेव राय चौधरी दादा भारतीय जनता पार्टी की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके थे। 2007 और 2012 तक उन्हें प्रोटेम स्पीकर के तौर पर भी नियुक्त किया गया था। अखिलेश सरकार में लगातार हो रही बिजली कटौती से परेशान होकर वे अनशन पर बैठ गए थे। जानकारी मिलने के बाद अखिलेश यादव ने खुद उनको फोन किया था। फोन करने के बाद उन्होंने दादा से अनशन तोड़ने का अनुरोध किया था और तत्काल बिजली व्यवस्था दूर करने की बात कही थी।












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