कहां और कैसा है उत्तराखंड का 'नागतीर्थ', जिसे छठें धाम के रूप में डेवलप कर रही है धामी सरकार

उत्तराखंड का 'नागतीर्थ' सेमनागराजा मंदिर, जिसे छठें धाम के रूप में डेवलप कर रही है धामी सरकार

देहरादून, 27 नवंबर। उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध चारधाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ हैं। चारधाम की वजह से इसे देवभूमि भी कहते हैं। अब सरकार धामों के विस्तार को लेकर भी योजना बना रही है। पर्यटन और तीर्थाटन की दृष्टि से भी राज्य सरकार कई फैसले ले रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार पांचवें धाम के रुप में सैन्य धाम और छठे धाम के रूप में नागतीर्थ सेम मुखेम को विकसित करने का ऐलान कर चुकी है। जो कि नागतीर्थ और सेमनागराजा के नाम से भी विख्‍यात हैा

सेमनागराजा पहुंचे सीएम

सेमनागराजा पहुंचे सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टिहरी के प्रतापनगर के सेम- मुखेम स्थित गड़वागीसौड़ मैदान में आयोजित श्री सेमनागराजा त्रिवार्षिक मेला, जात्रा सेममुखेम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने श्री सेमनागराजा को नमन करते हुए सेम-मुखेम छठे धाम के रुप में विकसित करने की बात की है। उन्होंने कहा कि जब से नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने है तब से भारत का पूरे विश्व में वर्चस्व बढ़ा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के द्वारा हमारे राज्य में भी धार्मिक पर्यटन सहित राज्य की आर्थिकी को बढ़ावा देने के लिए अनेक कार्य किये जा रहे है।

सेमनागराजा के नाम से प्रसिद्ध है मंदिर

सेमनागराजा के नाम से प्रसिद्ध है मंदिर

सेम-मुखेम नागराज उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिला में स्थित एक प्रसिद्ध नागतीर्थ है। श्रद्धालुओं में यह सेम नागराजा के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर में नागराज फन फैलाये हैं और भगवान कृष्ण नागराज के फन के ऊपर वंशी की धुन में लीन हैं। मन्दिर में प्रवेश के बाद नागराजा के दर्शन होते हैं। मन्दिर के गर्भगृह में नागराजा की स्वयं भू-शिला है। ये शिला द्वापर युग की बतायी जाती है। मन्दिर के दांयी तरफ गंगू रमोला के परिवार की मूर्तियां स्थापित की गयी हैं। सेम नागराजा की पूजा करने से पहले गंगू रमोला की पूजा की जाती है। यह माना जाता है कि इस स्थान पर भगवान श्री कृष्ण कालिया नाग का उधार करने आये थे। इस स्थान पर उस समय गंगु रमोला का अधिपत्य था, श्री कृष्ण ने उनसे यंहा पर कुछ भू भाग मांगना चाहा लेकिन गंगु रमोला ने यह कह के मना कर दिया कि वह किसी चलते फिरते राही को जमीन नही देते। फिर श्री कृष्ण ने अपनी माया दिखाई, जिसके बाद गंगु रमोला ने शर्त के साथ कुछ भू भाग श्री कृष्ण को दे दिया। जिस शर्त के अनुसार एक हिमा नाम की राक्षस का वध किया।

आसानी से पहुंच सकते हैं मंदिर

आसानी से पहुंच सकते हैं मंदिर

उत्तराखंड के श्रीनगर से पहले एक गडोलिया नामक छोटा कस्बा आता है। यहां से एक रास्ता नई टिहरी के लिये जाता है दूसरा लम्बगांव। लम्बगांव सेम जाने वाले यात्रियों का मुख्य पड़ाव है। मन्दिर से ढ़ाई किमी नीचे तक सड़क मार्ग है। मुखेम गांव सेम मन्दिर के पुजारियों का गांव है। ये गंगू रमोला का गांव है जो कि रमोली पट्टी का गढ़पति था तथा जिसने सेम मन्दिर का निर्माण करवाया था।

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