Uttarkashi Cloudburst: जानिए कहां है धराली गांव, महाप्रलय से तहस नहस हो गया खूबसूरत धार्मिक और पर्यटक स्थल
Uttarkashi Cloudburst Dharali village उत्तरकाशी के धराली गांव में बादल फटने से भारी तबाही मची है। दर्जनों होमस्टे, होटल और घर मलबे में दब गए। 50 से ज्यादा लोग लापता हैं। मंगलवार दोपहर में 30 सेकेंड में धराली गांव की तस्वीर बदल गई। सालभर पर्यटकों से गुलजार रहने वाला धराली गांव अब मलबे में तब्दील हो गया है।
प्राकृतिक सुंदरता, पर्यटन और रोजगार की दृष्टि से धराली गांव पूरे हर्षिल घाटी में सबसे समृ़द्ध गांव माना जाता था। लेकिन बादल फटने और प्राकृतिक आपदा ने इस गांव को ऐसे मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया जिससे यहां जन सामान्य होने में कई समय लग सकता है।

धराली गांव उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यह गंगोत्री धाम को जाने वाले नेशनल हाईवे का मुख्य पड़ाव है। गंगोत्री से पहले एक मात्र बाजार भी है। यहां पर्यटक और श्रद्धालु रूककर प्रकृति का आंनद जरूर लेते हैं। धराली अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और एडवेंचर एक्टिविटी फेमस रहा है। हर्षिल और गंगोत्री के बीच स्थित एक सुंदर गांव धराली समुद्र तल से करीब 8 हजार से भी अधिक फीट की ऊंचाई पर है।
हर्षिल के नजदीक, फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन
धराली गांव में सालभर पर्यटक रुकते हैं। यहां के सेब के बगीचों के बीच में पर्यटकों के लिए समय बिताने किसी जन्नत से कम नहीं है। हर्षिल के नजदीक होने के कारण भी यह फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन गया है। पहले मां गंगा के शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव का मुख्य मार्ग धराली गांव से होकर ही जाता था। हालांकि अब हर्षिल से भी मोटर मार्ग बन गया है। लेकिन अब भी कई लोग पैदल धराली होकर ही मुखबा जाते हैं। लेकिन जलप्रलय से अब ये पूरा बाजार और गांव मलबे में तब्दील हो गया है।
बर्फबारी और सेब के बगीचों के बीच
धराली गांव पर्यटकों के लिए सालभर गुलजार रहने वाला टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। जहां कई होमस्टे और होटल बने हुए थे। बर्फबारी और सेब के बगीचों के बीच धराली गांव किसी जन्नत से कम नहीं दिखता है। धराली गांव उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से करीब 218 किमी और उत्तरकाशी मुख्य जिले से करीब 78 किमी दूर है।
धार्मिक महत्व भी खास
धराली गांव से करीब 6 किमी की दूरी पर हर्षिल है। धराली प्राकृतिक सुंदरता के साथ ही अपना धार्मिक महत्व भी रखता है। धराली गांव में कैलाशेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि धराली क्षेत्र में तप करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी, इसलिए इसे आध्यात्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। यहां सोमेश्वर भगवान की डोली भी है। जिसको ग्रामीण पूजा करते हैं।












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