प्रकृति का आभार करने के लिए खेली जाती है यहां अनोखी होली, दूध, मक्खन, मट्ठा के साथ मनाया जाएगा बटर फेस्टिवल
दयारा बुग्याल में मनाया जाता है अढूंडी उत्सव या बटर फेस्टिवल
देहरादून, 18 जुलाई। समुद्रतल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर 28 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले दयारा बुग्याल में स्थानीय लोग एक अनोखी होली का आयोजन करते हैं। जिसे बटर फेस्टिवल यानि अढूंडी उत्सव कहते हैं। इसे स्थानीय लोग प्रकृति का आभार प्रकट करने के लिए करते हैं। इस दौरान दूध, मक्खन, मट्ठा की होली खेली जाती है। इस बार ये उत्सव 16 व 17 अगस्त को मनाया जाएगा। दयारा बुग्याल उत्तरकाशी जिले में स्थित है। जो कि एक खास टूरिस्ट डेस्टिनेशन है।

बटर फेस्टिवल यानि अढूंडी उत्सव
कोरोना के कारण पहाड़ों में भी कई उत्सव और पारंपरिक त्यौहार नहीं मनाए गए। लेकिन इस बार हर उत्सव को धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस वर्ष अगस्त महीने में रैथल के ग्रामीण दयारा बुग्याल में पारंपरिक व ऐतिहासिक बटर फेस्टिवल यानि अढूंडी उत्सव का आयोजन करेंगे। 16 व 17 अगस्त का आयोजित होने वाले इस पारंपरिक उत्सव के लिए रैथल के ग्रामीणों ने तैयारियां शुरू कर दी है। दयारा बुग्याल में रैथल के ग्रामीणों सदियों से भाद्रप्रद महीने की संक्रांति को दूध मक्खन मट्ठा की होली का आयोजन करते आ रहे हैं।

कई सालों से हो रहा आयोजन
प्रकृति का आभार जताने के लिए आयोजित किए जाने वाले इस दुनिया के अनोखे उत्सव को रैथल गांव की दयारा पर्यटन उत्सव समिति व ग्राम पंचायत बीते कई वर्षों से बड़े पैमाने पर दयारा बुग्याल में आयोजित कर रही है, जिससे देश विदेश के पर्यटक इस अनूठे उत्सव का हिस्सा बन सके। रविवार को रैथल में आयोजित बैठक में दयारा पर्यटन उत्सव समिति ने इस वर्ष 17 अगस्त को पारंपरिक रूप से दयारा बुग्याल में बटर फेस्टिवल के आयोजन का भव्य रूप से आयोजन का फैसला लिया।

17 अगस्त को मक्खन मट्ठा की होली खेली जाएगी
दो वर्षों से कोरेाना संकट के चलते बटर फेस्टिवल का आयोजन ग्रामीणों द्वारा अपने स्तर पर ही परंपराओं का निर्वहन करते हुए बेहद सूक्ष्म स्तर पर किया था। इस वर्ष होने वाले आयोजन में दयारा बुग्याल में ग्रामीण देश विदेश से आने वाले मेहमानों के साथ 17 अगस्त को मक्खन मट्ठा की होली खेलेंगे। इस मौके पर दयारा पर्यटन उत्सव समिति रैथल के अध्यक्ष मनोज राणा, सरपंच गजेंद्र राणा, उपप्रधान रैथल विजय सिंह राणा, वार्ड सदस्य बुद्धि लाल आर्य, समिति के सदस्य मोहन कुशवाल, सुरेश रतूड़ी, संदीप राणा, यशवीर राणा, राजवीर रावत, विजय सिंह राणा, पंकज कुशवाल, प्रवीन रावत समेत अन्य मौजूद रहे।

ये है मनाने के पीछे की वजह
रैथल के ग्रामीण गर्मियों की दस्तक के साथ ही अपने मवेशियों के साथ दयारा बुग्याल समेत गोई चिलापड़ा में बनी अपनी छानियों में ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए पहुंच जाते हैं। ऊंचे बुग्यालों में उगने वाली औषधीय गुणों से भरपूर घास व अनुकूल वातावरण का असर दुधारू पशुओं के दुग्ध उत्पादन पर भी पढ़ता है। ऐसे में उंचाई वाले इलाकों में सितंबर महीने से होने वाली सर्दियों की दस्तक से पहले ही ग्रामीण वापिस लौटने से पहले अपनी व अपने मवेशियों की रक्षा के लिए प्रकृति का आभार जताने के लिए इस अनूठे पर्व का आयोजन करते हैं। स्थानीय स्तर पर अढूंडी पर्व के नाम से जाना जाने वाले इस बटर फेस्टिवल में समुद्रतल से 11 हजार फीट की उंचाई पर ताजे मक्खन व छाछ से होली खेली जाती है।

दयारा बुग्याल सबसे खास टूरिस्ट डेस्टिनेशन
दयारा बुग्याल सबसे खास टूरिस्ट डेस्टिनेशन
दयारा बुग्याल उत्तरकाशी जिले में स्थित है।चारों ओर बर्फ से ढके इस बुग्याल तक पहुंचने के लिए उत्तरकाशी गंगोत्री सड़क मार्ग पर स्थित भटवाड़ी तक गाड़ी से पहुंचना होता है। फिर बारसू गांव से दयारा बुग्याल तक पैदल चलना होता है। जो कि करीब 9 किलोमीटर है। लेकिन 9 किमी की दूरी प्रकृति की सुंदरता के आगे कुछ भी नहीं है। जैसे ही आप मलमली घास पर पहुंचेगे तो आपकी थकान दूर हो जाएगी। दयारा बुग्याल में आपको सुंदर जंगल, पहाड़ और खूबसूरत रेशमी घास दिखेगी। सर्दियों में आप यहां स्कींग के लिए भी आ सकते हैं। जहां तक आपकी नजर दौड़ेगी आपको प्राकृतिक छटा ही नजर आएगी। बंदरपूछ, कलानाग, श्रीखंड महादेव, श्रीकांत शिखर और गंगोली चोटी जैसे पर्वत शिखरों का खूबसूरत नजारा यहां से देखने को मिलेगा। देहरादून जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से उत्तरकाशी मुख्यालय लगभग 200 किमी दूर है। दयारा में आपको रुकने के लिए सीमित संसाधन मिलेंगे। यहां रिसोर्ट और स्थानीय लोगों के बनाए अस्थायी साधन आपको मिलेंगे।












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