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Badrinath Dham: विशेष पूजा अर्चना के बाद खुले 'बद्रीनाथ धाम' के कपाट, भक्तगण खुशी से नाचते नजर आए

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देहरादून, 08 मई। वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा अर्चना के बाद आज सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खोल दिए गए हैं। इस खास मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। जिस वक्त कपाट खुले उस वक्त भक्तों की खुशी देखने लायक थी, बहुत सारे श्रद्धालु इस दौरान सेना बैंड की धुनों पर थिरकते नजर आए। कपाट खुलने के साथ ही अब भक्तगण चारों धामों के दर्शन कर पाएंगे। इससे पहले केदारनाथ, गंगोत्री औऱ यमुनोत्री के कपाट खुल चुके हैं।

Badrinath Dham: विशेष पूजा अर्चना के बाद खुले बद्रीनाथ धाम के कपाट, भक्तगण खुशी से नाचते आ

मालूम हो कि चारों धाम के दर्शन के लिए सरकार ने कुछ संख्या निर्धारित की है। जिसके अनुसार रोजाना गंगोत्री में 7000, यमुनोत्री में 4000, केदारनाथ में 12, 000 और बद्रीनाथ धाम में 15000 भक्त दर्शन कर सकते हैं। आपको बता दें कि आस्था का मानक बद्री विशाल का ये मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है।

सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर खुले केदरानाथ धाम के कपाट, सीएम धामी भी हुए विशेष पूजा में शामिलसुबह 6 बजकर 15 मिनट पर खुले केदरानाथ धाम के कपाट, सीएम धामी भी हुए विशेष पूजा में शामिल

बद्री विशाल भगवान विष्णु के ही एक रूप हैं, जो कि मंदिर में 6 महीने में नींद में रहते हैं और छह महीने जागते हैं, इस मंदिर में एक अंखड जीप जलता रहता है, जिसे ज्ञानज्योति का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि इस धाम के चौखट पर पहुंचने वाले हर व्यक्ति का कष्ट दूर हो जाता है।

बद्री विशाल का मंदिर 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है

इस धाम के बारे में कहा जाता है कि मां गंगे जब धरती पर अवतरित हुई थीं तो 12 धाराओं में बंट गई थीं, हर धारा का कुछ नाम है, बद्रीनाथ धाम की धारा को अलकनंदा कहते हैं। यह मंदिर 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जो कि शालग्रामशिला से बनी हुई है। कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य ने इसका निर्माण कराया था। यहां हर साल मूर्ति मेला भी लगता है और आपको बता दें कि बर्दी विशाल के यहां आप पांच रूप देखने को मिलते हैं इसलिए इन्हें 'पंच बद्री' भी कहा जाता है। बद्रीनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा यहां पर अन्य 4 स्वरूपों के मंदिर भी है।

पांडवों ने अपने पितरों का पिंडदान किया था

आपको बता दें कि इस मंदिर का जिक्र महाभारत में भी है क्योंकि श्री व्यास दी ने इसी स्थान पर बैठकर महाभारत की रचना की थी। माना जाता है कि इसी स्थान पर पांडवों ने अपने पितरों का पिंडदान किया था और इसी कारण तीर्थयात्री अपने पितरों का आत्मा का शांति के लिए पिंडदान करते हैं।

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English summary
Uttarakhand: The doors of Badrinath Dham opened for devotees on Sunday morning, pilgrim happy, here is video, please have a look.
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