Uttarakhand news: स्मार्ट मीटर में छेड़छाड़, अलर्ट होते ही भागने लगे, पुलिस ने दबोचा, जानिए मीटर के फायदे
Uttarakhand news उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। चोरों ने मीटर की सील हटाने की कोशिश की तो तुरंत मीटर की स्क्रीन पर अलर्ट और कंट्रोल रूम तक रिपोर्ट पहुंच गई। इसके बाद चोर घबरा गए और भागने लगे जिसके बाद पुलिस ने पकड़ लिया। स्मार्ट मीटर से चोरी का मामला सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है।
मामला रुड़की के गुरुकुल नारसन का बताया जा रहा है, कुछ दिन पहले गुरुकुल नारसन स्थित 33 केवी सब स्टेशन में रात करीब एक बजे चार चोर भीतर घुसे। उन्होंने फैक्टरी के मीटर में छेड़छाड़ शुरू की। स्मार्ट मीटर लगने के कारण जैसे ही उन्होंने मीटर की सील हटाने का प्रयास किया तो मीटर की स्क्रीन पर अलर्ट आ गया।

उनके कंट्रोल रूम में भी इसका मैसेज आ गया। मीटर की स्क्रीन को देखकर अचानक चोर घबरा गए। वे भागने लगे तो संदिग्ध गतिविधि देखकर पुलिस ने रोक लिया। पूछताछ में उन्होंने बिजली मीटर में चोरी के लिए छेड़छाड़ की बात स्वीकारी, जिसके बाद मुकदमा दर्ज हुआ।
बिजली विभाग के अनुसार स्मार्ट मीटर अत्याधुनिक तकनीकी से लैस है। जैसे ही इसका कोई ढक्कन भी खोलने का प्रयास करेगा तो न केवल मीटर पर अलर्ट दिखेगा बल्कि यूपीसीएल के कंट्रोल रूम तक इसका पूरा रिकॉर्ड आ जाता है। किसी मीटर में कोई कितनी छेड़छाड़ कर रहा है, उसका रिकॉर्ड 10 साल तक निगम के पास सुरक्षित रहता है। यूपीसीएल प्रबंधन के मुताबिक, स्मार्ट मीटर लगने के कारण तेजी से लाइन लॉस कम हो रहा है।
स्मार्ट मीटर के फायदे-
- सटीक बिलिंग
- अब मीटर रीडिंग में गलती या अनुमान नहीं
- बिल असली खपत के अनुसार ही बनेगा।
- रीयल-टाइम डेटा
- मोबाइल ऐप या पोर्टल पर देख सकते हैं कि कितनी बिजली कब खर्च की।
- बिजली उपयोग को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।
- प्रीपेड सुविधा
- बिजली को मोबाइल रिचार्ज की तरह रिचार्ज कर सकते हैं।
- जितनी बिजली के लिए भुगतान किया है, उतनी ही खपत होगी।
- लोड मैनेजमेंट
- बिजली चोरी से बचाव
- स्मार्ट मीटर बिजली चोरी या छेड़छाड़ को तुरंत पहचान लेते हैं
- बिना विजिट रीडिंग
- मीटर रीडर के आने की जरूरत नहीं। डेटा अपने आप कंपनी तक पहुँच जाता है।
- बिजली कटने की जानकारी
- बिजली जाती है या आती है, उसकी सूचना स्वतः मिल सकती है।
- रीडिंग और बिलिंग में पारदर्शिता
- डेटा स्वतः डिजिटल सिस्टम में जाता है, जिससे मानवीय त्रुटियाँ खत्म होती हैं।
- लोड डिस्ट्रीब्यूशन आसान
- विभाग को यह पता रहता है कि कहाँ पर बिजली की खपत ज़्यादा या कम है।
- बिजली चोरी पर नियंत्रण
- छेड़छाड़ की कोशिश का सिग्नल तुरंत सिस्टम में मिल जाता है।
- बिल वसूली आसान
- प्रीपेड सिस्टम से बिल बकाया की समस्या नहीं रहती।












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