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उत्तराखंड चुनाव:दोनों पूर्व सीएम की हार का बदला लेने के लिए बेटियां थी चुनावी मैदान में, दोनों ने लहराया परचम

ऋतु खंडूरी कोटद्वार और अनुपमा रावत ​हरिद्वार ग्रामीण से जीती

देहरादून, 11 मार्च। उत्तराखंड चुनाव परिणाम में 70 में से दो सीटों पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई थी। जिनमें दो पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव हार चुके हैं। लेकिन इस बार उनकी बेटियों ने चुनाव जीतकर रिकॉर्ड बना दिया। साथ ही एक तरफ जहां पिता की हार का बदला ले लिया, वहीं परिवार की राजनीति को भी आगे बढ़ाया है। भाजपा के पूर्व सीएम बीसी खंडूरी की बेटी ऋतु खंडूरी भूषण 3687 वोट से कोटद्वार और कांग्रेस के पूर्व सीएम हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत ​हरिद्वार सीट से 4472 वोट से चुनाव जीत चुकी है।

Uttarakhand elections- both the daughters were in the electoral fray to avenge the defeat of the former CM, both waved the flag

अंतिम समय में हुआ था दोनों का टिकट भी फाइनल
उत्तराखंड के चुनावी इतिहास में पूर्व मुख्यमंत्रियों को चुनाव हारने का मिथक नहीं टूट पाया। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्रियों की बेटियों ने उसी सीट से चुनाव लड़कर पिता के हार का बदला जरुर ले लिया है। भाजपा ने अंतिम समय में जहां कोटद्वार सीट पर यमकेश्वर से टिकट काटकर ऋतु खंडूरी को चुनावी मैदान में उतारा तो कांग्रेस ने एक परिवार से एक टिकट का फॉर्मूला सिर्फ हरीश रावत की बेटी के लिए तोड़ दिया। अनुपमा को हरिद्वार सीट से टिकट दिया गया था। दोनों ने ही पार्टी के विश्वास पर खरा उतरकर निर्णय को सही साबित कर दिया।
खंडूरी ही जरुरी का नारा, लेकिन खुद ही हारे
2007 में मुख्यमंत्री बने बीसी खंडूरी 2012 में कोटद्वार सीट से चुनाव लड़े। तब पार्टी ने खंडूरी है जरुरी का नारा दिया था। लेकिन पार्टी 31 सीटें जीतकर विपक्ष में बैठी लेकिन भाजपा के सीएम फेस खंडूरी कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह नेगी से 4,623 वोटों से हार गए। खंडूरी को 27,174 वोट और नेगी को 31,797 वोट मिले थे। इस हार के बाद खंडूरी सक्रिय राजनीति से दूर हो गए। खंडूरी की विरासत संभालने के लिए उनकी बेटी ऋतु खंडूरी भूषण राजनीति में आई, वे भाजपा की महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, जबकि 2017 से वर्तमान में वह यमकेश्वर से विधायक भी रहीं हैं। हालांकि बीसी खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी कांग्रेस पार्टी में हैं और गढ़वाल सीट से सांसद का चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन वे चुनाव नहीं जीत पाए। अब खंडूरी की बेटी ने कोटद्वार सीट से ही चुनाव जीतकर अपने पिता की हार का बदला ले लिया है।
हरदा नहीं जीत पाए एक भी सीट
2017 विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में लड़ा। हरीश रावत दो जगह से चुनाव मैदान में उतरे। हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा। लेकिन जनता ने हरदा को दोनों जगह से हार का जनादेश दिया। हरिद्वार ग्रामीण सीट पर भाजपा के स्वामी यतीश्वरानंद ने हरीश रावत को शिकस्त दी। इस बार हैट्रिक की उम्मीद लगाए यतीश्वरानंद को हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत ने हराकर पुरानी हार का हिसाब बराबर कर लिया। हरीश रावत इस बार भी लालकुंआ सीट से चुनाव हारे हैं। ऐसे में बेटी की जीत ही हरदा के लिए संजीवनी बनकर आई है।

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