चकराता कांग्रेस तो ऋषिकेश भाजपा का गढ़, विकासनगर में पुरानी जंग, डोईवाला में नए चेहरों से जगी आस

पछवादून में चकराता,विकासनगर, परवादून में डोईवाला, ऋषिकेश सीटें

देहरादून, 8 फरवरी। राजधानी देहरादून की पछवादून और परवादून की सीटें राजनीति और सियासत के लिहाज से खास हैं। ​पछवादून में चकराता और विकासनगर सीटें आती हैं, जबकि परवादून में डोईवाला और ऋषिकेश सीटें हैं। पछवादून की चकराता में कांग्रेस तो परवादून की ऋषिकेश में भाजपा का गढ़ रहा है। ऐसे में इस बार क्या कुछ बदलाव होगा। जो कि आसान नहीं लग रहा है। इसके अलावा विकासनगर में भाजपा के मुन्ना और कांग्रेस के नवप्रभात के बीच पुरानी जंग होनी है। जबकि डोईवाला में इस बार भाजपा, कांग्रेस दोनों ने नए चेहरों पर दांव खेला है।

Chakrata Congress, Rishikesh BJP stronghold, old war in Vikasnagar, new faces in Doiwala raised hope

चकराता सीट कांग्रेस और प्रीतम के परिवार का गढ़
चकराता सीट का अपना इतिहास है। पहले मसूरी और बाद में चकराता के नाम से पहचान रखने वाली विधानसभा सीट से आठ बार विधायक रहे कांग्रेस के कद्दावर नेता स्व. गुलाब सिंह ने वर्ष 1985 के चुनाव में इतिहास रचा था। तब वह निर्विरोध चुनकर विधानसभा पहुंचे थे। वर्ष 1990 में गुलाब सिंह के राजनीति से संन्यास लेने के बाद इस विरासत को उनके बेटे प्रीतम सिंह आगे बढ़ा रहे हैं। अविभाजित उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में वह पांच बार चकराता से जीतकर रिकॉर्ड बना चुके हैं। एक बार फिर कांग्रेस के प्रीतम सिंह किस्मत आजमा रहे हैं। जबकि भाजपा ने इस बार सिंगर जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल को टिकट देकर नया दांव चला है।पर्यटन की दृष्टि से खूबसूरत चकराता अभी भी स्वास्थ और रोजगार के नाम पर पिछ़डा क्षेत्र नजर आता है।
विकासनगर में भाजपा, कांग्रेस दोनों को मिला है मौका
विकासनगर सीट पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ​ही दलों का कब्जा रहा है। उत्तराखंड बनने के बाद पहली बार हुए चुनाव में वर्ष 2002 में यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी नवप्रभात जीते। वर्ष 2007 में भाजपा से मुन्ना सिंह और 2009 में उपचुनाव में भाजपा से कुलदीप कुमार जीते। इसके बाद वर्ष 2012 में कांग्रेस के नवप्रभात और वर्ष 2017 में भाजपा के मुन्ना सिंह चौहान ने जीत दर्ज की। इस तरह इस सीट पर भाजपा, कांग्रेस दोनों का दबदबा रहा है। इस सीट पर ओबीसी वर्ग के मतदाता सबसे अधिक हैं। इसके अलावा मुस्लिम, अनुसूचित जाति,जौनसारी जनजाति समेत अन्य कई जातियों के वोटर हैं।विकासनगर में भी स्वास्थ, सड़क और रोजगार की समस्याएं हैं।

डोईवाला नए चेहरों पर दांव
2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई डोईवाला 2012 में भाजपा के डॉ रमेश पोखरियाल निशंक चुनाव जीते। 2014 में लोकसभा में सांसद निर्वाचित होने के बाद उपचुनाव में त्रिवेंद्र सिंह रावत विधायक बने। 2017 में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फिर से चुनाव जीता। लेकिन चुनाव से ठीक पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत मैदान से हट गए और भाजपा ने बृजभूषण गैरोला को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने इस बार गौरव चौधरी को मैदान में उतारा है। इस तरह से डोईवाला सीट पर इस बार नए चेहरों को मैदान में लाए हैं। इस सीट पर हर वर्ग के मतदाता है। सबसे ज्यादा पिछड़ा वर्ग के मतदाता अच्छी तादाद में हैं। जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति के मतदाता चुनाव परिणाम निर्धारित करने में महत्वपूर्ण निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस सीट पर किसान और अन्य वर्ग की समस्याएं हैं। इसके साथ ​ही शहर से सटा इलाका होने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।

ऋषिकेश भाजपा का गढ़, युवा चेहरे से कांग्रेस की ढहाने की कोशिश
यानि तीर्थनगरी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीट है। इस सीट पर 2007 से बीजेपी का कब्जा रहा है। ऋषिकेश से भाजपा के प्रेमचंद्र अग्रवाल ने अब तक हैट्रिक मारी है। जो कि विधानसभा के स्पीकर रह चुके हैं। इस बार प्रेमचंद्र अग्रवाल के सामने कांग्रेस ने जयेंद्र रमोला को टिकट दिया है। ऋषिकेश सीट पर साधु संत, तीर्थ पुरोहित, वैश्य और पहाड़ी वोटर हैं। ऐसे में इस सीट पर इस बार पहाड़ी और युवा चेहरे के भरोसे कांग्रेस को भाजपा का किला ढ़हाने की उम्मीद है।तीर्थनगरी में देश विदेश से लोग आते हैं। ऐसे में यहां पर्यटन की दृष्टि से विकास की अपार संभावनाएं बनी रहती हैं।

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