सिल्क्यारा सुरंग का काम कहां तक पहुंचा, जिन पाइप से निकाले गए थे मजदूर, अब मिली ये बड़ी मदद
यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा पोलगांव सुरंग का निर्माण कार्य 12 नवंबर को हादसे के बाद से ही बंद है। इस बीच सिलक्यारा सुरंग में डी वाटरिंग के पहले चरण का काम पूरा हो चुका है। डी वाटरिंग के पहले चरण के तहत एसडीआरएफ के पांच जवान और पांच सीनियर व जूनियर इंजीनियर सहित कुल दस लोग पांच घंटे तक सुरंग के अंदर रहे।

ये लोग उन्हीं 800 एमएम के पाइप से अंदर गए, जिनसे मजदूरों को बाहर निकाला गया था। अंदर गए कर्मचारियों ने गैस और रिसाव से जमा पानी चेक किया। एनएचआईडीसीएल कंपनी का दावा है कि सभी चीजें सामान्य हैं। 17 दिन तक 41 मजूदरो की जिस सिलक्यारा टनल में सांसे थमी रहीं, उसी सुरंग में एक बार फिर ढ़ाई माह बाद एक दल को सुरक्षा कार्य चेक करने के लिए अंदर भेजा गया है।
डी वाटरिंग के पहले चरण लिए एसडीआरएफ के पांच जवान और पांच सीनियर व जूनियर इंजीनियरों का दल ऑगर मशीन से डाले गए पाइपों से भीतर दाखिल हुआ। इस दौरान अंदर गए कर्मियों ने सुरक्षा का पूरा ध्यान दिया। बताया कि दल ने अंदर हादसे के बाद से फंसी मशीनों को चेक करने के साथ वहां गैस और पानी की जांच की है।
कंपनी का दावा है कि सभी चीजें सामान्य हैं और नियंत्रण में हैं। किसी तरह की चिंता की बात नहीं है। पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद अब सुरंग में डी.वाटरिंग का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा। जो कि सबमर्सिबल पंप चालू करने का होगा। सुरंग में जमा पानी को धीरे-धीरे निकाला जाएगा।
यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा पोलगांव सुरंग का निर्माण कार्य 12 नवंबर को हादसे के बाद से ही बंद है। बीते माह 23 जनवरी को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कार्यदायी संस्था को सुरंग का निर्माण शुरू करने की अनुमति दी थी।
सबसे पहले सिलक्यारा वाले मुहाने से 150 से 200 मीटर तक क्षैतिज सुदृढ़ीकरण और सुरंग धंसने जैसी स्थिति में बचाव के लिए 80 से 203 मीटर तक 800 एमएम के ह्यूम पाइप बिछाए गए हैं। अब डीवाटरिंग का काम शुरू हुआ है।












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