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शोधकर्ता और वैज्ञानिकों का दावा, कोरोना से लड़ने में मदद करेगा ये हिमालयी पेड़, जानिए इसके बारे में सबकुछ

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देहरादून, 20 जनवरी। कोरोना से भारत ही नहीं पूरा विश्व प्रभावित हुआ है। हर कोई कोरोना का प्रभावी इलाज ढूंढ रहे हैं। वैक्सीन आने के बाद लोगों ने थोड़ा राहत जरुर ली है। लेकिन कोरोना से लड़ने के लिए अभी भी शोध जारी है। इस बीच वैज्ञानिकों के एक और शोध और दावे ने लोगों को राहत दी है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी और इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी (आईसीजीईबी) के रिसर्चर ने हिमालयी पौधे बुरांश की पत्तियों में फाइटोकेमिकल होने का पता लगाया है। जिसका इस्तेमाल कोरोना संक्रमण के उपचार के लिए हो सकता है। बुरांश उत्तराखंड का राज्य वृक्ष है। रिसर्चर का दावा है कि रसायन युक्त पत्तियों में वायरस से लड़ने की क्षमता है।

Researchers and scientists claim, this Himalayan tree will help fight corona, know everything about it

रसायन युक्त पत्तियों में वायरस से लड़ने की क्षमता का दावा

कोरोना को लेकर विश्व स्तर पर लगातार शोध चल रही है। इसी तरह की एक शोध हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले बुरांश को लेकर हुई है। शोधकर्ताओं ने बुरांश के पौधे में कोरोना से लड़ने वाले गुण पाए हैं। हिमालयी राज्यों में पहले ही बुरांश का उपयोग किया जाता है। वैज्ञानिकों ने इस पौधे के एंटीवायरल गुणों पर विशेष ध्यान देने के साथ इसमें पाए जाने वाले विभिन्न फाइटोकेमिकल्स वाले अर्क का वैज्ञानिक रूप से परीक्षण किया। शोधकर्ताओं ने बुरांश की पंखुड़ियों से फाइटोकेमिकल्स निकाले और उनके एंटीवायरल गुणों को समझने के लिए अध्ययन किया। एक बयान में कहा गया है कि पौधे की पंखुड़ियों से निकल गर्म अर्क क्विनिक एसिड और डेरिवेटिव से भरपूर पाया गया है। हालांकि अभी इस पर बड़े स्तर पर शोध होना बाकि है।कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ पंकज नौटियाल ने बताया कि ​बुरांश उच्च हिमालय के क्षेत्रों में पाया जाता है। जिस तरह की अब तक जानकारी मिली है और अध्ययन से पता चला है, उससे एक आशा की किरण जगी है। उन्होंने कहा कि ये रिसर्च स्थानीय लोगों और युवाओं को रोजगार देने में भी मददगार साबित हो सकती है।

जानिए बुरांस के बारे में सबकुछ-

बुरांस या बुरुंश रोडोडेंड्रॉन सुन्दर फूलों वाला एक वृक्ष है। बुरांस का पेड़ उत्तराखंड का राज्य वृक्ष है इसके साथ ही नेपाल में बुरांस के फूल को राष्ट्रीय फूल घोषित किया गया है। गर्मियों के दिनों में ऊंची पहाड़ियों पर खिलने वाले बुरांस के सूर्ख फूलों से पहाड़ियां भर जाती हैं। हिमाचल प्रदेश में भी यह पैदा होता है। बुरांश हिमालयी क्षेत्रों में 1500 से 3600 मीटर की मध्यम ऊंचाई पर पाया जाने वाला सदाबहार वृक्ष है। बुरांस के पेड़ों पर मार्च-अप्रैल माह में लाल सूर्ख रंग के फूल खिलते हैं। बुरांस के फूलों का इस्तेमाल दवाइयों में किया जाता है, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों को यथावत रखने में बुरांस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बुरांस के फूलों से बना शरबत हृदय-रोगियों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। बुरांस के फूलों की चटनी और शरबत बनाया जाता है। रोडोडेंड्राँन झाड़ी अथवा वृक्ष की ऊँचाईवाला पौधा है, जो एरिकेसिई कुल में रखा जाता है। इसकी लगभग 300 जातियां उत्तरी गोलार्ध की ठंडी जगहों में पाई जाती हैं। अपने वृक्ष की सुंदरता और सुंदर गुच्छेदार फूलों के कारण यह यूरोप की वाटिकाओं में बहुधा लगाया जाता है। भारत में रोडोडेंड्रॉन की कई जातियां पूर्वी हिमालय पर बहुतायत से उगती हैं। रोडोडेंड्रॉन आरबोरियम अपने सुंदर चमकदार गाढ़े लाल रंग के फूलों के लिए विख्यात है। इस वृक्ष की सुंदरता के कारण इसकी करीब 1,000 उद्यान नस्लें निकाली गई हैं।

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English summary
Researchers and scientists claim, this Himalayan tree will help fight corona, know everything about it
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