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उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए आसान नहीं है रामनगर की डगर, जानिए क्यों

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देहरादून, 26 जनवरी। उत्तराखंड में कांग्रेस चुनाव अभियान की कमान संभाल रहे और मुख्यमंत्री के तौर पर सभी सर्वे रिपोर्ट में जनता की पहली पसंद बने हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के रामनगर सीट से टिकट फाइनल होने के बाद पूरे प्रदेश की नजर अब रामनगर सीट पर टिक गई हैं। हरीश रावत को शुरूआत में ही रणजीत रावत का विरोध झेलना पड़ रहा है, लेकिन ये बात साफ है कि रामनगर की राह हरीश रावत के लिए आसान नहीं होगी। कांग्रेसी रणनीतिकार इसे 2017 के चुनाव से भी जोड़ रहे हैं। जब हरीश रावत दो सीटें हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा सीट से चुनाव लड़ने के बाद भी दोनों सीटें हार गए थे। ऐसे में इस बार हरीश रावत के लिए रामनगर सीट पर चुनाव लड़ना सबसे बड़ी मुश्किल साबित हो सकता है।

Ramnagar road is not easy for former Chief Minister Harish Rawat in Uttarakhand, know why

आखिरी चुनाव माना जा रहा हरदा का
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए 2022 का विधानसभा चुनाव करो या मरो वाली स्थिति का चुनाव माना जा रहा है। ऐसे में शुरूआत से ही हरीश रावत के चुनाव लड़ने को लेकर आशंका जताई जा रही थी, हालांकि हरीश रावत ने टिकट वितरण के आखिरी समय में रामनगर सीट को चुना। रामनगर सीट का उत्तराखंड की इतिहास में खास महत्व है। पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री और एक मात्र 5 साल पूरा करने वाले दिवंगत नारायण दत्त तिवारी ने रामनगर सीट से ही प्रतिनिधित्व किया था। इसके अलावा रामनगर का मिथक जिस दल का विधायक चुना गया प्रदेश में सरकार बनाई भी कांग्रेस और हरीश रावत के लिए बड़ा कारण माना जा रहा है। लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत के समर्थक उनका विरोध कर रहे हैं। हरीश रावत ने रामनगर सीट पर अपना दांव चल तो दिया है लेकिन रणजीत रावत की नाराजगी हरीश रावत के लिए 2017 के विधानसभा चुनाव का इतिहास न दोहराने की चुनौती भी है। हरीश रावत के लिए ये आखिरी चुनाव माना जा रहा है। हरीश रावत समर्थकों ने रामनगर सीट पर चुनाव कार्यालय खोला तो रणजीत रावत ने भी अपना चुनाव कार्यालय खोल दिया। ये बात दर्शाता है कि हरीश रावत के लिए ये चुनाव आसान नहीं होगा। ऐसे में हरीश रावत के लिए सभी 69 विधानसभा सीट एक तरफ और रामनगर सीट एक तरफ मानी जा रही है।इस बीच हरीश रावत ने 28 जनवरी को नामांकन दाखिल करने से पहले सोशल मीडिया में भावनात्मक पोस्ट शेयर की है। जिसमें हरीश रावत ने लिखा है कि-

मैं आभारी हूं पार्टी नेतृत्व का उन्होंने मुझे रामनगर की जनता जनार्दन का आशीर्वाद पाने के लिए अधिकृत किया है। मेरे मन के कोने में बहुत समय से ये आकांक्षा छिपी हुई थी कि मैं कभी रामनगर से चुनाव लड़ू। जब मैंने वयस्क होने की तरफ कदम बढ़ाए तो मेरी सारी स्मृतियाँ रामनगर और उसके चारों तरफ के इलाके की घटनाओं, यादों, साथियों, गलियों, चेहरों, बगीचों, चाय के खुमचों, चाट-पकोड़ी की दुकानों के साथ जुड़ी हुई हैं। मैंने अपने राजनैतिक जीवन की अ-आ, क-ख भी रामनगर में ही सीखी। जब मैं इंटर की शिक्षा ग्रहण करने यहां आया तो मेरे राजनीति ट्यूटर सुशील कुमार निरंजन जी, जय दत्त जोशी जी, शिवप्रकाश अग्रवाल जी, विष्णु कामरेड जी, कैलाश जोशी जी, ललित दुर्गापाल जी, कॉमरेड हरिदासी लाल जी जैसे कई लोग थे, जिनके सानिध्य में मैंने बात करना, तर्क करना और कुछ राजनैतिक चीजों पर चिंतन करना प्रारंभ किया जो एक पूंजी के साथ आज भी मेरे काम आ रहा है। मेरे राजनैतिक जीवन की हल्की सी बुनियाद एम.पी. इंटर कॉलेज, ललदा और डंगवाल साहब, जोशी जी व अल्ला रखे चाय की दुकान पर पड़ी और बहुत कुछ एम.पी. इंटर कॉलेज के फील्ड में सीखा, जो कुछ सीखा वो पूंजी बनकर आज भी मेरे साथ है। उस समय के बहुत सारे साथी, सहयोगी आज भी मुझे बहुत याद आते हैं। क्योंकि उस समय की दोस्ती निश्चल दोस्ती होती थी, उसमें आज की राजनीति के छल, फरेब, घमंड, अहंकार आदि नहीं थे, जैसे दिखते थे वैसे ही कहते थे। मेरे अंदर का वो हरीश रावत जो रामनगर से कुछ सीख कर आगे बढ़ा, कभी भी बूढ़ा नहीं हुआ, कभी थक कर के सोया नहीं। मन के कोने में हमेशा रामनगर के लिए एक लालसा रही। जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मैंने कुछ कार्य पत्रं-पुष्पम् के तौर पर यहां के लिए स्वीकृति किये। बस अड्डे का काम जिस रूप में मैंने स्वीकृत किया था, उस रूप में आगे नहीं बढ़ रहा है। मालधन को जोड़ने वाली सड़क भी जिस तर्ज पर मैंने स्वीकृति की थी, उस तर्ज पर आगे नहीं बड़ी, परंतु डिग्री कॉलेज बन गया। मैंने कोशिश की थी कि मैं गर्जिया माता के चारों तरफ कुछ ऐसा सुरक्षात्मक कार्य करूँ, कुछ धन हमने स्वीकृत भी किया, खर्च भी हुआ। मगर जैसा मैं चाहता था, वैसा नहीं हो पाया। आज भी मुझे दोनों तरफ, गढ़वाल की तरफ भी और अल्मोड़ा की तरफ भी जाने वाली सड़क की स्थिति बहुत खटकती है। सत्यता तो यह है कि रामनगर से लगा हुआ बेतालघाट, खैरना इधर गुजणु पट्टी होकर के बैजरौ व उससे आगे का इलाका और सल्ट, चिंतोली होकर के गैरसैंण तक का इलाका, भतरौजखान-रानीखेत-अल्मोड़े का इलाका विकास की दौड़ में तुलनात्मक रूप से पीछे है। रामनगर इन क्षेत्रों का केंद्र बिंदु है, रामनगर में इन क्षेत्रों के विकास के ग्रोथ सेंटर होने की पूरी संभावनाएं व क्षमताएं विद्यमान हैं। मेरी आकांक्षा है कि राज्य में ऐसी सरकार बने जो ऐसा कर सके, यह उत्तराखंड के विकास में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। आप लोग जानते हैं यदि आपने हरीश रावत को अवसर दिया, तो हरीश रावत रामनगर से लगे हुए क्षेत्रों की आकांक्षाओं को पूरा करने का काम कर सकता है, इस भू-भाग के विकास में एक बड़ा अंतर पैदा कर सकता है। मैं तो केवल आपके अपनत्व की धारा को प्रभावित करने के लिए हाथ जोड़कर के खड़ा हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि जो आदेश पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने दिया है, मैं उस आदेश को सफलतापूर्वक आपका आशीर्वाद प्राप्त कर पूरा कर पाऊंगा।

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English summary
Ramnagar road is not easy for former Chief Minister Harish Rawat in Uttarakhand, know why
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