पूर्व सीएम हरीश रावत ने धामी के प्रतिद्वंद्वियों को क्यों किया सावधान, क्या है हरदा के पोस्ट के सियासी मायने?
पूर्व सीएम हरीश रावत ने जोशीमठ मामले पर सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इसके बाद हरदा ने सोशल मीडिया में लिखा कि भविष्य के प्रतिद्वंद्वियों को सावधान रहना चाहिये। राज्य के मुख्यमंत्री अच्छे सुनने वाले व्यक्ति हैं।

उत्तराखंड की सियासत में हमेशा से ही अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट से सुर्खियां बटोरने वाले पूर्व सीएम हरीश रावत की एक और सोशल मीडिया पोस्ट जमकर वायरल हो रही है। जिसमें हरीश रावत एक तरफ सीएम पुष्कर सिंह धामी की तारीफ कर रहे हैं तो दूसरे तरफ उनके प्रतिद्वंद्वियों को सावधान भी कर रहे हैं। हरदा के इस नए पोस्ट के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं।
राज्य के मुख्यमंत्री बहुत अच्छे सुनने वाले व्यक्ति
पूर्व सीएम हरीश रावत ने जोशीमठ मामले पर कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के साथ सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इसके बाद हरदा ने सोशल मीडिया में इसके बारे में जानकारी देते हुए लिखा कि
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भविष्य के प्रतिद्वंद्वियों को सावधान रहना चाहिये। राज्य के मुख्यमंत्री बहुत अच्छे सुनने वाले व्यक्ति हैं। कल हम जोशीमठ आपदा पर ढेर सारे सुझाव देने के लिए गये। जिसमें कई सुझाव आलोचनात्मक भी थे, तीक्ष्ण सवाल भी थे, मगर मुख्यमंत्री ने पूरे धैर्य के साथ उनको सुना। अब कितना समाधान निकालेंगे, इस पर भविष्य की नजर रहनी चाहिए। देखते हैं प्रीफैबरीकेटेड घर कब बनने शुरू होते हैं, टेंट कॉलोनी यदि हो तो कब तक लगती है, सुरक्षित स्थानों का चयन कब होता है, मुआवजे की राशि लोगों को कब तक बता दी जाती है, कितना मुआवजा मिलेगा और किस तरीके से साधारण लोग जिनकी आजीविका जोशीमठ पर है उनके लिए क्या होता है! गाय के लिए क्या होता है, गाय के दूध पर जिनकी आर्थिकी है उनके लिए क्या होता है, तो बहुत सारी चीज़ें हैं, जिनकी हम सबको प्रतीक्षा रहेगी। मगर एक बात सत्य है कि सुना मुख्यमंत्री ने पूरे धैर्य से।
दोनों को चेतावनी देने के साथ ही धामी की तारीफ भी कर सबको चौंकाया
पूर्व सीएम हरीश रावत के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट हमेशा अलग और खास होती है। जिसके जरिए वे सियासत को गरमा देते हैं। इस नई पोस्ट के जरिए हरदा ने कांग्रेसियों और भाजपाई दोनों को चेतावनी देने के साथ ही धामी की तारीफ भी कर सबको चौंकाया है। हरदा ने इस पोस्ट के जरिए भाजपा के अंदर भी ये संकेत दिया है कि धामी का विकल्प बनना आसान नहीं होगा। इस तरह से हरदा ने एक बार फिर प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है।












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