प्रधान और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों को लेकर धामी सरकार का बड़ा फैसला, जानिए क्या हुआ ऐतिहासिक निर्णय
जिला पंचायत अध्यक्षों को कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासक बनाने के सरकार के निर्णय के बाद प्रधान और क्षेत्र पंचायत प्रमुख भी प्रशासक नियुक्त होंगे। धामी सरकार के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया जा रहा है। बता दें कि प्रधान और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों का भी कार्यकाल पूरा हो चुका है।
निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाने के बाद प्रधान संगठन ने भी इसकी मांग की थी। जिसके लिए एक समिति का गठन किया गया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने इसका आदेश जारी कर दिया है। अब ये सवाल भी उठ रहा है कि क्या निकाय के साथ त्रिस्तरीय चुनाव नहीं होंगे।

ग्राम पंचायत के कार्यकाल की समाप्ति के छह माह के भीतर चुनाव कराए जाने आवश्यक हैं। ऐसे में अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं। हरिद्वार जिले को छोड़कर अन्य ग्राम पंचायत के निवर्तमान ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों को ही प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। इसके अध्ययन के लिए बनी समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ने इसका आदेश जारी कर दिया।
शासनादेश के मुताबिक हरिद्वार जिले को छोड़कर राज्य की समस्त गठित ग्राम पंचायत के कार्यकाल की समाप्ति के छह माह के भीतर या नई ग्राम पंचायत का गठन किए जाने तक जो भी पहले हो प्रशासक के रूप में संबंधित जिले की ग्राम पंचायत के निवर्तमान ग्राम प्रधान को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। जबकि क्षेत्र पंचायतों में निवर्तमान क्षेत्र पंचायत प्रमुख प्रशासक बनाए जाएंगे। जिलाधिकारी को इसके लिए अधिकार दिया गया है।
हरिद्वार जिले के 318 ग्राम प्रधानों को छोड़कर राज्य के 7478 निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया जाएगा। इसमें अल्मोड़ा जिले में 1160, नैनीताल में 479, बागेश्वर में 402, पिथौरागढ़ में 686, चंपावत में 313, ऊधमसिंह नगर में 375, पौड़ी में 1173, टिहरी में 1035, चमोली में 610, रुद्रप्रयाग में 336, उत्तरकाशी में 506 और देहरादून जिले में 401 निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक बनेंगे। इसी तरह राज्य के 95 ब्लॉकों में से हरिद्वार को छोड़कर अन्य में क्षेत्र पंचायत प्रमुख प्रशासक बनेंगे।












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