उत्तराखंड में अब ऊर्जा कर्मचारियों ने किया हड़ताल का ऐलान, जानिए क्या है सीएम धामी की प्लानिंग

हड़ताल को लेकर प्रबंधन और कर्मचारियों में ठनी

देहरादून, 4 अक्टूबर। ऊर्जा के तीनों निगमों में कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर शासन और आंदोलन कर रहे कर्मचारियों में ठन गई है। एक तरफ कर्मचारियों ने 6 अक्टूबर से हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है, तो दूसरी तरफ शासन ने कर्मचारियों पर एस्मा लगाने और दूसरे निगमों में नियुक्ति और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर होमवर्क किया है। ऐसे में 6 अक्टूबर से ऊर्जा प्रदेश में ऊर्जा कर्मचारियों और शासन के बीच तकरार होना तय है।

प्रबंधन ने उठाए हैं कई कदम

प्रबंधन ने उठाए हैं कई कदम

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड(यूपीसीएल) प्रबंधन ने हड़ताल के विकल्प के तौर पर असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियरों के पदों पर अस्थायी भर्ती निकाली है। यह भर्ती एक साल के लिए की जा रही है। भर्ती की विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह भर्ती पूर्ण रूप से अस्थायी और एक वर्ष के लिए होगी। भर्ती के लिए चार और पांच अक्तूबर को इंटरव्यू लिए जाएंगे। ऊर्जा निगमों में कर्मचारियों की हड़ताल का विकल्प तलाशने के लिए अधिकारियों ने ठेकेदारों से भी बात की। उन्हें वैकल्पिक तौर पर कर्मचारी उपलब्ध कराने को कहा गया। इसके अलावा अधिकारियों ने पेयजल निगम, लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों की ड्यूटी ऊर्जा निगमों में लगाने के आदेश जारी किए हैं। तीनों ऊर्जा निगमों में कार्यरत कर्मचारियों के आंदोलन करने की सूरत में सरकार ने एस्मा के तहत कार्रवाई की तैयारी कर ली है।

समझौता हुआ लेकिन इसका सम्मान नहीं

समझौता हुआ लेकिन इसका सम्मान नहीं

उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि 27 जुलाई को बैठक में 14 सूत्रीय मांगपत्र पर समझौता हुआ था। ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत से समझौता हुआ लेकिन इसका सम्मान नहीं किया जा रहा है। कर्मचारी 2017 से लगातार अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। 27 जुलाई को ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत ने वादा किया था कि 15 दिन के भीतर निगम स्तर और इससे ऊपर की मांगों को एक माह के भीतर पूरा किया जाएगा। लेकिन अभी त​क कोई निर्णय नहीं होने से वे हड़ताल के लिए बाध्य हैं। इधर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने देहरादून आकर उत्तराखंड के तीनों ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों के आंदोलन के लिए देश के 15 लाख बिजली कर्मचारियों का समर्थन दिया। उन्होंने साफ कहा कि अगर सरकार ने कर्मचारियों का उत्पीड़न, गिरफ्तारी की तो देशभर से बिजली कर्मचारी उत्तराखंड आकर सामूहिक गिरफ्तारी देंगे।

 सरकार अपनी व्यवस्था कर रही, हम जायज मांग कर रहे

सरकार अपनी व्यवस्था कर रही, हम जायज मांग कर रहे

विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 31 अगस्त से आंदोलन शुरू किया था। देहरादून सहित राज्य के सभी जनपदों में तीनों ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों ने पावर हाउस, बांध, बैराज, ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन और उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के विभिन्न बिजली घरों पर 10 बजे से 12 बजे प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। 23, 25 और 27 सितंबर को तीनों ऊर्जा निगमों के मुख्यालयों पर एक दिवसीय सत्याग्रह किया गया। अब 6 अक्टूबर से हड़ताल पर जाने वाले हैं। उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी दीपक बैनिवाल ने कहा कि सरकार अपनी व्यवस्था कर रही है। हम अपनी जायज मांग कर रहे हैं। 27 अगस्त को मंत्री हरक सिंह रावत ने आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक कुछ भी निर्णय नहीं हुआ। हमें निगम के 10 हजार कर्मचारियों और दूसरे राज्यों से भी समर्थन मिल चुका है।

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