Morbi Bridge: उत्तराखंड में पुराने, जर्जर और झुले पुल को लेकर धामी सरकार ने उठाए बड़े कदम, ये है प्लानिंग

पुराने, जर्जर पुल चिह्नित, झूला को पुलों जांचने के निर्देश

Morbi Bridge Uttarakhand गुजरात में हुए पुल हादसे के बाद उत्तराखंड की धामी सरकार ने प्रदेश में पुराने और जर्जर हो चुके पुलों को लेकर प्लान तैयार किया है। इसके साथ गुजरात में झूला पुल टूटने की घटना के बाद डीजीपी अशोक कुमार ने उत्तराखंड के सभी जिलों में झूला पुलों की स्थिति जांचने के निर्देश दिए हैं। डीजीपी ने कहा कि पुलों से संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आवाजाही होने दी जाए। जिन पुलों को बंद किया गया है, उन पर किसी भी तरह की आवाजाही हुई तो कार्रवाई की जाएगी।

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जर्जर और पुराने पुलों को लेकर अभियान शुरू

गुजरात के मोरबी में नदी का केबल ब्रिज टूटने से सैकड़ों जिंदगियां खत्म हो गईं। सरकार 100 से ज्यादा मौतों की पुष्टि कर चुकी है। कई लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं, दो दर्जन लोग अस्पताल में उपचार करा रहे हैं। गुजरात में हुए पुल हादसे में के जान गंवाने के बार अब जर्जर और पुराने पुलों को लेकर अभियान शुरू हो गया है। उत्तराखंड पहाड़ी राज्य है और यहां कई जगह आवाजाही के लिए झूला और दूसरे पुल हैं। ऐसे पुलों को चिह्नित करने का काम शुरू हो चुका है जो जर्जर हैं। लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश में ऐसे 436 पुराने पुल चिन्हित कर लिए हैं। इनमें से अधिकांश पुल राज्य के पर्वतीय जिलों में हैं। इनमें सबसे अधिक 207 पुल स्टेट हाईवे पर हैं। राज्य मार्गों पर बने ये पुल या तो पुराने या जर्जर हो चुके हैं या फिर वाहनों के बढ़ते दबाव के चलते ये उनका लोड सहने के योग्य नहीं हैं। विभाग ने पुराने पुलों की सूची तैयार कर ली गई है।

झूला पुलों की स्थिति की जांच कर ली जाए

देश में कई जगह आवाजाही के लिए झूला पुलों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें कुछ पुराने हैं, तो कई नए भी बने हुए हैं। डीजीपी ने बताया कि उन्होंने सभी जिला पुलिस को निर्देश जारी किए कि झूला पुलों की स्थिति की भलीभांति जांच कर ली जाए। इन पुलों के संबंध में जो तकनीकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाती है। बता दें कि बीते वर्ष ऋषिकेश का लक्ष्मण झूला पुल कमजोर और बेहद पुराना होने से यहां पर रात में आवाजाही को बंद कर दी गई थी। 3 अप्रैल 2022 को लक्ष्मण झूला पुल की सपोर्टिंग केबल टूट गई थी। हालांकि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। वर्ष 2019 में आईआईटी रुड़की ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में पुल आवाजाही के लिए पूरी तरह से अनफिट करार दिया था। 16 अप्रैल 2022 की रात को पुल को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। वर्ष 1927 में ब्रिटिश सरकार ने 137 मीटर लंबे नए लक्ष्मण झूला पुल का निर्माण शुरू किया। 1930 में पुल को आवागमन के लिए खोल दिया गया। वर्ष 2019 में पुल 90 साल की अवधि पूरी कर चुका था। शासन ने पुल की मजबूती का पता लगाने के लिए आईआईटी रुड़की से पुल का सर्वे कराया। 12 जुलाई 2019 में पुल को आवागमन के लिए बंद कर दिया। इसके बाद स्थानीय व्यापारियों और लोगों ने विरोध और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध के चलते 18 दिन बाद ही लोक निर्माण विभाग नरेंद्रनगर ने पुल को आवागमन के लिए दोबारा खोल दिया।

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