जानिए कब बंद होंगे बदरीनाथ के कपाट, आज से क्यों शुरू हुई कपाटबंदी की प्रकियाएं, ये है मान्यता
चार धाम यात्रा 2023 के समापन का काउंटडाउन शुरू हो गया है। गंगोत्री धाम के कपाट बंद हो गए हैं। अब कल भैया दूज पर यमुनोत्री व केदारनाथ के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद बदरीनाथ धाम के कपाट 18 नवंबर को अपराह्न 3 बजकर 33 मिनट पर शीतकाल के लिए बंंद किए जाएंगे।

जिसके साथ ही चार धाम यात्रा 2023 का समापन हो जाएगा। इस बीच बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने की प्रक्रिया आज से ही शुरू हो गई है। जिसकी एक खास पौराणिक मान्यता है। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रियाएं आज 14 नवंबर से शुरू हो जाएंगी।
मंगलवार को धार्मिक परंपरा के अनुसार, पूजा-अर्चना और भोग लगने के बाद धाम परिसर में स्थित भगवान गणेश मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि गणेश मंदिर बंद होने के बाद 15 नवंबर को आदिकेदारेश्वर मंदिर के कपाट बंद होंगे।
इससे पूर्व आदिकेदारेश्वर भगवान को पके चावलों का भोग लगाया जाएगा। 16 को खड़क पुस्तकों को गर्भगृह में रखा जाएगा और इसी के साथ बदरीनाथ धाम में वेद ऋचाओं का वाचन छह माह के लिए बंद हो जाएगा। 17 को धाम परिसर में स्थित लक्ष्मी मंदिर में कढ़ाई भोग का आयोजन होगा।
18 नवंबर को मां लक्ष्मी की प्रतिमा को बदरीनाथ गर्भगृह में विराजमान कर गर्भगृह से कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की प्रतिमा को बाहर लाकर उत्सव डोली में रखा जाएगा। इसके बाद अपराह्न 3 बजकर 33 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए जाएंंगे। इसके बाद बदरी विशाल के दर्शन शीतकाल में पांडुकेश्वर में होंगे।
कपाट बंद करने की प्रक्रिया 4 दिन पहले शुरू होने को लेकर तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि कपाट बंद होने की प्रक्रिया 4 दिन पहले होने की मान्यता पूजा अर्चना का काम नारद भगवान को सौंपने की प्रक्रिया से है। तीर्थ पुरोहित बताते हैं कि सामान्य दिनों में पूजा अर्चना पुस्तकों से भी होती है।
लेकिन आज से सिर्फ भोग और अभिषेक किया जाएगा और दर्शन हो पाएंगे। इसके पीछे मान्यता है कि आज से पुस्तकों का चार्ज नारद जी को सौंपा जाएगा। मान्यता है कि शीतकाल में नारद जी देवताओं की और से प्रधान पुजारी नारद जी को दिया जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications