पहाड़ों में ठंड की दस्तक, घूमने-फिरने का मस्त टाइम,जानिए उत्तराखंड के टॉप 10 टूरिस्ट प्लेस के बारे में
Uttarakhand top 10 best tourist places: उत्तराखंड में गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही इन दिनों घूमने के लिए भी सबसे अच्छा समय है। ऐसे में अगर घूमने फिरने का मन है तो उत्तराखंड के टूरिस्ट प्लेस की वादियां और मौसम सबसे बेस्ट विकल्प रहेगा।
पर्यटक नैनीताल,मसूरी,ऋषिकेश,चकराता, मुनस्यारी, हर्षिल, लेंसडोन समेत कई खूबसूरत पर्यटक स्थलों में कम बजट में भी आसानी से घूम फिर सकते हैं। दिवाली से पहले घूमने का सबसे बेहतर समय रहता है। इन दिनों न ज्यादा ठंड होती है और नहीं बारिश होने की समस्या। ऐसे में आइए जानते हैं ऐसे कुछ बेस्ट टूरिस्ट प्लेस के बारे में।

मसूरी
साल भर पर्यटकों की पहली पसंद रहती है। पहाड़ों की रानी मसूरी भारत के प्रमुख हिल स्टेशन में से एक है। जो कि देहरादून से 35 किमी की दूरी पर है। मसूरी और उसके आसपास कई दर्शनीय स्थल हैं कुछ प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण झरीपानी फॉल, लाल टिब्बा, क्लाउड्स एंड चाइल्डर्स लॉज, कैमल बैक रोड,भट्टा फाल,कैम्पटी फाल, नाग देवता मंदिर, मसूरी झील, सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस आदि कई पर्यटक स्थल हैं। खास बात ये है कि मसूरी घूमने के लिए ज्यादा समय की आवश्यकता नहीं है।
नैनीताल
नैनीताल भी पर्यटकों की पहली पसंद है, जहां ट्रेन या गाड़ी से आसानी से पहुंच सकते है। नैनीताल में घूमने फिरने के लिए ताल हैं। इसके साथ ही नैना देवी मंदिर,नैनी झील,तल्ली एवं मल्ली ताल, त्रिॠषि सरोवर,मॉल रोड, एरियल रोपवे प्रमुख जगह हैं। नैनीताल में नौकायन, राफ्टिंग का आनंद ले सकते हैं। नैनीताल रेलवे काठगोदाम, हल्द्वानी, रेलवे स्टेशन 35 किमी की दूरी पर है।
चकराता
चकराता भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह देहरादून से 98 किलोमीटर दूर है। यह सुंदर प्राकृतिक स्थान और ट्रैकिंग के लिए फेमस है। चकराता में दूर.दूर फैले घने जंगलों में जौनसारी जनजाति के आकर्षक गांव हैं। चकराता से 5 किमी पैदल चलने पर 50 मीटर ऊंचा टाइगर फॉल है। देहरादून एयरपोर्ट से चकराता तकरीबन 123 किलोमीटर दूर है।
ऋषिकेश
दिल्ली से मात्र 334 किलोमीटर दूरी पर है। यहां पहुंचने में लगभग 5 से 6 घंटे का समय लगता है। आध्यात्म के साथ ही रोमांच का भी ऋषिकेश कॉकटेल है। घूमने की सबसे अच्छी जगह लक्ष्मण झूला, बीटल्स कैफ़े, त्रिवेणी घाट, कुछ वाटरफॉल भी है। साथ ही रिवर राफ्टिंग भी यहां होती है।
लैंसडाउन
लैंसडाउन बहुत खूबसूरत हिल स्टेशन है। लैंसडाउन से केदारनाथ पर्वत और चौकंभा का सुंदर दृश्य दिखाई देता है, जिसके चारों ओर बर्फ की चादर का नजारा बेहद खूबसूरत लगता है। यहां घूमने के लिए संतोषी माता मंदिर, सेंट मेरी चर्च,दरवान सिंह संग्रहालय, भुल्ला ताल झील,तारकेश्वर महादेव मंदिर,टिप इन टॉप, गढ़वाल रेजिमेंट वॉर मेमोरियल और जंगल सफारी है।
हर्षिल
उत्तरकाशी से करीब 80 किमी दूर है हर्षिल। भागीरथी का प्रवाह और आसपास सेब के सुंदर बगीचे पर्यटकों का काफी आकर्षित करते हैं। यहां पर प्राकृतिक झरने और सुंदर पहाड़ियां समय बिताने का सबसे बेहतर विकल्प है। प्रकृति के खूबसूरत नजारें मन को काफी आकर्षित करते हैं।
चोपता
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित चोपता को खूबसूरती की वजह से मिनी स्वीट्जरलैंड भी कहा जाता है। यहां दुगलबिट्टा और बनियाकुंड में भी पर्यटकों की पहली पसंद है। चोपता बर्फबारी और अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए सबसे अलग है। बांज, बुरांश और देवदार सहित अन्य प्रजाति के पेड़ों से घिरे इस क्षेत्र में बुग्याल भी हैं। चोपता से तीन किमी की पैदल दूरी तय कर तृतीय केदार तुंगनाथ पहुंचा जाता है।
रानीखेत
अल्मोड़ा जिले से 56 किलोमीटर दूर हिल स्टेशन है रानीखेत। रानीखेत में पर्यटन के लिए गोल्फ कोर्स, सैंट ब्रिजेट चर्च, कुमाऊं रेजिमेंटल सेंटर, आशियाना पार्क, मनकामेश्वर मंदिर, रानी झील, बिनसर महादेव, भालूधाम, मजखाली, ताड़ीखेत, चौबटिया आदि स्थल देखने और घूमने को मिल जाते हैं। यहां कम खर्चे में काफी कुछ प्रकृति की खूबसूरती का एहसास किया जा सकता है।
कौसानी
बागेश्वर जिले में एक खूबसूरत नजारों से युक्त हिल स्टेशन है। अल्मोड़ा से यह हिल स्टेशन लगभग 51 किलोमीटर दूर है। कौसानी में हिमालय के बर्फ से ढके पहाड़, नंदा देवी और पंचुल चोटियां आदि रमणीक स्थल देखने को मिलते हैं। पहाड़ी ओक, देवदार और चीड़ के पेड़ों का जंगल भी प्रकृति की सुंदरता का एहसास कराता है। ट्रेकिंग करने वालों के लिए यहां कौसानी में कैलाश ट्रेक, बेस कौसानी ट्रेक और बागेश्वर-सुंदरधुंडा ट्रेक आदि रास्ते बने हुए हैं।
मुनस्यारी
पिथौरागढ़ में स्थित मुनस्यारी एक खूबसूरत पर्वतीय स्थल है। यह नेपाल और तिब्बत की सीमाओं के समीप है। मुनस्यारी चारो ओर से पर्वतो से घिरा हुआ है। मुनस्यारी के सामने विशाल हिमालय पर्वत श्रंखला का विश्व प्रसिद्ध पंचचूली पर्वत (हिमालय की पांच चोटियां) जिसे किवदंतियो के अनुसार पांडवों के स्वर्गारोहण का प्रतीक माना जाता है, बाई तरफ नन्दा देवी और त्रिशूल पर्वत, दाई तरफ डानाधार जो एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट भी है।
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