Kedarnath by-election: टिकट फाइनल होने से पहले ही कांग्रेस में कलह! जानिए किस बात को लेकर शुरू हुआ विरोध
Kedarnath by eletion उत्तराखंड में केदारनाथ उपचुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सबसे ज्यादा हलचल कांग्रेस के अंदर देखने को मिल रही है। कांग्रेस में पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और प्रदेश संगठन में रार सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस के पर्यवेक्षकों ने रिपोर्ट सीधे प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा को सौंपी है।
जिससे प्रदेश संगठन नाराज है। इसको लेकर प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा भी नाराज बताए जा रहे हैं। कांग्रेस हाईकमान ने केदारनाथ जीत की जिम्मेदारी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को सौंपी गई है। उनके साथ तीन विधायकों को भी पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

हरीश रावत खेमे का दबाव
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को सीनियर ऑब्जर्वर जबकि उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, विधायक वीरेंद्र जाति, लखपत बुटोला को भी पर्यवेक्षक बनाया गया है। गणेश गोदियाल को केदारनाथ उपचुनाव की जिम्मेदारी सौंपने के बाद से कांग्रेस के अंदर इसको लेकर भी कई तरह की चर्चा है। माना जा रहा है कि हरीश रावत खेमे के दबाव में ये फैसला लिया गया है।
पूर्व विधायक मनोज रावत की दावेदारी भारी
जिसके बाद से पूर्व विधायक मनोज रावत की दावेदारी को लेकर चर्चा है। अब पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी को सौंपने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस बीच प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का ये बयान भी सामने आया कि 24 अक्टूबर को दिल्ली में एक बैठक होने जा रही है। बताया जा रहा है कि प्रभारी ने उत्तराखंड के नेताओं को दिल्ली बुलाया है। जिसमें संभावित नामों पर चर्चा होगी।
दूसरे दावेदार नाराज
इसके बाद हाईकमान नाम पर मुहर लगाएगी। इस बीच कांग्रेस के अंदर तीन से चार तरह के सर्वे होने की बात भी सामने आई है। हालांकि उस रिपोर्ट को हाईकमान कितनी गंभीर है। इसको लेकर इंतजार करना होगा। जो कांग्रेस से दावेदारी कर रहे हैं उनको भी इस बात से आपत्ति है कि पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट सीधे हाईकमान तक कैसे पहुंचाई जा रही है। प्रदेश संगठन को दरकिनार किया जा रहा है। इस प्रकरण के बाद हरक सिंह की दावेदारी को लेकर भी मामला ठंडा पड़ता हुआ नजर आ रहा है।












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