Joshimath sinking : जोशीमठ में दरारें, नए मकानों में नहीं, पुरानों में बढ़ी, जानिए क्या है अपडेट
सीबीआरआई के वैज्ञानिकों ने घरों में क्रैकोमीटर लगाए थे। कुछ समय तक तो यह स्थिर रहे। लेकिन पिछले दो-तीन दिनों में दरारें बढ़ने लगी और क्रैकोमीटर ने जगह छोड़ दी। जिससे लोगों में दहशत नजर आ रही है।

कई दिनों की राहत के बाद जोशीमठ में एक बार फिर नई आफत नजर आने लगी है। जोशीमठ में भू धंसाव से मकानों में नई दरारें नहीं लेकिन पुराने दरारें फिर बढ़ने लग गई हैं। सिंहधार वार्ड के एक मकान में लगाए क्रैकोमीटर ने दरार बढ़ने से जगह छोड़ दी है। प्रभावित परिवार ने प्रशासन से उनके घर को असुरक्षित के दायरे में रखने की मांग की है।
60 से अधिक मकानों में क्रैकोमीटर लगाए गए
सीबीआरआई के वैज्ञानिकों ने घरों में क्रैकोमीटर लगाए थे। कुछ समय तक तो यह स्थिर रहे। लेकिन पिछले दो-तीन दिनों में दरारें बढ़ने लगी और क्रैकोमीटर ने जगह छोड़ दी। जिससे लोगों में दहशत नजर आ रही है। इस तरह के भवनों में मैकेनिकल क्रैक मीटर का उपयोग किया जाता है। जिससे दरार की डेप्थ चेक की जाती है और साथ ही इन मीटर से दरारों की मॉनिटरिंग की जाती है। इसमें एक ग्रेजुएट स्केल और एक पारदर्शी ऐक्रेलिक प्लेट लगी होती है, जिसमें हेयरलाइन कर्सर चिह्न होता है।क्रैक मीटर को जब एक दरार में स्थापित किया जाता है, इसे दरार के एक्रोस फिट किया जाता है। ग्रेजुएट स्केल और कर्सर दरार खुलने या कम होने के आधार पर एक दूसरे के सापेक्ष चलते हैं। इसके साथ ही एक और क्रैक मीटर होता है। जो कि दरार के ऊपर और नीचे की तरफ गति होने पर मूवमेंट करता है। ये मीटर दरारें चेक करने के लिए बहुत सटीक और सुविधाजनक हैं। सीबीआरआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि यहां पर 60 से अधिक मकानों में क्रैकोमीटर लगाए गए हैं। हमने इनका करीब 15 दिनों तक निरीक्षण किया है। अब प्रशासन को आगे की कार्रवाई करनी है। सिंहधार वार्ड के पास बदरीनाथ हाईवे पर पड़ी दरारें भी बढ़ रही हैं। हालांकि पानी का रिसाव कम हुआ है।
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जोशीमठ आपदा को एक माह पूरा
जोशीमठ आपदा को एक माह पूरा हो चुका है। एक तरफ प्रभावितों को केन्द्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार है तो दूसरी तरफ अभी तक भी लार्ज स्केल कंटूर मैपिंग चुनौती बना है। जोशीमठ में भूधंसाव का अध्ययन करने के बाद भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) समेत अन्य वैज्ञानिक एजेंसियों ने लार्ज स्केल कंटूर मैप की मांग की थी। ऐसा मैप जिसमें पहाड़ियों व अन्य धरातलीय संरचनाओं की स्थिति स्पष्ट ऊंचाई दो मीटर के कंटूर इंटरवल के साथ दर्शाई जा सके। यही कंटूर मैप की खासियत भी होती है। इस मैप को तैयार करने का काम राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने आइटीडीए को सौंपा था।
8 वैज्ञानिक संस्थाओं की फाइनल रिपोर्ट नहीं आ जाती
आइटीडीए ने इंडियन इंस्टीट्यूट आफ रिमोट सेंसिंग, सर्वे ऑफ इंडिया आदि एजेंसियों से सहयोग लेकर मैप तैयार किया। आइटीडीए ने ड्रोन से सर्वे कर कंटूर मैपिंग की है। जोशीमठ आपदा को लेकर सरकार फिलहाल स्पष्ट रूप से कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। जब तक आठ वैज्ञानिक संस्थाओं की फाइनल रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी भी तरह का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है। पुनर्वास और राहत पैकेज कब तक जोशीमठ में पुनर्वास और राहत पैकेज को लेकर जिला प्रशासन के स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आपदा प्रभावितों को शामिल करते हुए एक कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी अपनी प्राथमिक रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करा चुकी है।












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