उत्तराखंड में 'फौजी वोट' किस पार्टी के पक्ष में पड़ेंगे ? समझिए इसकी अहमियत
देहरादून, 7 फरवरी: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में लगभग आधी सीटों के परिणाम फौजी, रिटायर्ड सैन्य कर्मियों और उनके परिवार वालों के वोट से प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए सेना से जुड़े लोगों और उनके परिवार वालों का इस चुनाव में कितनी अहमियत है, यह बात आसानी से समझी जा सकती है। रही बात पार्टियों की तो सभी अपने-अपने हिसाब से इनपर डोरे डालने की कोशिशें कर रहे हैं। दूसरी तरफ रिटायर्ड सैन्य कर्मियों की अपनी मांगें भी हैं और वो भी चुनाव में बड़ा फैक्टर साबित होने वाली हैं।

उत्तराखंड में 'फौजी वोट' किस पार्टी के पक्ष में पड़ेंगे ?
उत्तराखंड चुनाव में फौजी वोटों की अहमियत से कोई इनकार नहीं कर सकता है। एक आंकड़े के मुताबिक प्रदेश में मौजूदा सैन्य कर्मियों, रिटायर्ड फौजियों और उनके परिवार वालों का वोट करीब 12% जो कई विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों की राजनीतिक किस्मत तय करने में सक्षम हैं। उत्तराखंड विधानसभा में 71 सदस्य होते हैं, जिनमें 70 सीटों पर चुनाव होता है और एक सीट पर एंग्लो-इंडियन समुदाय से सदस्य को नामित किया जाता है। इनमें से 34 सीटें यानी की लगभग आधी ऐसी हैं, जहां फौजी और उनके परिवारों की आबादी बहुतायत में है। यानी कहने की जरूरत नहीं है कि फौजियों का जिसे आशीर्वाद मिला, उसकी सरकार बनने की संभावना रहेगी। सरसरी तौर पर देखने से लगता है कि राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों की वजह से बीजेपी के पक्ष में एडवांटेज है, लेकिन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने चीजों को अपनी तरह से सेट करने की भरपूर कोशिश की है। भाजपा और कांग्रेस ने फौजियों के लिए अलग सेल भी बना रखा है तो आम आदमी पार्टी ने कर्नल (रिटायर्ड) अजय कोठियाल को मुख्यमंत्री का चेहरा ही बना दिया है।

उत्तराखंड में फौजी वोट के लिए क्या कर रही है बीजेपी ?
बीजेपी के पास उत्तराखंड में सैन्य कर्मियों और उनके परिवार वालों के वोट बैंक को लुभाने के लिए तीन बड़े मुद्दे हैं और उसपर पार्टी फोकस भी कर रही है। पहला है, वन रैंक वन पेंशन। इसकी वजह से रिटायर्ड सैन्य कर्मियों को काफी लाभ मिला है। दूसरा, पौड़ी जिले के रहने वाले दिवंगत जनरल बिपिन रावत को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया और उनके सैन्य अधिकारी रहे भाई भी पार्टी में शामिल हो चुके हैं; और तीसरा है सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक जैसे राष्ट्रवाद से जुड़े पार्टी के बड़े मुद्दे। यही नहीं नैनीताल उधम सिंह नगर से सांसद अजय भट्ट को मोदी सरकार में रक्षा राज्यमंत्री भी बनाया गया है। द हिंदू के मुताबिक बीजेपी के प्रदेश सैनिक प्रकोष्ठ के प्रमुख कर्नल (रि.) सीएम नौटियाल ने कहा है, 'हम सैनिक प्रकोष्ठ के जरिए मौजूदा और रिटायर्ड सैन्य कर्मियों के संपर्क में रहते हैं। यह ब्लॉक स्तर पर भी सक्रिय है। हर साल उत्तराखंड में करीब 25,000 सैन्य कर्मी रिटायर होते हैं। अपने गृह स्थान लौटने के बाद वे जिला सैनिक कल्याण ऑफिसर के रूप में भी रजिस्टर्ड होते हैं। हमारे कार्यकर्ता उनके सामने आने वाली किसी भी समस्या के निदान के लिए उनसे संपर्क में रहते हैं।' इनके मुताबिक रिटायर्ड सैन्य कर्मियों के लिए पार्टी पूरे प्रदेश में कंट्रोल स्टोर डिपार्टमेंट की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए मोबाइल वैन उपलब्ध करवाने के भी पक्ष में है।

देहरादून में रखी गई है 'सैन्य धाम' की आधारशिला
बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फौजियों से कनेक्ट को भी बताए-बिन बताए लाभ लेने की कोशिश में रहती है। इसके अलावा भी वह पहले से ही सैन्य कर्मियों से संबंधित खास चीजों पर ध्यान देती रही है। पिछले साल नवंबर में बीजेपी सरकार ने देहरादून में शहीदों की याद में 'सैन्य धाम' बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए पार्टी ने प्रदेश भर में 1,734 के घरों से मिट्ठी लाने के लिए 'शहीद सम्मान यात्रा' का आयोजन भी किया था। इस 'सैन्य धाम' की आधारशिला पिछले साल 15 दिसंबर को खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रखी थी और उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि इस स्मारक का नाम दिवंगत जनरल बिपिन रावत के नाम पर होगा।

कांग्रेस ने भी फौजियों का दिल जीतने की कोशिश की है
कांग्रेस भी उत्तराखंड में फौजी वोट का महत्त्व समझ चुकी है। रक्षा मंत्री के कार्यक्रम के अगले ही दिन पार्टी ने देहरादून में 'सैनिक सम्मान रैली' निकाली, जिसमें पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी पहुंचे थे। इससे पहले जब जनरल बिपिन रावत का हेलीकॉप्टर हादसे में दुखद निधन हो गया था तो कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को धोने के लिए फौरन ही उनके गांव से एक 'वीर ग्राम परिक्रमा यात्रा' भी निकाली थी।' हाल ही में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से दिवंगत सीडीएस जनरल रावत, जनरल (रि) बीसी जोशी और प्रदेश के बाकी शहीदों की तस्वीरें भी पार्टी के चुनाव कार्यालयों में लगाने की अपील की थी और इन्हें 'उत्तराखंड का गौरव' बताया था। पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में पूर्व सैनिकों के लिए वेलफेयर काउंसिल बनाने का भी वादा किया है। प्रदेश के कांग्रेस महासचिव( संगठन) मथुरा दत्त जोशी ने कहा है, 'प्रदेश के मौजूदा और रिटायर्ड सैन्य कर्मियों के लिए कांग्रेस ने कल्याण के काफी काम किए हैं। उत्तराखंड पूर्व-सैनिक निगम लिमिटेड (पूर्व सैनिकों, पूर्व अर्धसैनिक बलों और उनके आश्रितों के लिए) का गठन तब हुआ था, जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी।' उनके मुताबिक कांग्रेस ने रिटायर्ड सैनिकों और रियायर्ड पैरामिलिट्री के नेताओं को टिकट भी दिए हैं।

आम आदमी पार्टी ने भी लगाया है फौजियों के वोट के लिए दांव
आम आदमी पार्टी ने कर्नल (रिटायर्ड) अजय कोठियाल को उत्तराखंड में सीएम के चेहरा के तौर पर पेश किया है, जो 2013 की केदारनाथ त्रासदी के बाद उसके पुनर्निमाण के कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं। वह जिस यूथ फाउंडेशन से जुड़े हैं, वह भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए युवाओं को तैयारी में मदद करता है। पार्टी ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले सैनिकों के परिवारों को एक करोड़ रुपये की 'सम्मान राशि' देने का भी वादा किया है।

रिटायर्ड सैन्य कर्मियों की अपनी भी मांगें हैं
राज्य में इस समय कुल 93,964 वोटर हैं, जो सेना में हैं। जबकि, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का वोट बैंक 10 से 12 लाख है। इनकी अपनी मांगें भी हैं। उत्तरकाशी के कैप्टन (रि) तेजपाल सिंह नेगी ने कहा है कि उत्तराखंड में हर चौथे परिवार में से एक व्यक्ति सशस्त्र बलों में हैं और इसलिए यहां फौजियों का वोट निर्णायक फैक्टर है। उनका कहना है कि 'हमारे इलाके में सिर्फ एक ही आर्मी कैंटीन है, जहां सामानों की किल्लत सामान्य बात है। हमें हर जिले में सेना के लिए अस्पताल की आवश्यकता है, क्योंकि छोटी सी परेशानी के लिए भी हम देहरादून के मिलिट्री अस्पताल तक की यात्रा नहीं कर सकते।'












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