चारधाम देवस्थानम बोर्ड: उच्च स्तरीय समिति का गठन, हर धाम से दो-दो पुजारी शामिल
देहरादून, 11 सितंबर: कोरोना महामारी की वजह से इस साल चारधाम यात्रा पर रोक लगी हुई है, लेकिन चारधाम देवस्थानम एवं प्रबंधन बोर्ड का विरोध जारी है। हक-हकूकधारी, पुजारी और अन्य हितधारक लगातार इसका विरोध कर पुरानी व्यवस्था को लागू करने की मांग कर रहे हैं। वहीं कुछ महीने पहले जब पुष्कर सिंह धामी के हाथ उत्तराखंड की कमान आई, तो सबसे पहले उन्होंने चारधाम हितधारकों को बोर्ड में संशोधन और उनकी मांगों पर गौर करने का आश्वासन दिया था। जिस पर अब एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है।

मामले में उत्तराखंड मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड के तहत स्थापित उच्च स्तरीय कमेटी में उत्तराखंड के 'चारधाम' के दो-दो पुजारियों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद ये कमेटी सभी फैक्ट्स को देखते हुए एक रिपोर्ट तैयार करेगी। उस रिपोर्ट के पेश होने के बाद उस पर फैसला लिया जाएगा।
वहीं त्रिवेंद्र रावत के कार्यकाल से ही चारधाम देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ प्रदर्शनों का सिलसिला जारी था, लेकिन अब हक-हकूकधारी, पुजारी और अन्य हितधारकों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर गौर करेगी। जिस वजह से विरोध-प्रदर्शन को रोकने का फैसला लिया गया है। मामले में गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष और महापंचायत के संयोजक सुरेश सेमवाल ने कहा कि ताजा फैसले को देखते हुए वो 30 अक्टूबर तक अपने विरोध को स्थगित कर रहे हैं। चारधाम महापंचायत समिति ने मुख्यमंत्री को भी यही आश्वासन दिया है।
यात्रा पर रोक बरकरार
वहीं जून 2021 में कोरोना महामारी के चलते उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा पर रोक लगा दी थी, जो अभी भी जारी है। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) विशेष याचिका दायर की। साथ ही उत्तराखंड हाईकोर्ट से भी फैसले पर विचार करने को कहा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब मामला सर्वोच्च अदालत में है, तो खंडपीठ कैसे अपने फैसले को वापस ले सकती है। जिस पर राज्य सरकार ने एसएलपी को वापस ले लिया। अब मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ 16 सितंबर को इस पर सुनवाई करेगी।












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