उत्तराखंड में 'कैप्टन वाला दांव' नहीं चलेंगे हरीश रावत, ये है 'हरदा' की असली प्लानिंग
पूर्व सीएम हरीश रावत के कदम पर सबकी निगाहें, हाईकमान जुटा डेमेज कंट्राेल में
देहरादून, 23 दिसंबरा उत्तराखंड कांग्रेस में मचे घमासान के बाद सबकी नजर हरीश रावत के अगले कदंम पर टिकी है। हरीश रावत को लेकर सबके अपने-अपने दावे हैं। ऐसे में उत्तराखंड कांग्रेस के अंदर की तस्वीर को कुछ लोग बीते दिनों पंजाब में हुए घटनाक्रम से जोड़ने लगे हैं। इतना ही नहीं हरीश रावत के प्रकरण को कैप्टन अमरिंदर के कदम की तरह माना जा रहा है। हालांकि हरीश रावत को करीब से जानने वाले ये दावा कर रहे हैं कि हरीश रावत अभी कांग्रेस को नहीं छोड़ेंगे। ऐसे में ये साफ है कि हरीश रावत चुनाव से पहले आखिरी प्रेशर पॉलिटिक्स कर रहे हैं। जिससे चुनाव से पहले हरीश रावत फ्री हैंड होकर दांव खेल सकें।

यूकेडी के नेताओं से मीटिंग के बाद शुुरू हुुई चर्चा
पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उम्र के जिस पड़ाव में कांग्रेस को टाटा किया। क्या ऐसा कदम पूर्व सीएम हरीश रावत उठा सकते हैं। कुछ इस तरह के चर्चे बुधवार शाम से उत्तराखंड की सियासत में होने लगे हैं। ये बात मीडिया में उस समय जोर पकड़ने लगी जब उत्तराखंड क्रांति दल के अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी, पुष्पेश त्रिपाठी ने हरीश रावत से उनके आवास पर मुलाकात की। लेकिन इस मुलाकात को सामान्य मुलाकात बता दी गई। पूर्व सीएम हरीश रावत जिस तरह से सोशल मीडिया में खुलकर संगठन को लेकर सवाल खड़े करने लगे। उससे इस तरह की खबरें उठनी लाजिमी है। लेकिन हरीश रावत को करीब से जानने वाले लोग इस बात से इनकार कर रहे हैं कि वे कभी कांग्रेस छोड़ सकते हैं।

2002 से जारी है हरदा के दांव
हरीश रावत ने 2002 से 2021 के बीच कई बार ऐसे कदम उठाए जब पार्टी को उनके प्रेशर पॉलिटिक्स के लिए निर्णय बदलने पड़े। हालांकि पूर्व सीएम एनडी तिवारी की सरकार के 5 साल के कार्यकाल के बीच में हरदा का ये दांव कभी फिट नहीं बैठ पाया और तिवारी सरकार ने 5 साल का अपना कार्यकाल पूरा कर लिया। लेकिन 2012 में विजय बहुगुणा के सीएम बनने के बाद से 2 साल तक हरीश रावत कैंप ने उनकी कुर्सी हटाकर ही दम लिया। हालांकि इसका नतीजा हरीश रावत और कांग्रेस को भी भुगतना पड़ा, जब कांग्रेस के अंदर बगावत हो गई। जब सतपाल महाराज, विजय बहुगुणा, हरक सिंह, यशपाल आर्य के साथ ही बागी विधायकों ने पार्टी छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर ली। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में सीएम रहते हुए हरीश रावत दो विधानसभा से चुनाव लड़े लेकिन दोनों जगह से हार गए। 2019 में हरीश रावत लोकसभा का चुनाव भी हार गए।

2022 चुनाव से पहले दिख रहा नया अवतार
इसके बाद ऐसा लगा कि हरीश रावत हाशिए पर चले जाएंगे, लेकिन 2022 के चुनाव से पहले हरीश रावत ने उत्तराखंडियत के मुद्दे पर जनता के बीच में लोकप्रियता हासिल कर ली है। जिस वजह से मीडिया सर्वे में मुख्यमंत्री के तौर पर हरीश रावत सबसे पसंदीदा चेहरा बने हुए हैं। ऐसे में हरीश रावत का कैप्टन अमरिंदर की तरह पार्टी छोड़ना और नई पार्टी या दूसरे दल में जाने की संभावनाएं कम ही नजर आ रही हैं। जिसके लिए वे अपना आखिरी दांव प्रेशर पॉलिटिक्स के रूप में चल रहे हैं। जिस वजह से हाईकमान उनको या उनके पसंदीदा चेहरेे को उत्तराखंड में सीएम बनाएा साथ ही टिकट बंटवारे मेंं भी रावत कैंप खुलकर बैटिंंग कर सकेा
उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत का कहना है कि
चुनाव से पहले हरीश रावत की ये प्रेशर पॉलिटिक्स है। हरीश रावत प्रदेश प्रभारी को हटाने की मांग कर सकते हैं। बिना हरीश रावत के उत्तराखंड में कांग्रेस को चुनाव में खास परिणाम नहीं मिल सकते हैं। ये कहा जा सकता है कि ये हरीश रावत का आखिरी दांव है।












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