Harish rawat:लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर पूर्व सीएम ने कह दी बड़ी बात, यशपाल आर्य को यहां से टिकट देने की मांग
उत्तराखंड में लोकसभा की सीटों पर कांग्रेस का प्रत्याशी कौन होागा। इसको लेकर पार्टी मंथन करने में जुटी है। इस बीच पार्टी के सीनियर नेता चुनाव न लड़ने की पहले ही इच्छा जता चुके हैं, जिससे कांग्रेस के अंदर सियासी खींचतान जारी है। पूर्व सीएम हरीश रावत ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए लोकसभा चुनाव की दोवदारी और चुनाव लड़ने को लेकर अपनी बात रखी है।

हरीश रावत ने अल्मोड़ा सीट से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को चुनाव लड़ने का सुझाव दिया है। हरीश रावत ने कहा कि अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र से मेरा ईच्छा है कि यशपाल आर्या चुनाव लड़ें, उनके न लड़ने की स्थिति में प्रदीप टम्टा एक स्वाभाविक दावेदार हैं, दोनों की विजय के लिए काम करना मेरा धर्म है।
हरीश रावत का कहना है कि कांग्रेस पांचों लोकसभा संसदीय सीटों पर अच्छा चुनाव लड़ें और जीतें, इसके लिए काम करने के लिए करन महरा और यशपाल आर्या के नेतृत्व में प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि किसी को भी मेरे योगदान पर संदेह करने का अधिकार नहीं है और मैं हमेशा सकारात्मक रहा हूं। हां, बढ़ती उम्र के साथ क्षमता सीमित होती जाती है और पार्टी को चाहिए कि मेरी उपयोगिता व क्षमता का आकलन कर ही मुझसे अपेक्षा करें। यूं भी क्रिकेट की भाषा में कोच और कप्तान को ही फ्रंट से नेतृत्व कर उदाहरण प्रस्तुत करना होता है।
हरीश रावत का कहना है कि लोकसभा चुनाव अत्यधिक कठिन और असाधारण परिस्थितियों में हो रहा है, बल्कि 2002 का जो पहला चुनाव उत्तराखंड का हुआ था या 2007 का चुनाव जिसमें जनरल ने ही चुनाव लड़ने से और चुनाव प्रक्रिया का नेतृत्व करने से इनकार कर दिया था, उससे भी ज्यादा गंभीर स्थिति में यह चुनाव हो रहा है। यूं 2012 के चुनाव में भी चुनाव प्रबंधन में जो चुनाव प्रचार का काम था उसको मैंने संभाला था।
हरदा ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में हमको राज्य और केंद्र की दोनों एंटी इनकंबेंसीज का सामना करना पड़ा था, उसके बावजूद भी चुनाव प्रबंधन के चलते टक्कर अच्छी हुई थी। 2019 में तत्कालीन अध्यक्ष की अपने चुनाव में व्यस्तता और सीएलपी लीडर की शारीरिक असमर्थता के कारण चुनाव प्रबंधन और चुनाव प्रचार प्रबंधन अच्छा नहीं हो पाया, मैं भी अपने चुनाव में फंसा रह गया और प्रबंधन के अभाव में हमारा वोट बैंक बहुत घट गया।
कहा कि 2017 में हम असाधारण मोदी लहर में अपना वोट बैंक बचाने में सफल रहे, उसका कारण चुनाव प्रबंधन था। 2022 में भी मेरा मानना है कि यदि मैं चुनाव नहीं लड़ता या गणेश गोदियाल नहीं लड़ते तो स्थिति में अंतर आता। मगर इस बार की चुनौती और कठिनतर है, इसलिये मैंने चुनाव प्रबंधन को लेकर चिंता व्यक्त की है, उस पर मैं अब भी कायम हूं।












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