हरक सिंह रावत ने मंच से हरीश रावत को कह दिया बुजुर्ग नेता, क्यों कहा- '36 नहीं 63 हो गए' जानिए फिर क्या हुआ
केदारनाथ उपचुनाव को लेकर कांग्रेस ने पूर्व विधायक मनोज रावत पर दांव खेला है। जिसके बाद कांग्रेस के अंदर फिलहाल किसी तरह का विरोध नजर नहीं आ रहा है। खास बात ये है कि केदारनाथ से टिकट की दौड़ में बताए जा रहे पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता हरक सिंह रावत भी मनोज रावत के नामाकंन के दौरान मौजूद रहे।
इतना ही नहीं रैली के दौरान हरक सिंह ने मंच पर प्रत्याशी मनोज को आशीर्वाद देकर माला भी पहनाई। जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में हरक सिंह ने पहले मनोज रावत को माला पहनाई।

हरक सिंह ने किया कुछ ऐसा
इसके बाद कांग्रेस के सह प्रभारी सुरेंद्र शर्मा को मेहमान बताकर माला पहनाकर सम्मान दिया। हरक सिंह ने आगे कहा कि बाकि सब हमारे यहीं के लोग हैं। बावजूद इसके हरक सिंह ने पहले प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा फिर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को हंसी मजाक के मूड में माला पहनाई। इसके बाद हरक सिंह ने कुछ ऐसा किया कि पूरा माहौल हंसी मजाक में बदल गया।
हरीश रावत को कहा बुजुर्ग
हरक सिंह ने पूर्व सीएम हरीश रावत को माला पहनाते हुए कहा कि हमारे बुजुर्ग नेता हैं। वैसे भी लोग कहते हैं कि रावत वर्सेज रावत 36 का है। जो कि आज 36 नहीं 63 हो गए हैं। इस पर हरीश रावत समेत सभी लोग हंस पड़े। बता दें कि हरक सिंह और हरीश रावत का राजनीति में 36 का आंकड़ा माना जाता है। 2016 में जब कांग्रेस सरकार के समय हरीश रावत प्रदेश के सीएम थे। तब कांग्रेस के विधायकों ने बगावत कर भाजपा का दामन थामा।
हरक और हरीश का 36 का आंकड़ा
इस बगावत का सूत्रधार हरक सिंह रावत को माना जाता है। तब से हरक सिंह रावत को हरीश रावत ने उज्याडू बल्द की संज्ञा दी। इसके बाद जब हरक सिंह रावत 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में आने के लिए जोर लगा रहे थे तो हरीश रावत का भारी विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि हरक सिंह रावत की कांग्रेस में एंट्री हुई लेकिन पहली बार हरक सिंह को टिकट नहीं दिया गया।
केदारनाथ में दी दावेदारी
इसके बाद से हरक सिंह सत्ता से दूर हैं। इस बार हरक का केदारनाथ में दावा माना जा रहा था, लेकिन हरीश रावत खेमे ने पूर्व विधायक मनोज रावत को टिकट दिलाने में पूरा जोर लगा दिया और आखिरकार मनोज रावत को ही टिकट मिला। अब नामांकन के समय हरक सिंह ने जिस अंदाज में मंच से माहौल को हल्का करने की कोशिश की उससे लगता है कि कांग्रेस में फिलहाल डेमेज कंट्रोल हो गया है। हालांकि ये परिणाम में बदल पाएगा या नहीं, ये देखना दिलचस्प होगा।
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