G-20 Summit: उत्तराखंड में होने वाली बैठकों के लिए तैयारियां तेज, ऋषिकेश में होगा कुछ विशेष, जानिए
जी-20 समिट के तहत वर्किंग ग्रुप की उत्तराखंड में होने वाली बैठकों के लिए सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उत्तराखंड में होने वाली दो बैठकों में से ऋषिकेश में होने वाली पहली बैठक 25 से 27 मई के बीच प्रस्तावित हैं।

जी-20 समिट के तहत वर्किंग ग्रुप की उत्तराखंड में होने वाली बैठकों के लिए सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उत्तराखंड में होने वाली दो बैठकों में से ऋषिकेश में होने वाली पहली बैठक 25 से 27 मई के बीच प्रस्तावित हैं। बैठक में वर्किंग ग्रुप ऑन एंट्री करप्शन शामिल होगा। यहां 20 देशों के 200 प्रतिनिधि तीन दिन तक भ्रष्टाचार को रोकने में आ रहीं चुनौतियों और उनके समाधान पर मंथन करेंगे। इस दौरान उत्तराखंड की संस्कृति और परंपरा से सभी मेहमान को रुबरु कराया जाएगा। इस आयोजन को लेकर सरकार, भाजपा का संगठन और अन्य संस्थाएं तैयारियों में जुटी है। जिसकी कमान खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संभाली हुई है।और बैठकों की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री प्रत्येक 15 दिन में स्वयं समीक्षा कर रहे हैं।
मेहमानों को गंगा आरती और नौका विहार भी कराया जाएगा
मेहमानों को राज्य के उत्पादों और सांस्कृतिक परंपराओं को दोनों कार्यक्रमों में दिखाया जाएगा। इसके लिए स्टॉल भी लगाए जाएंगे। ऋषिकेश के धार्मिक महत्व को देखते हुए मेहमानों को गंगा आरती और नौका विहार भी कराया जाएगा। मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू ने देहरादून, पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर मेहमानों के लिए विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। जिसमें परमार्थ निकेतन में गंगा आरती, नौका विहार, मुनि की रेती स्थित आस्था पथ और योगा पार्क में विदेशी मेहमान को ले जाया जाएगा। विदेशी मेहमानों के आने से पहले ऋषिकेश, मुनि की रेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र का कायाकल्प किया जाएगा। जिसमें क्षेत्र की बिजली, पानी, सड़क और अन्य जरुरी संसाधनों को जुटाया जाएगां साथ ही सौंदर्यीकरण पर भी खास ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री प्रत्येक 15 दिन में स्वयं समीक्षा कर रहे
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जी-20 समिट की तैयारियों की बैठक के दौरान विकास कार्य और योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में होने वाली जी-20 की बैठकों के जिस विभाग को जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, संबंधित विभागीय सचिव उसकी नियमित समीक्षा करें। इसके अलावा उत्तराखण्ड में होने वाली जी-20 की बैठकों की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री प्रत्येक 15 दिन में स्वयं समीक्षा कर रहे हैं। साथ ही इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी मुख्य सचिव को सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का यह हमारे पास एक अच्छा अवसर है।
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स्थानीय उत्पादों पर आधारित स्टॉल लगाये जाएं
यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि जिन उत्पादों को हम व्यापक स्तर पर वैश्विक पहचान दिला सकते हैं, उनकी विशिष्टता की पहचान कर ली जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में होने वाली जी-20 संबंध में जन जागरूकता के लिए शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, सूचना विभाग एवं पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाए। जनपदों में बहुउद्देशीय शिविरों के माध्यम से भी लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाए। जी-20 की बैठकों में आयोजन स्थल पर उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों पर आधारित स्टॉल लगाये जाएं। उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाएं। आयोजन स्थल पर योग एवं पंचकर्म की व्यवस्था की जाए।












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