उत्तराखंड में भाजपा के लिए बागियों को साधना ज्यादा बड़ी चुनौती, जानिए कैसे

भाजपा, कांग्रेस जुटी बागियों को मनाने में

देहरादून, 29 जनवरी। उत्तराखंड में भाजपा दोबारा सत्ता पाने के लिए पूरा जोर लगा रही है। जबकि कांग्रेस के लिए यह चुनाव अस्तित्व बचाने का चुनाव माना जा रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव पर भी इस चुनाव का असर दिखना तय है। ऐसे में दोनों दल सत्ता पाने को सभी समीकरण पर फोकस कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों पर नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई। जिसमें पूरे प्रदेशभर में 750 प्रत्याशियों ने पर्चा भरा है। ​इन 750 में से 35 से ज्यादा बागी भाजपा, कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने ​हुए हैं। भाजपा के लिए 22 बागियों को साधने की चुनौती है। जबकि कांग्रेस के 13 बागी मैदान में हैं। जिनको साधने के लिए दोनों दल खास रणनीति में जुटे हैं। बागियों को साधने के लिए 3 दिन का ही समय दोनों सियासी दलों के पास होगा।

भाजपा में नजर आ रही ज्यादा बगावत

भाजपा में नजर आ रही ज्यादा बगावत

भाजपा ने 2017 में 57 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई थी। लेकिन सत्ता विरोधी लहर और खराब परफोर्मेंस के कारण 13 से विधायकों के टिकट गए गए। भाजपा के सामने सबसे बड़ी समस्या डोईवाला सीट पर है, यहां भाजपा के 3 कार्यकर्ता बतौर नामांकन करा चुके हैं। भाजपा के जिन सीटों पर बागियों से सामना होगा, उनमें रुद्रपुर से राजकुमार ठुकराल, यमुनोत्री से जगवीर सिंह भंडारी, डोईवाला से जितेंद्र नेगी, सुभाष भट्ट, सौरभ थपलियाल, धर्मपुर से वीर सिंह पंवार, कैंट से दिनेश रावत, रानीपुर से इशांत तेजीयान, पिरान कलियर से जय भगवान सैनी, घनसाली से सोहन लाल खंडेवाल, दर्शनलाल, धनौल्टी से पूर्व विधायक महावीर रांगड़, कोटद्वार से धीरेंद्र चौहान, कर्णप्रयाग से टीका प्रसाद मैखुरी, ऋषिकेश से उषा रावत, किच्छा से अजय तिवारी,रानीखेत से दीपक करगेती, लालकुआं से पवन चौहान और कुंदन सिंह मेहता, भीमताल से लाखन सिंह नेगी और मनोज साह, कालाढूंगी से गजराज सिंह बिष्ट बागी के रुप में मैदान में हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपा जिम्मा

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपा जिम्मा

सिटिंग विधायकों के टिकट कटते देख भाजपा ने पहले ही ​बागियों को मनाने को तैयारी कर ली थी। इसके लिए पहले ही सीनियर नेताओं को भी तैयार रहने को कहा गया था। लेकिन अब भाजपा ने इसकी पूरी जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को बागियों को मनाने का जिम्मा सौंपा है। त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इसके साथ ही पार्टी ने पहले ही सभी सांसदों को अपने-अपने क्षेत्र में निर्दलीय मैदान में उतर रहे कार्यकर्ताओं को संभालने का जिम्मा सौंपा हुआ है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर​ सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक भी लगातार बागियों से संपर्क कर रहे हैं।

कांग्रेस में बागी कम लेकिन हरदा के सामने ही बगावत

कांग्रेस में बागी कम लेकिन हरदा के सामने ही बगावत

कांग्रेस में दूसरी लिस्ट में 11 नामों के आने और फिर दोबारा से नए नामों पर मुहर लगाने से ज्यादा बगावत देखने को मिली है। खास बात ये है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लालकुंआ सीट पर चुनाव लड़ने के बाद भी लालकुंआ में कांग्रेस को बगावत का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने पहले ही बगावत को थामने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह को अपने-अपने क्षेत्र में बागियों को साधने की जिम्मेदारी सौंपी हुई है। कांग्रेस को जिन सीटों पर बा​गी मुश्किल में डाल सकते हैं, उनके नाम हैं, ऋषिकेश से शूरवीर सिंह सजवाण, सहसपुर से आकिल अहमद, राजपुर से संजय कन्नौजिया, कैंट से चरणजीत कौशल, रायपुर में सूरत सिंह नेगी, ज्वालापुर से एसपी सिंह, कांग्रेस, घनसाली से भीम लाल आर्य, यमुनोत्री से संजय डोभाल, रुद्रप्रयाग से मातबर सिंह कंडारी, किच्छा से हरीश पनेरू, बागेश्वर से भैरवनाथ, लालकुआं से संध्या डालाकोटी, रामनगर से संजय नेगी बागी हो गए हैं।

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