देवस्थानम बोर्ड: हाईपावर कमेटी ने सीएम धामी को सौंपी अंतरिम रिपोर्ट, अब सरकार पर टिकी निगाहें
कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद मनोहर कांत ध्यानी ने सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर रिपोर्ट सौंपी
देहरादून, 26 अक्टूबर। चुनावी साल में एक बार फिर देवस्थानम बोर्ड का मुद्दा गर्माने लगा है। तीर्थ पुरोहितों के भारी विरोध के बाद राज्य सरकार ने चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को लेकर एक हाईपावर कमेटी गठित की थी, जिसने सरकार को अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है। कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद मनोहर कांत ध्यानी ने सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर रिपोर्ट सौंपी है। चारधाम तीर्थ पुरोहितों को अब रिपोर्ट के खुलासे और राज्य सरकार के फैसले का इंतजार है। उम्मीद लगाई जा रही है कि सरकार आपदा में फोकस करने की वजह से फिलहाल देवस्थानम बोर्ड पर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेगी।

2 माह में तैयार की रिपोर्ट
अगस्त 2021 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवस्थानम बोर्ड को लेकर हाईपावर कमेटी बनाई थी। पूर्व सांसद मनोहर कांत ध्यानी को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। कमेटी ने दो माह के भीतर सरकार को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है। अब सरकार कमेटी की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद फैसला लेगी। जानकारों की मानें तो हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट चारधामों के तीर्थ पुरोहितों की देवस्थानम बोर्ड से होने वाली दिक्कतों और उनके सुझावों के लिए बनाई गई थी। ऐसे में रिपोर्ट में बोर्ड को रद करने या भंग करने की सिफारिश के बजाय इसमें संसोधन पर जोर दिया जा सकता है। कमेटी के अध्यक्ष मनोहर कांत ध्यानी भी इस बात के संकेत दे चुके हैं।
30 अक्टूबर की डेडलाइन हो रही पूरी
इधर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तीर्थ पुरोहितों को दिए गए 30 अक्टूबर का डेडलाइन भी पूरा होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने चारधाम तीर्थ पुरोहित हकहकूकधारी महापंचायत के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद 30 अक्टूबर तक का समय मांगा था। ऐसे में 5 दिन पहले ही रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार को इसका अध्ययन करने में समय लग सकता है। जिससे एक बार फिर सरकार मुश्किल में पड़ सकती है।
तीर्थ पुरोहितों को भरोसा
हाल ही में चारधाम तीर्थ पुरोहितों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सांसद और मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद तीर्थ पुरोहितों ने दावा किया कि भाजपा हाईकमान की और से देवस्थानम बोर्ड को वापस लेने का भरोसा दिया गया था। जिसके बाद से तीर्थ पुरोहित इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि देवस्थानम बोर्ड को सरकार जल्द ही भंग कर सकती है।
क्या है देवस्थानम बोर्ड का विवाद
भाजपा के पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ने चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड बनाया था। जिससे बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम समेत 51 मंदिरों को शामिल किया गया था। जिसके लिए एक्ट को मंजूरी दी गई थी। इसके विरोध में पहले ही दिन से चारधाम के तीर्थ पुरोहित विरोध कर रहे हैं। जिसके लिए चारधाम हकहकूकधारी महापंचायत का गठन किया। महापंचायत लगातार देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। फिलहाल तीर्थ पुरोहित शीतकाल के लिए कपाट बंद होने की प्रक्रिया की तैयारियों में जुटे हैं। कपाट बंद होने के बाद विरोध तेज हो सकता है। ऐसे में सरकार को इससे पहले ही देवस्थानम बोर्ड को लेकर अपना निर्णय सार्वजनिक करना होगा। जिसका असर चुनावों में पडना तय हैा












Click it and Unblock the Notifications