मैदानी जिलों के साथ अब पहाड़ों में भी पैर पसार रहा डेंगू, महाअभियान के साथ ही झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त एक्शन
मैदानी जिलों के साथ साथ अब डेंगू पहाड़ी जिलों में भी पैर पसार रहा है। जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे ने मैदानी जिलों के साथ ही पहाड़ी जिलों में डेंगू के खिलाफ महाअभियान छेड़ दिया है। देहरादून के साथ ही हरिद्वार, नैनीताल, और पौड़ी जिले में स्वास्थ्य महकमे का महाअभियान शुरू हो गया है।

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने डेंगू की समीक्षा बैठक कर जिलों के अधिकारियों को जरुरी दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डेंगू महाअभियान के दौरान झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ राज्य में भी सख्त एक्शन लिए जाएंगे।
उत्तराखंड में डेंगू का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार तक प्रदेशभर में 954 केस सामने आ चुके हैं। इसमें 700 से ज्यादा देहरादून के हैं। जबकि हरिद्वार, नैनीताल, पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग जिलों में भी डेंगू के केस सामने आ चुके हैं। ऐसे में स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है।
डेंगू की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव डॉ एसएस संधु के निर्देश पर सचिव, स्वास्थ्य डॉ आर राजेश कुमार ने देहरादून, हरिद्वार, पौडी, नैनीताल जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की गई। सचिव स्वास्थ्य ने सभी जिलों से देहरादून जिले की तरह माइक्रो प्लान बनाकर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि हरिद्वार शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आशाओं के साथ पंचायती राज विभाग, शिक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर व्यापक जागरूकता का कार्यक्रम चलाया जाए।
स्वास्थ्य सचिव द्वारा बताया गया कि विभिन्न जनपदों में झोला छाप डॉक्टरों द्वारा गलत तरीके से लोगों का इलाज किया जा रहा है जिसकी कई तरह की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। अतः प्रत्येक जनपद यह सुनिश्चित करें कि आमजन के स्वाथ्स्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड नहीं किया जा सकता। डेंगू रोगियों का उपचार कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों पर अंकुश लगाया जाए। लोगों में गंभीर लक्षण होने पर सीधे रजिस्टर्ड मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थान में ही इलाज कराए जाने हेतु प्रोत्साहित किया जाए।












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