Dehradun news: सोलर ऊर्जा से उगाई जा रही सब्जियां, बिना मिट्टी के कम पानी और कम लागत में ज्यादा उत्यादन
देहरादून के विज्ञान धाम में सोलर ऊर्जा चालित हाइड्रोपोनिक सिस्टम से सब्जियां उगाई जा रही है। इस तकनीक द्वारा केवल पानी के माध्यम से सब्जियां चंद दिनों में प्राप्त की जा सकती है।

देहरादून के विज्ञान धाम में सोलर ऊर्जा चालित हाइड्रोपोनिक सिस्टम से सब्जियां उगाई जा रही है। जो कि पहाड़ के किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो रही है। विज्ञान धाम में यूकास्ट द्वारा करीब 6 हजार sq feet
में ये प्रोजेक्ट लगाया गया है। इस में सिर्फ पानी की मदद से पत्तेदार सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। जो कि मात्र 45 दिन में तैयार हो जा रही हैं। इस नए प्रयोग को देखने के लिए किसान पहुंच रहे हैं और इस नई तकनीक के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। देहरादून में लगा ये हाइड्रोपोनिक सिस्टम पूरे उत्तर भारत में सिर्फ विज्ञान धाम में ही लगाया गया है।
हाइड्रोपोनिक सिस्टम द्वारा उगाई गई सब्जियां आकर्षण का केन्द्र
सोलर ऊर्जा चालित हाइड्रोपोनिक सिस्टम द्वारा उगाई गई सब्जियां आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। इस नई तकनीक द्वारा केवल पानी के माध्यम से सब्जियां चंद दिनों में प्राप्त की जा सकती है वहीं सौर पैनल द्वारा उत्पन्न बिजली से हाइड्रोपोनिक सिस्टम को संचालित करने में प्रयुक्त बिजली के अलावा शेष बिजली को यूकास्ट के अन्य कार्यों को संचालित करने में ख़र्च किया जाता है इससे अब काफी बिजली की बचत हो रही है।
कम लागत, कम पानी और मेक्सिमम उत्पादन पर फोकस
यूकास्ट के वैज्ञानिक डॉ बिपिन सती ने जानकारी देते हुए बताया कि इसे हाइड्रोपोनिक सिस्टम कहा जाता है। इसमें कम लागत, कम पानी और मेक्सिमम उत्पादन पर फोकस किया जाता है। जो कि अर्बन क्षेत्रों में जहां जमीन की कमी है वहां इस सिस्टम को ज्यादा प्रयोग में लाया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट को यूकास्ट के महानिदेशक प्रो(डॉ) दुगेंश पंत के लीडरशिप और सीनियर साइंटिस्ट डॉ आशुतोष मिश्रा की देखरेख में किया जा रहा है। जिसमें हरे पत्तेदार सब्जियां उगाई जा रही है। यूकास्ट ने इसके लिए एक मोबाइल ऐप भी तैयार किया है। इसके लिए जरिए किसानों को इन सब्जियों को लेकर ट्रेनिंग और सारी जानकारी दी जा रही है।
छोटी नस्ल के पौधे आसानी से उगाए जा सकते
हाइड्रोपोनिक खेती में सिर्फ पानी की आवश्यकत होती है। इसमें मिट्टी का प्रयोग नहीं होता है। इसके लिए एक पॉलीहाउस जैसा स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है कि ताकि तापमान को नियंत्रित किया जा सके। हाइड्रोपोनिक खेती में आपको जरूरत पड़ती है पाइपों से बने एक स्ट्रक्चर की, जिसमें पानी बहता रहता है और इन्हीं पाइपों में पौधे लगे होते हैं। हाइड्रोपोनिक खेती के लिए 15-30 डिग्री का तापमान और 80-85 फीसदी ह्यूमिडिटी अच्छी मानी जाती है। हाइड्रोपोनिक खेती में कई पीवीसी पाइपों को एक दूसरे से कुछ इस तरह जोड़ा जाता है कि एक तरफ से पानी जाए और दूसरी तरफ से बाहर निकले। इन पाइपों में ऊपर की तरफ छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं, जिनमें पौधे उगाए जाते हैं। इन छेदों में प्लास्टिक की एक छोटी जाली वाली गिलास जैसी एक चीज होती है, जिसमें कोकोपीट या फोम भरा होता है। इसी में पौधों के बीज या छोटे पौधे लगाए जाते हैं। यह स्ट्रक्चर कुछ इस तरह का होता है कि गिलास का सबसे निचला हिस्सा पानी को छूता है। जैसे-जैसे पौधा बड़ा होता है, उसकी जड़ें नीचे जाती हैं और पानी के जरिए पोषण लेती हैं। हाइड्रोपोनिक तकनीक से छोटी नस्ल के पौधे आसानी से उगाए जा सकते हैं। सबसे ज्यादा पत्तेदार सब्जियों और सलाद उगाने के लिए करते हैं। इसमें आप गाजर, शलजम, मूली, शिमला मिर्च, मटर, स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी, ब्लूबेरी, तरबूज, खरबूज, अनानास, टमाटर, भिंडी जैसी सब्जियां और फल उगा सकते हैं।












Click it and Unblock the Notifications