Uttarakhand congress हरीश रावत समेत कांग्रेसी उतरे सड़कों पर,उत्तराखंड की बेटियों के न्याय दिलाने का उठा मुद्दा
उत्तराखंड बेटियों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस सड़कों पर
उत्तराखंड की बेटियों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस एक बार फिर सड़कों पर उतर आई है। कांग्रेस ने पूर्व सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ताओं के साथ देहरादून में कैंडिल मार्च निकालकर विरोध दर्ज किया है। कांग्रेस का कहना है कि दिल्ली में उत्तराखंड की बेटी के साथ हुए जघन्य अपराध का कोई तो अपराधी होगी। उसे सजा जरूर मिलनी चाहिए। पूर्व सीएम हरीश रावत ने सीएम धामी ने दिल्ली में उत्तराखंड की बेटी के परिजनों को भी अंकिता के परिजनों की तरह आर्थिक सहायता करने की मांग की है।

देहरादून के घंटाघर चौक से गांधी पार्क तक कैंडल मार्च
उत्तराखंड में कांग्रेस ने महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर राज्य सरकार को घेरने की कोशिश की है। उत्तराखंड की दो बेटियों, दिल्ली में रह रही उत्तराखंड की बेटी और अंकिता को न्याय दिलाने के लिए देहरादून के घंटाघर चौक से गांधी पार्क तक कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान पूर्व सीएम हरीश रावत समेत पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विधायक अनुपमा रावत समेत कई कांग्रेसी मौजूद रहे। हरीश रावत ने कहा कि उन्होंने भगवान केदारनाथ व गांधी बाबा से प्रार्थना की कि वो उत्तराखंड की बेटी के हत्यारों को सजा दें और न्याय दिलवाएं। हरीश रावत ने कहा कि आखिर कोई तो होगा उत्तराखंड की बेटी का हत्यारा। मैंने भी उस कैंडल मार्च में भाग लिया और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की प्रतिमा के सामने 1 मिनट का मौन रखकर कैंडल मार्च को समाप्त किया। हरीश रावत ने कहा कि आखिर उत्तराखंड की बेटी का कोई तो हत्यारा है, कोई तो उसका बलात्कारी है, कोई तो उसके साथ वीभत्स कृत्य करने वाला है,
दिल्ली में रहने वाली उत्तराखंड की बेटी परिवार को भी मिलनी चाहिए सहायता
हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड सरकार से मेरा आग्रह है कि हम राज्य के तौर पर तो कानूनी लड़ाई नहीं लड़ पाए हैं, जिस समय यह वीभत्स कांड हुआ था, उस समय उत्तराखंड की बेटी के भाई-बहन छोटे थे। आज उस परिवार को जो भावनात्मक रूप से पूरी तरीके से टूट चुका है, सहारे की जरूरत है। बेटी अंकिता भंडारी के परिवार को 25 लाख रूपए और उसके भाई को नौकरी देने की जो मुख्यमंत्री जी ने बात कही है, वह सराहनी है। वही सहायता दिल्ली में रहने वाली उत्तराखंड की बेटी टूटे व ध्वस्त पड़े परिवार को भी मिलनी चाहिए, हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड की बेटी का मामला निर्भया हत्याकांड की तर्ज पर ही वीभत्स हत्याकांड था। उत्तराखंड की बेटी अंकिता की भी हत्या हमको बहुत चिंतित करती है! साक्ष्य नष्ट किए गए हैं जो अब साबित हो चुका है। क्या उस वीआईपी का पता लगेगा जिसके लिए अंकिता की हत्या हुई! बड़ा सवाल है। कहीं ऐसा न हो कि अंकिता के हत्यारों को भी इसी तरीके से पहले बेल और फिर बरी हो जाएं।
क्या है दिल्ली में उत्तराखंड की बेटी का प्रकरण
दिल्ली के छावला इलाके में 2012 में हुए 19 वर्षीय उत्तराखंड की बेटी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में सभी तीन आरोपियों के बरी कर दिया गया। फरवरी 2012 में युवती के अपहरण, बलात्कार और बेरहमी से हत्या मामला
साल 2014 में एक निचली कोर्ट ने मामले को दुर्लभतम बताते हुए तीनों आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा था। तीन लोगों पर फरवरी 2012 में 19 वर्षीय युवती के अपहरणए बलात्कार और बेरहमी से हत्या करने का आरोप है। अपहरण के तीन दिन बाद उसका क्षत विक्षत शव मिला था। बता दें कि पीड़िता मूल रूप से पौड़ी उत्तराखंड की रहने वाली थी। जो कि दक्षिण पश्चिम दिल्ली के छावला के कुतुब विहार में रह रही थी। 9 फरवरी 2012 की रात नौकरी से लौटते समय उसे कुछ लोगों ने जबरन कार में में बैठा लिया था। जिसकी 3 दिन बाद लाश बहुत ही बुरी हालत में हरियाणा के रिवाड़ी के एक खेत मे मिली। युवती के साथ दरिंदगी और क्रुरता भी हुई थी।
अंकिता भंडारी केस
मूल रूप से पौड़ी जिले की निवासी अंकिता भंडारी की 18 सितम्बर को हत्या हो गई। जो कि यमकेश्वर क्षेत्र में वनतारा रिजॉर्ट में रिसेप्सनिष्ट की नौकरी करने आई थी। 19 सितम्बर को राजस्व पुलिस में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित ने अंकिता की गुमशुदगी का केस दर्ज कराया। 23 सितंबर को थाना लक्ष्मण झुला में अंकिता की गुमशुदगी का केस दर्ज हुआ और पुलिस ने पुलकित समेत 3 आरोपियों को अरेस्ट कर जेल भेजा। 24 सितंबर को आरोपियों की निशानदेही पर अंकिता का शव चिला डैम से बरामद हुआ। 24 को अंकिता का एम्स अस्पताल पोस्टमार्टम हुआ। 25 सितंबर को कई विरोध के बाद देर शाम अंकिता का अंतिम संस्कार हुआ। सरकार ने पूरे मामले कि जांच के लिए एसआईटी गठित की।












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