Uttarakhand: धामी सरकार के एक साल के 5 सख्त फैसले, जो बन गए मिसाल
उत्तराखंड की धामी सरकार का एक साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। एक साल में सरकार ने धर्मांतरण कानून, महिला आरक्षण, राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण, नकल विरोधी कानून बना और विधानसभा में बैकडोर भर्ती पर सख्त कदम उठाए।

उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक साल पूरा कर लिया है। 23 मार्च 2022 को धामी ने 8 कैबिनेट मंत्रियों के साथ सरकार का कामकाज संभाला। इस बीच धामी के सामने कई चुनौतियां भी आई। धामी के सामने सबसे पहले उपचुनाव जीतकर अपनी सीट पक्की करने की चुनौती थी। जिसे धामी ने चंपावत में रिकॉर्ड जीत के साथ पूरा किया। इसके बाद सीएम धामी ने ताबड़तोड़ फैसले भी लिए।

समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए समिति गठित की
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता में आते ही सबसे पहले चुनाव से पहले किए वादे समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए समिति गठित की। इसके अलावा धर्मांतरण कानून, महिला आरक्षण, राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण, नकल विरोधी कानून और विधानसभा में बैकडोर भर्ती की जांच कराकर सीएम धामी ने सख्त कदम उठाए और जीरो टॉलरेंस पर भी सख्ती दिखाई। इन फैसलों से धामी सरकार ने दूसरे राज्यों के लिए मिसाल भी पेश की।

कई तरह की चुनौतियां का सामना
सीएम धामी ने एक साल के कार्यकाल के दौरान कई तरह की चुनौतियां का सामना किया, इसमें युवाओं के आंदोलन, जोशीमठ भू धंसाव, अंकिता भंडारी केस, पेपर लीक प्रकरण, हल्द्वानी के बनभूलपुरा अतिक्रमण मामला रहा। जिसमें सरकार को कई तरह की विपरीत परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ा।

धर्मांतरण विरोधी कानून
उत्तराखंड में धर्मांतरण विरोधी कानून उत्तरप्रदेश से भी सख्त है। प्रदेश में जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने या करने पर अब 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। राज्यपाल ने उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2022 को मंजूरी दे दी है। जिसके बाद अब अधिनियम राज्य में प्रभावी हो गया है। कानून में जो प्राविधान किए हैं, उसके अनुसार जबरन, लालच देकर या धोखे से किसी भी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराना जुर्म होगा। ऐसा करने का दोषी पाए जाने पर उसे 10 साल तक की कैद हो सकती है। नए कानून में 50 हजार के जुर्माने का प्रावधान किया गया है, धर्मांतरण कराने का दोषी पाए जाने वाले को पांच लाख रुपये तक पीड़ित को देने होंगे। उत्तराखंड में 2018 में यह कानून बनाया गया था। उसमें जबरन या प्रलोभन से धर्मांतरण पर एक से पांच साल की सजा का प्रावधान था।

नकल विरोधी कानून
उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू हो गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश, 2023 पर मुहर लगा दी है। अब भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल कराने या अनुचित साधनों में लिप्त पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा मिलेगी। साथ में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना भी देना पड़ेगा। इस गैर जमानती अपराध में दोषियों की संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। अध्यादेश में संगठित होकर नकल कराने और अनुचित साधनों में लिप्त पाए जाने वाले मामलों में आजीवन कैद की सजा तथा 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रविधान है। इसके साथ ही आरोपियों की संपत्ति भी जब्त करने की व्यवस्था इसमें की गई है। सीएम पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में शुचिता और निष्पक्षता को लेकर सरकार संकल्पबद्ध है। उत्तराखंड ने देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू कर दिया है।

महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का कानूनी अधिकार
उत्तराखंड में धामी सरकार ने महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का कानूनी अधिकार दे दिया है। प्रदेश सरकार ने 30 नवंबर 2022 को विधानसभा में बिल को सर्वसम्मति से पारित कराकर राजभवन भेजा था। राजभवन ने उत्तराखंड लोक सेवा (महिलाओं के लिए क्षैतिज आरक्षण) विधेयक 2022 को मंजूरी दे दी।
दरअसल हाईकोर्ट ने राज्य लोक सेवा आयोग की उत्तराखंड सम्मिलित प्रवर सेवा के पदों के लिए आयोजित परीक्षा में उत्तराखंड मूल की महिला अभ्यर्थियों के 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण वाले शासनादेशों पर रोक लगा दी थी। राज्य सरकार की विशेष अनुग्रह याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। जिसके बाद धामी सरकार ने कदम बढ़ाया।

राज्य आंदोलनकारियों के लिए 10% क्षैतिज आरक्षण
उत्तराखंड सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों के लिए 10% क्षैतिज आरक्षण को मंजूरी दी है। भराड़ीसैंण में हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। लंबे समय से राज्य आंदोलनकारी इसको लेकर आंदोलन कर रहे थे। प्रदेश में 10 हजार से अधिक राज्य आंदोलनकारी हैं, जिन्हें आरक्षण का लाभ मिलेगा।

बैकडोर भर्ती पर सख्त कदम
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में हुई बैकडोर भर्ती की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण से इसकी जांच कराने की मांग की। जिसके बाद ऋतु खंडूरी भूषण ने इसकी जांच समिति से जांच कराई और विधानसभा में बैकडोर से हुईं 250 भर्तियां रद्द कर दी हैं। इनमें 228 तदर्थ और 22 उपनल के माध्यम से हुईं नियुक्तियां शामिल हैं। वहीं, विधानसभा सचिव मुकेश सिंघल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करते हुए उनके खिलाफ जांच बैठा दी गई है। ये धामी सरकार का सबसे कठोर कदम में शामिल रहा।
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