• search
उत्तराखंड न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

Char Dham: हर धाम के पास हैं 'रहस्यमयी कुंड', जिनसे हर मौसम निकलती है गर्म पानी की दिव्य धारा

|
Google Oneindia News

देहरादून, 16 मई। देवभूमि उत्तराखंड में इन दिनों विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा जारी है। जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। चारों धामों का धार्मिक महत्व के बारे में हर कोई जानना चाहता है। ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं। चारोंधामों से संबंधित एक रोचक और अहम जानकारी। अगर आप चार धाम यात्रा पर निकले हैं तो हर धाम में आपको तप्त कुंड यानि गर्म पानी का कुंड जरुर मिलेगा। जो कि सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं वैज्ञानिक तौर पर भी खास है। मान्यता है कि चारधाम यात्रा में आने से पहले इन तप्त कुंडों में स्नान जरुरी करना चाहिए। जिससे मोक्ष प्राप्ति के साथ ही शरीर के कई रोग में मिटने का दावा किया जाता है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि इन चारों धामों के रास्ते में पड़ने वाले सभी कुंडो में गर्म पानी सालभर रहता है।

यमुनोत्री में कुंड को सूर्यकुंड कहा जाता है

यमुनोत्री में कुंड को सूर्यकुंड कहा जाता है

चारों धामों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ हैं। जहां यमुनोत्री और बद्रीनाथ में तो मंदिर के पास ही तप्त कुंड हैं। जबकि गंगोत्री और केदारनाथ के रास्ते में गर्मकुंड हैं। चारधाम का पहला पड़ाव यमुनोत्री धाम है। यमुनोत्री में कुंड को सूर्यकुंड के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान से यम यातना से मुक्ति मिलती है। यहां पानी इतना गर्म है कि श्रद्धालु खौलते पानी में चावल, आलू आदि खाद्य पदार्थ डालते हैं जो कुछ मिनटों में ही पक जाता है। जिसे प्रसा के रूप में ग्रहण किया जाता है और श्रद्धालु घर लेकर जाते हैं। सूर्य कुंड से निकलने वाले गर्म पानी की धारा दिव्य शीला से होते हुए दो तप्त कुंडों में जाती है, जहां पर श्रद्धालु स्नान करते हैं।

गंगोत्री के रास्ते में गंगनानी में है गर्म कुंड

गंगोत्री के रास्ते में गंगनानी में है गर्म कुंड

गंगोत्री धाम के रास्ते में गंगनानी जगह आती है। जहां गर्म पानी का कुंड है। यहीं पर यात्री विश्राम कर स्नान के बाद मां गंगा के दर्शन के लिए पहुंच जाते हैं। मान्यता है कि इस स्थान पर पाराशर ऋषि ने तपस्या की थी। यहां के पानी के स्नान से भी शरीर के कई रोगों से मुक्ति मिलने का दावा किया जाता है।

केदारनाथ के रास्ते में है गौरीकुंड

केदारनाथ के रास्ते में है गौरीकुंड

बाबा केदार की नगरी के नाम से प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा का सबसे अहम पड़ाव गौरीकुंड है। यहां गर्म कुंड को ही गौरीकुंड कहा जाता है। के 2013 में आई आपदा में गौरीकुंड पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। आपदा के बाद प्राचीन तप्त कुंड से करीब 50 मीटर दूर और 10 फीट नीचे खिसक गया है। जहां पर गर्म पानी की धारा निकल रही है।

बद्रीनाथ धाम में दो कुंड

बद्रीनाथ धाम में दो कुंड

बद्रीनाथ धाम में नारद कुंड और सूर्य कुंड दो तप्त कुंड हैं, जो मंदिर के पास है। श्रद्धालु मंदिर में जाने से पहले यहां पर स्नान जरूर करते हैं। इन कुंडों का पानी काफी गर्म रहता है। जो कि शरीर की थकावट को दूर करने के साथ ही कुंड का पानी सल्फर युक्त होने के कारण कुंड को औषधीय माना जाता है। इसे भगवान अग्निदेव का निवास स्थान माना जाता है। दुनिया भर से लोग पवित्र कुंड में डुबकी लगाने के लिए यहां आते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह शरीर की सभी समस्याओं को ठीक कर देता है।

ये भी पढ़ें-भगवान के दर पर अब सब हुए आम', उत्तराखंड सरकार ने चारों धाम पर VIP एंट्री पर लगाई रोकये भी पढ़ें-भगवान के दर पर अब सब हुए आम', उत्तराखंड सरकार ने चारों धाम पर VIP एंट्री पर लगाई रोक

Comments
English summary
Char Dham: There is a 'mysterious pool' near every Dham, from which the divine stream of hot water emerges every season.
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X