यूपी में बुरी तरह हारी BSP ने उत्तराखंड में दिखाया दम, बनी तीसरे नंबर की पार्टी, जानिए कितनी सीटें मिली
उत्तराखंड में 70 सीटों में से बसपा ने 2 सीट हासिल की
देहरादून, 11 मार्च। उत्तराखंड में भाजपा, कांग्रेस के बाद बहुजन समाज पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। बसपा के लक्सर से शहजाद और मंगलौर से सरवत करीम अंसारी विधायक चुनकर आए हैं। बसपा का विधानसभा चुनाव 2022 में प्रदर्शन उत्तर प्रदेश से भी बेहतर रहा है। उत्तर प्रदेश में बसपा महज 1 सीट पर सिमट गई है।

बसपा के 2 विधायक जीते
उत्तराखंड में 70 सीटों में से बसपा ने 2 सीट हासिल की हैं। भाजपा 47, कांग्रेस 19, बसपा 2 और निर्दलीय 2 सीटें जीतकर आए हैं। बसपा को यहां पर 2,59,371 वोट मिले। जो कि 4.82 परसेंट है। उतर प्रदेश में बसपा को 12.9 परसेंट यानी उसे 1.18 करोड़ वोट मिले। फिर भी एक सीट ही हासिल कर पाए हैं। बसपा उत्तराखंड में 2002 से 2012 तक शानदार प्रदर्शन करती आ रही है। 2017 में पार्टी का उत्तराखंड में खाता नहीं खुला। लेकिन बार बसपा ने उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे। जिनमें से विधायक चुने गए। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि उत्तराखंड की एक मात्र क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल ने 51 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट जीतकर नहीं आए है। आम आदमी पार्टी ने भी 70 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाए। आप ने उत्तराखंड में 3.31 परसेंट वोट हासिल किए हैं।
बसपा ने सुधारा प्रदर्शन, यूकेडी का सुपड़ा साफ
उत्तराखंड में 2002 से 2012 तक तीसरे दल ने किंगमेकर की भूमिका निभाई है। जिसमें बसपा और यूकेडी दोनों ही शामिल रही हैं। उत्तराखंड में पहला चुनाव 2002 में हुआ। तब भाजपा, कांग्रेस और बसपा में त्रिकोणीय मुकाबला हुआ। कांग्रेस 36, भारतीय जनता पार्टी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की, बहुजन समाज पार्टी 7 सीट जीती। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने और भी बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई। इस चुनावों में बसपा के 8 विधायक जीते। 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा 3 विधायकों पर सिमट गई, लेकिन इस बार बसपा ने किंग मेकर की भूमिका निभाई और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल हुई। 2017 में बसपा का उत्तराखंड से सूपड़ा साफ हो गया। इस बार बसपा ने अपना प्रदर्शन सुधारते हुए 2 सीटें जीत ली हैं। क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल का भी हर चुनाव में प्रदर्शन गिरता रहा। 2002 के विधानसभा चुनाव में यूकेडी के चार विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2007 के चुनाव में 3 यूकेडी के 3 विधायक ही जीतकर आए। जबकि 2012 में एक और 2017 में कोई विधायक चुनाव जीतकर नहीं आया। इस बार भी यूकेडी का सुपड़ा साफ हो गया है।












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