Badrinath dham: गरुड़ पर बैठकर बैकुंठ धाम चले बदरी​ विशाल, जानें बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया

बद्रीनाथ के कपाट 27 अप्रैल को प्रात: 7 बजकर 10 मिनट पर विधि-विधान से खोल दिए जाएंगे। कपाट खोलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मान्यताओं के अनुसार भगवान बदरी विशाल ने गरुड़ में बैठकर धाम के लिए प्रस्थान किया।

Badrinath Dham: Badri Vishal went to Baikunth Dham sitting on Garuda process of opening the doors

गंगोत्री, यमुनोत्री व केदारनाथ के कपाट खुलने के बाद अब भक्तों को बैकुंठ धाम बद्रीनाथ के कपाट खुलने का इंतजार है। 27 अप्रैल को प्रात: 7 बजकर 10 मिनट पर विधि-विधान से बदरी विशाल के कपाट खोल दिए जाएंगे। कपाट खोलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा योगबदरी मंदिर पांडुकेश्वर के लिए रवाना होंगे
बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रियाओं के तहत आज जोशीमठ नृसिंह मंदिर से बदरीनाथ के रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, आदि गुरू शंकराचार्य की गद्दी और गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा योगबदरी मंदिर पांडुकेश्वर के लिए रवाना होंगे।

27 अप्रैल को प्रात: 7 बजकर 10 मिनट पर कपाट खोल दिए जाएंगे

बुधवार को पांडुकेश्वर से कुबेर जी और उद्घव जी की उत्सव डोली रावल, और शंकराचार्य की गद्दी बदरीनाथ धाम के लिए रवाना होगी। जिसके बाद 27 अप्रैल को प्रात: 7 बजकर 10 मिनट पर विधि-विधान से बदरीनाथ के कपाट खोल दिए जाएंगे।

बदरी विशाल ने गरुड़ में बैठकर धाम के लिए प्रस्थान किया

जोशीमठ में सोमवार को गरुड़ छाड़ मेला आयोजित हुआ। मेले में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मान्यताओं के अनुसार भगवान बदरी विशाल ने गरुड़ में बैठकर धाम के लिए प्रस्थान किया। भगवान बिष्णु की प्रतिमा को लकड़ी से बने गरुड़ में बैठाकर नृसिंह मंदिर से छावनी बाजार लाया गया।

आज तेल कलश जोशीमठ से पांडुकेश्वर पहुंचेगी

रस्सी के माध्यम से गरुड़ को छोड़ा गया और भगवान विष्णु की प्रतिमा को आगे ले जाया गया। दोनों प्रतिमाएं नृसिंह मंदिर के पास पंचायती भवन में लाई गई। उधर श्री बदरी विशाल गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा डिम्मर गांव से जोशीमठ के लिए रवाना होकर देर शाम जोशीमठ पहुंची। आज तेल कलश जोशीमठ से पांडुकेश्वर और कल बदरीनाथ धाम पहुंचेगी।

शनिवार को तिमुंडिया मेले का आयोजन करने की परंपरा

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    इससे पहले यात्रा से पूर्व के सप्ताह में पड़ने वाले शनिवार को तिमुंडिया मेले का आयोजन करने की परंपरा है। इस मेले के आयोजन को बद्रीनाथ धाम की सुखद यात्रा की कामना के लिए किया जाता है। मान्‍यता है कि तिमुंडिया मेले का आयोजन करने से बद्रीनाथ धाम की यात्रा निर्विघ्न संपन्न होती है। बीते शनिवार को नरसिंह मंदिर प्रांगण जोशीमठ में तिमुंडिया वीर देवता ने भोग स्वीकार किया। इस दौरान क्षेत्र की महिलाओं ने पारंपरिक झुमेलो और चाचरी नृत्य किया।

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