आदि कैलाश के लिए हेली सेवा की तैयारी, कैलाश की यात्रा के साथ कहां और कब से होगा दीदार
आदि कैलाश या छोटा कैलाश की यात्रा को आसान बनाने के लिए अब हेली संचालन की तैयारी शुरू की जा रही है। इसको लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिथौरागढ़ यात्रा को देखते हुए आदि कैलाश यात्रा को लेकर लोग ज्यादा उत्साहित नजर आ रहे हैं। आदि कैलाश की यात्रा बहुत लंबी और पैदल होने से काफी कठिन मानी जाती है। यात्रा में कम से कम हफ्ते से 10 दिन लगते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 11 व 12 अक्टूबर को पिथौरागढ़ दौरा प्रस्तावित है। इसमें पीएम मोदी आदि कैलाश के व्यू प्वाइंट का भी शुभारंभ कर सकते हैं। यहां तक यात्रियों को अभी पैदल यात्रा करनी होती है। जिसको हवाई यात्रा कराने का सरकार का प्लान है। इसके लिए पर्यटन विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
हालांकि इसका टिकट कितना होगा और कहां से कहां तक यात्री को हवाई यात्रा कराई जाएगी। इसको लेकर अभी कुछ भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। माना जा रहा है कि पिथौरागढ़ से ही हेली का संचालन किया जा सकता है। जो कि ज्योलिकांग तक सीधे कराया जा सकता है। इसके लिए डीजीसीए की अनुमति भी मिलनी है।
जो कि अगले सीजन से शुरू की जा सकती है। वर्तमान में उत्तराखंड में केदारनाथ की हेली सेवा संचालित हो रही है। जिसका जबरदस्त रिस्पांस मिल रहा है। सरकार को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के बाद आदि कैलाश के लिए भी हेली सेवा का अच्छा रिस्पांस मिल सकता है।
आदि कैलाश समुद्रतल से 5945 मीटर की ऊंचाई पर स्थिति है। जो कि हिंदू धर्म और ग्रंथों में भगवान शिव का निवास स्थल माना जाता है। कैलाश मानसरोवर की तरह आदि कैलाश यात्र का अपना महत्व है। भारतीय लोग आदि कैलाश की यात्रा ज्यादा करते हैं।
इसके साथ ही ओम पर्वत भी जाना जरुरी माना गया है। आदि कैलाश की यात्रा पिथौरागढ़ जिले के धारचूला से आदि कैलाश की यात्रा शुरू होती है। धारचूला से तवाघाट, पांगू, नारायण आश्रम, गाला, बूंदी, गर्ब्यांग, गुंजी, कुटी गांव होते हुए अंतिम पड़ाव ज्योलिकांग है। नाभीढांग से ओम पर्वत के दर्शन होते हैं।
आदि कैलाश की यात्रा कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) की ओर से संचालित की जाती है। कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से सीआरसी केंद्रों और जनसंपर्क कार्यालयों में पंजीकरण की कराया जाता है। इस साल इसका टिकट 45 हजार रुपये का है।
जिसमें काठगोदाम से शुरु होकर यात्रा भीमताल, कैंची धाम, जागेश्वर, पिथौरागढ़, धारचूला, गुंजी होते हुए आदि कैलाश और ओम पर्वत की कराई जा रही है। जिसकी वापसी में धारचूला और चौकौड़ी होते हुए काठगोदाम में इसका समापन होता है। जो कि कम से कम आठ दिन की होती है।












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