चमोली त्रासदी: तपोवन टनल और रैणी से अब तक बरामद हुए 62 शव, 28 मानव अंग भी मिले
Uttarakhand Glacier Burst, चमोली। ग्लेशियर फटने से उत्तराखंड के चमोली जिले में सात फरवरी को भीषण आपदा आईं थी, जिसे 13 दिन बीत चुके है। इस आपदा में फंसे श्रमिकों तक पहुंचने का सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, बीआरओ के जवान आज भी प्रयास कर रहे हैं। इस बीच उत्तराखंड के डीजीपी ने बताया कि शुक्रवार तक 62 शव बरामद किए जा चुके हैं। जबकि 28 मानव अंग अलग-अलग स्थानों से बरामद किए गए हैं। बताया कि 31 शवों एवं 01 मानव अंग की शिनाख्त की जा चुकी है। कहा कि डॉग स्क्वॉड, दूरबीन, राफ्ट और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल कर आपदा प्रभावित इलाकों में मलवे में दबे व्यक्तियों की खोजबीन लगातार जारी है।
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उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने शुक्रवार को एएनआई न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा, 'ग्लेशियर फटने से उत्तराखंड के चमोली जिले में आई आपदा के बाद अब तक 62 शव बरामद किए जा चुके है। जिसमें 28 मानव अंग अलग-अलग स्थानों से बरामद किए गए हैं जिसमें से 31 शवों एवं 01 मानव अंग की शिनाख्त की जा चुकी है। डीजीपी ने बताया कि कुल 204 लोगों की गुमशुदगी दर्ज की जा चुकी है। 56 परिजनों एवं 49 शवों के DNA सैम्पल मिलान हेतु FSL देहरादून भेजे गए हैं। कहा कि अभी तक 142 लोग लापता है, जिनके लिए रैणी में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट, तपोवन में विष्णुगाड हाइड्रो प्रोजेक्ट एवं नदी तटों के आसपास खोजबीन जारी है।
डीजीपी ने कहा है कि शवों से मिले आभूषण, टैटू एवं अन्य पहचान चिन्हों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कर उन्हें सुरक्षित रखा जा रहा है। बीते कई दिनों से लगातार लोगों को बचाने का काम जारी है लेकिन मलबा इतनी ज्यादा तादाद में जमा है कि काम की गति धीमी है। कहा कि टनल के अंदर मलबा और कीचड़ ज्यादा होने के कारण खोज और राहत बचाव कार्य लंबे समय तक चलेगा। हालांकि, सुरंग में पानी आने पर पंपिंग द्वारा पानी निकाला जा रहा है। खोज और राहत बचाव कार्य जारी है।












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