मतदान से पहले क्या चुनावी एजेंडा सेट करना चाहते हैं योगी, जानिए उनकी भाषा परिवर्तन की 5 वजहें

लखनऊ, 3 फ़रवरी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अपने चरम पर है और सियासत भी गरम हो रही है। एक महीने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भाषा एक्सप्रेस वे, विकास और मोदी और यूपी सरकार की नीतियों पर केंद्रित होती थी लेकिन जैसे ही यूपी में चुनाव की अधिसूचना जारी हुई वैसे ही योगी की भाषा भी बदल गई। विकास के एजेंडे पीछे छूट गया और उसकी जगह शिमला की ठंडक ने ले लिया। योगी अब पश्चिमी यूपी की रैलियों में यह दावा कर रहे हैं कि यूपी में दस मार्च की मतगणना के बाद यूपी में एक बार फिर बीजेपी की सरकार बनेगी और वो उन दंगाइयों और तमंचावादियों को ऐसा सबक सिखाएंगे कि वो हमेशा याद रखेंगे। सवाल ये है कि आखिर जैसे जैसे यूपी में चुनाव परवान चढ़ रहा है सीएम योगी की भाषा क्यों बदल रही है। इसके पीछे की वजह क्या है।

मतदान से पहले चुनावी एजेंडा सेट करना चाहते हैं योगी

मतदान से पहले चुनावी एजेंडा सेट करना चाहते हैं योगी

CM योगी ने जनवरी में जिन्नावादी, तमंचावादी, परिवारवादी शब्द का इस्तेमाल किया। रैलियों में बुलडोजर शब्द का प्रयोग किया। बुलडोजर यानी सख्ती वाला CM। भाजपा का यह प्रयोग सफल भी रहा और कार्यकर्ताओं की सोशल मीडिया पर 50% पोस्ट इसी के इर्द-गिर्द घूम रही है। CM योगी लोगों के बीच मुद्दा स्थापित करने के लिए जाने जाते हैं। चुनावी रण में वह इसी की खोज कर रहे हैं। एक महीने पहले तक विकास को अपना एजेंडा बताने वाले योगी अब ऐसा बयान दे रहे हैं कि ठंडी के मौसम में माहौल में गर्मी आए। हालांकि इस बार अखिलेश यादव-जयंत चौधरी की जोड़ी भी पूरी तरह से चौकन्नी है और वो योगी की आक्रामक शैली का जवाब बड़े ही शांत भाव से दे रहे हैं।

CM योगी के भाषा परिवर्तन की वजह क्या है

CM योगी के भाषा परिवर्तन की वजह क्या है

UP की राजनीति पर नजदीकी नजर रखने वाले कुमार पंकज बताते हैं कि, पूर्वांचल के धाकड़ नेता ओम प्रकाश राजभर, पिछड़ों के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे कई दिग्गज नेता BJP छोड़कर सपा में चले गए। कई सर्वे के आंकड़े भी इस बार मुकाबला तगड़ा बता रहे हैं, ऐसे में ध्रुवीकरण को लेकर ऐसी भाषा बोली जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले योगी आदित्यनाथ ने पश्चिमी UP की रैलियों में मुजफ्फरनगर, कैराना और सहारनपुर के पलायन को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया था। उन्होंने लोगों के भीतर ये डर स्थापित कर दिया कि अगर भाजपा सत्ता में नहीं आई तो यहां की स्थिति 1990 के कश्मीर जैसी हो जाएगी, जहां सिर्फ हिंसा होगी, लोगों को भगाया जाएगा।

मुजफ्फरनगर दंगे और बाबरी कांड की याद दिलाने की कोशिश क्यों हो रही

मुजफ्फरनगर दंगे और बाबरी कांड की याद दिलाने की कोशिश क्यों हो रही

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर बिना किसी रोक-टोक के हमला करते हुए कहा कि मुजफ्फरनगर दंगों के लिए जिम्मेदार लोग" और "राम भक्तों को अंधाधुंध गोली मारने वाले" आज शांति और सद्भाव पर उपदेश दे रहे हैं। हिंदुओं के "खून" के लिए विपक्षी पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हुए, आदित्यनाथ ने गाजियाबाद के मुरादनगर में चुनाव प्रचार करते हुए कहा कि "इनको शर्म भी नहीं आती, दंगो के कारण मारे गए निर्दोश हिंदुओं के खून से जिनकी टोपीयां रंगी हुई हो और रामभक्तों के ऊपर गोलियों से जिन्की टोपीयां रंगी हो, वो आज शांति और सौहर का संदेश दे रहे हैं। आज शांति और सद्भाव का उपदेश दे रहे हैं।

दस मार्च के बाद गर्मी शांत करने का क्या है राज

दस मार्च के बाद गर्मी शांत करने का क्या है राज

पास की कैराना सीट से सपा उम्मीदवार पर निशाना साधते हुए उन्होंने ट्वीट किया, "कैराना से तमंचावादी पार्टी का प्रत्याशी धामकी दे रहा है; यानी गरमी अभी शांत नहीं हुई है! 10 मार्च के बाद गरमी शांत हो जाएगी। कैराना उम्मीदवार धमकी दे रहा है, जिसका मतलब है कि गर्मी अभी कम नहीं हुई है। वह 10 मार्च के बाद ठंडा हो जाएगा। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे। पश्चिमी यूपी में मिल रही कड़ी टक्कर से बीजेपी इस बार परेशान है। यही वजह से है कि बीजेपी के चाणक्य अमित शाह और चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान जहां आरएलडी चीफ जयंत चौधरी पर निशाना साधकर पुराने जख्मों की याद दिला रहे हैं वहीं दूसरी ओर योगी विकास के एजेंडे को छोड़कर अपने पूरे तेवर में दिखाई दे रहे हैं। इसके पीछे केवल एक मकसद है कि चुनाव से पहले ध्रुवीकरण का एजेंडा सेट किया जा सके क्योंकि तभी इसका फायदा बीजेपी को मिलेगा।

बार बार दस मार्च की याद दिला रहे योगी

बार बार दस मार्च की याद दिला रहे योगी

योगी पिछले पांच सालों में अपना एजेंडा सेट करने के लिए ही जाने जाते रहे। विधानसभा के हर सत्र में उन्होंने सपा पर जोरदार हमला बोलते हुए समाजवादी पार्टी को परेशान करने का काम किया। योगी ने कभी अब्बाजान कहकर अखिलेश पर तंज कसा तो कभी समाजवादी पार्टी को तमंचावादी और जिन्नावादी बताते रहे। योगी एक तरफ जहां विकास के दावे करते हैं वहीं दूसरी ओर यूपी में बेहतर कानून व्यवस्था को लेकर अपनी पीठ भी खुद ही थपथपाने की कोशिश करते हैं। पश्चिम की एक जनसभा में योगी कहते हैं कि, सभी 25 करोड़ लोग (यूपी के) हमारे परिवार हैं। उनका विकास हमारा विकास है - हम जनता के प्रति कर्तव्यबद्ध हैं। यदि आप आज बसपा या सपा के टिकट पर लड़ते हैं, तो आपको एक प्रमाण पत्र मिलेगा। लेकिन मैं आपको याद दि

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