Yogi के राज में एक महीने के भीतर 5 IAS अधिकारियों ने मांगा VRS, जानिए इसकी वजहें
लखनऊ, 16 सितंबर: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ दूसरी बार शानदार बहुमत के साथ सीएम बने थे। सीएम बनने के बाद से ही योगी ने लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कुछ दिनों पहले ही योगी सरकार ने राज्य के 73 अधिकारियों को लापरवाही बरतने के आरोप में नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। सरकार की इस सख्ती का असर ये है कि एक महीने के भीतर 5 IAS अधिकारियों ने सरकार से VRS मांगा है। हालांकि इसको राजनीतिक हलकों में कई नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि कुछ पूर्व आईएएस अधिकारियों का कहना है कि बदलती कामकाजी परिस्थियों, घरेलू परिस्थियों की वजह से अधिकारी ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

विशेष सचिव राजस्व ने श्रीनिवासुलु ने मांगा वीआरएस
एक महीने के भीतर प्रतिष्ठित सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग करने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पांच अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश में नौकरशाही को अटकलों से भर दिया है। विशेष सचिव (राजस्व) गुराला श्रीनिवासुलु नवीनतम अधिकारी हैं जिन्होंने मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा और अतिरिक्त मुख्य सचिव (नियुक्ति) देवेश चतुर्वेदी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए एक आवेदन दिया है। सवाल ये हैं कि सरकार के काम के दबाव के आगे ये अधिकारी बिखर रहे हैं या फिर और भी वजहें हैं। अधिकारियों की स्वेछिक सेवानिवृत्ति को लेकर पूर्व आईएएस रमा रमण कहते हैं " वीअरएस लेने के पीछे कई तरह की वजहें होती है। किसी के सामने घरेलू परेशानियां होती हैं तो कोइ कामकाज के दौरान पड़ रहे प्रेशर से परेशान होता है। किसी के पास सरकारी नौकरी से ज्यादा पैकेज पर वेतन का मोह होता है जिसकी वजह से अधिकारी इस तरह का फैसला लेता है।"

2008 बैच के आईएएस अधिकारी विद्या भूषण भी कतार में
2005-बैच के आईएएस अधिकारी, श्रीनिवासुलु जनवरी 2016 से जुलाई 2022 तक अपने गृह राज्य आंध्र प्रदेश में अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति पर थे। वह जुलाई में मूल कैडर उत्तर प्रदेश में लौट आए और 29 जुलाई को विशेष सचिव (वित्त) के रूप में तैनात हुए। 6 सितंबर को उनका इसी पद पर राजस्व विभाग में तबादला कर दिया गया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक के रूप में तैनात 2008 बैच के आईएएस अधिकारी विद्या भूषण ने 5 सितंबर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना। उनकी पत्नी, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी अलंकृता सिंह को राज्य सरकार द्वारा अप्रैल में ड्यूटी में लापरवाही व अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया था।

तीन IAS पहले ही कर चुके हैं VRS की मांग
अगस्त में, तीन आईएएस अधिकारी रेणुका कुमार (1987 बैच), जुथिका पाटनकर (1988 बैच) और विकास गोथलवाल (2003 बैच) ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना। गोथलवाल, श्रीनिवासुलु और भूषण ने स्वास्थ्य आधार पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग की है। पूर्व आईएएस रमा रमण के मुताबिक, "स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनने वाले आईएएस अधिकारी केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य राज्यों में भी कई आईएएस अधिकारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है। निजी क्षेत्र में बेहतर विकल्पों के लिए सेवा से बाहर जाना अधिकारी का व्यक्तिगत निर्णय है।''

राजनीतिक दबाव और निजी क्षेत्र में बेहतर विकल्प इसकी वजह
यूपी में पहले की तरह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति कोई असामान्य घटना नहीं है। कुछ आईएएस अधिकारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना है और निजी क्षेत्र में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने कहा कि सेवा में "बदलती कामकाजी स्थिति", राजनीतिक दबाव और निजी क्षेत्र में बेहतर विकल्प अधिकारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कुछ मामलों में, जब राज्य सरकार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध को ठुकरा दिया, तो अधिकारियों ने त्याग पत्र भेज दिया। यह इंगित करता है कि अखिल भारतीय सेवा से अधिकारियों का मोहभंग होता जा रहा है।

सरकार के कामकाज के रवैये खुश नहीं है अधिकारी ?
एक अन्य आईएएस अधिकारी ने कहा कि सेवा की शर्तें भी अधिकारी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। 1990 बैच के आईएएस अधिकारी लंबे समय से अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए भी आईएएस अधिकारियों को राहत देने में उदार नीति का पालन नहीं कर रही है।












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