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सत्ता में वापसी को लेकर क्या है योगी के सामने चुनौतियां, एंटी इनकंबेंसी रहेगी हावी या किसान आंदोलन बनेगा रोड़ा

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लखनऊ, 23 सितंबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में योगी सरकार पूरी तरह से जुटी हुई है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार राज्य में लगातार दूसरा कार्यकाल हासिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी, जबकि इसके दो बड़े विपक्षी दल - सपा और बसपा - सत्ता पाने के लिए हर संभव प्रयास करने में जुटे हुए हैं। चुनाव से पहले, पार्टी और गठबंधनों के भीतर व्यक्तित्व संघर्ष की खबरें आ रही हैं। इस बीच योगी आदित्यनाथ की सरकार क्या सत्ता में वापसी कर पाएगी या इस बार के चुनाव में एंटी इनकंबेंसी, कोरोना महामारी और किसानों का मुद्दा ही सरकार के लिए गले की हड्डी बनेगा यह देखना काफी दिलचस्प होगा।

योगी

बीजेपी सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और उनकी सरकार द्वारा किए गए कार्यों के दम पर सत्ता बरकरार रखने की उम्मीद कर रही है। पार्टी के मुख्य दावेदार के बारे में पूछे जाने पर एक बीजेपी विधायक और मंत्री उपेंद्र तिवारी कहते हैं कि, "भाजपा के सामने कोई नहीं है। सीएम ने लोगों के कल्याण के लिए अथक प्रयास किया है और जनता आने वाले चुनावों में पार्टी को वोट देकर उनको फिर से सत्ता में लाने काम करेगी। वहीं दूसरी ओर सपा दावा कर रही है कि उनकी पार्टी और उसके सहयोगी महान दल 2022 में 400 सीटें जीतकर उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापस आएंगे।'' भाजपा के इस दावे के उलट सपा चीफ अखिलेश यादव ने 8 अगस्त को कहा था कि, "जब मैं (जीतने) 400 सीटों की बात करता हूं, तो लोग सवाल उठाने लगते हैं। लेकिन, जब भाजपा बुलेट ट्रेन की बात करती है, तो कोई इस पर सवाल नहीं उठाता।"

भाजपा के प्रदेश प्रवकता आनंद दुबे कहते हैं कि, "उत्तर प्रदेश के लोग राज्य में सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कल्याण कार्यों से खुश हैं। पिछले 4.5 वर्षों में, राज्य सरकार ने राज्य में बुनियादी ढांचे, निवेश, शिक्षा, कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं आदि से लेकर विकास किया है। लोग इसके बारे में अच्छी तरह से जानते हैं और सत्तारूढ़ सरकार के पक्ष में मतदान करने के लिए तैयार हैं।"

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    अखिलेश यादव

    अखिलेश यादव ने किसान सम्मेलन को लेकर कसा था तंज
    दूसरी ओर, पूर्व सीएम अखिलेश यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही सपा का दावा है कि राज्य के किसानों में सत्ता विरोधी लहर है और वे अगले राज्य के चुनावों में भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर मतदान करेंगे। पूर्व सीएम ने कहा कि,

    "सुना है कि बातचीत की खेती करने वाली भाजपा उत्तर प्रदेश में 'किसान सम्मेलन' करेगी। जब 'अन्नदाता' के मतदाता बनने का समय आया, तो भाजपा ने किसानों को याद किया। किसान गिरने वाले नहीं हैं। भाजपा का जाल। 2022 में, किसान एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ मतदान करेंगे"

    7 अगस्त को लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि, '' भाजपा ने वादा किया था कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी, लेकिन यह असंभव लगता है। किसान और उत्तर प्रदेश के लोग भाजपा से जानना चाहते हैं कि आज किसानों की आय क्या है? आज मूल्य वृद्धि हुई है, और उर्वरक की कीमतें भी बढ़ी हैं। किसानों की आय को दोगुना करने का वादा किया गया था। 2022 तक किसान। यह कब होगा?"

    किसान

    बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व प्रोफेसर कौशलेंद्र मिश्रा ने कहा कि,

    "एंटी-इनकंबेंसी का आधार नेतृत्व पर निर्भर करता है। अगर कोई नेता लोगों के लिए काम कर रहा है तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती है। यूपी में, सत्ता विरोधी लहर है, लेकिन प्रथम दृष्टया यह उस स्तर पर नहीं है जो चुनाव परिणामों पर असर डाले। कुछ विधायकों और सांसदों के खिलाफ लोग असंतुष्ट जरूर हैं लेकिन एंटी इनकंबेंसी कितना काम करेगी यह कह पाना मुश्किल है।''

    किसानों का आदोलन कितना असर डालेगा

    किसानों के कई समूह सितंबर 2020 में संसद द्वारा पारित तीन कृषि अधिनियमों का विरोध कर रहे हैं। सरकार तीन कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में प्रमुख सुधारों के रूप में पेश कर रही है जो बिचौलियों को हटा देंगे और किसानों को देश में कहीं भी बेचने की अनुमति देंगे। हालांकि, विरोध कर रहे किसानों ने आशंका व्यक्त की है कि नए कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को समाप्त करने का काम करेंगे और मंडियों को बड़े कॉरपोरेट्स की दया पर छोड़ देंगे।

    बीजेपी के एक विधायक का दावा है कि,

    "पीएम मोदी ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने और एमएसपी बढ़ाने सहित किसानों के कल्याण के लिए बहुत कुछ किया है। तीन कृषि कानूनों को लागू करने के लिए किसानों का एक समूह केंद्र के खिलाफ विरोध कर रहा है, इसका कारण बिचौलियों ने किसानों को उनके स्वार्थ के लिए उकसाया है। इससे चुनाव परिणाम प्रभावित नहीं होंगे क्योंकि जनता सच्चाई जानती है।"

    कोरोना महामारी के दौरान योगी सरकार पर मिसमैनेजमेंट का आरोप

    यूपी के कई राजनीतिक दल विशेष रूप से कांग्रेस, COVID-19 कुप्रबंधन के मुद्दे पर सरकार का घेराव करती दिख रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 17 लाख से अधिक लोग नोवेल कोरोनावायरस से संक्रमित हुए हैं और 22,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। यूपी में हालांकि कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने अप्रवासियों को बाहर से लाने के साथ की बडे़ पैमाने पर वैक्सीनेशन कराने का दावा किया था। योगी आदित्यनाथ सरकार का दावा है कि यूपी में करीब 9 करोड़ लोगों को वैक्सीनेशन हो चुका है। दूसरी लहर के दौरान सरकार ने जिस तरह का प्रयास महामारी से निपटने के लिए दिखाया वैसा किसी राज्य में नहीं दिखा।

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    हालांकि, कांग्रेस नेता अजय राय का दावा है कि राज्य में संक्रमण के कारण एक लाख से अधिक मौतें हुई हैं। जहां सपा तीन कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध की बात करती है, वहीं कांग्रेस राज्य में दूसरी COVID-19 लहर से निपटने में सरकार को विफल बता रहा है। कांग्रेस के नेता और पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि,

    "लोग COVID-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन के कारण सरकार से नाराज़ हैं, जिसमें राज्य में ऑक्सीजन, बिस्तर और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोगों की मौत हो गई थी। वे इसे नहीं भूले हैं और यह आगामी चुनावों में देखा जाएगा।"

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    English summary
    will the anti-incumbency prevail or will the farmers' movement become a hindrance in the path of Yogi
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