रामपुर तलाक केस: पति से सुलहनामे के तहत गुलफशां को करना पड़ेगा हलाला
रामपुर। उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर में हुए तीन तलाक के चर्चित मामले में अब नया मोड़ आ गया है। गांव की पंचायत ने हलांकि दोनों के बीच सुलहनामा करा दिया है लेकिन शरीयतन दोनों मियां-बीवी के रूप में हलाला के बाद ही रह सकेंगे। पत्नी को तीन महीने दस दिन की इद्दत पूरी करनी होगी। क्षेत्र का मामला गांव से लेकर संसद तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

दोनों ने की थी लव मैरिज
जिले के थाना अजीमनगर क्षेत्र के गांव नगलिया आकिल के रहने वाले कासिम को अपने ही गांव की गुलफशां से मोहब्बत हो गई। काफी दिन प्रेम-प्रसंग चलने के बाद दोनों जब एक-दूसरे के लिए निकाह करने की मंशा जताई तो इस पर दोनों के परिवारों ने आपत्ति जताई और कोई भी इस निकाह के लिए राजी नहीं थे। परिवार को छोड़ दोनों निकाह के बंधन में बंधकर एक दूजे के हो गये लेकिन परवान चढ़ी यह मोहब्बत ज्यादा दिन टिक नहीं सकी।

देर से सोकर उठती थी गुलफशां, नाराज शौहर ने दिया तलाक
दोनों के बीच अक्सर तकरार का माहौल हो जाता। निकाह के पांच महीने बाद यानी तीन-चार रोज पहले कासिम ने गुलफशां के साथ मारपीट भी की। रोज गुलफशां के देर से उठने से नाराज शौहर कासिम ने उसे एक बार में तीन तलाक दे दी। उसे घर से बाहर निकालकर खुद ताला डालकर वह गायब हो गया जिसके कारण पूरा मामला हलके की चर्चित में आ गया और हर किसी की जुबान पर छाया।

हलाला के बाद ही रह सकेंगे साथ
मामला आखिरकार पुलिस तक पहुंच गया। गुलफशां ने शौहर द्वारा मारपीट करने और तीन तलाक देने की शिकायत पुलिस से की। इस पर पुलिस ने मामले को सुलझाने का आश्वासन गुलफशां को दिया लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार गांव के लोगों ने शरीयत के हिसाब से सुलहनामा तो करा दिया लेकिन एक बार में दी गई तीन तलाक का मसला बीच में आ गया। इस पर पंचायत व ग्राम प्रधान, व धार्मिक उलेमा सभी ने मिलकर शरीयत के मुताबिक तय किया कि दोनों हलाला के बाद ही साथ रह सकेंगे।

गुलफशां को हलाला के लिए करना होगा किसी और से निकाह
इसके लिए गुलफशां को तीन महीने दस दिन तक पर्दे में रहकर इद्दत को पूरा करना होगा। इद्दत पति के मरने के बाद चार महीने दस दिन की होती है और जिन्दा रहने के दौरान तलाक होने पर दोबारा साथ रहने के लिए तीन महीने दस दिन का पर्दा करना होता है जिसे हलाला कहते हैं। गुलफशां अब हलाला के बाद ही अपने शौहर कासिम के साथ रह सकेगी। हलाला पूरा करने के लिए गुलफशां को किसी अन्य व्यक्ति से निकाह भी करना पड़ेगा अन्यथा हलाला की मान्यता अधूरी रह जायेगी। अब देखने वाली बात यह है कि तकरार के दौरान एक बार में तीन तलाक देने के मामले में कितने पापड़ गुलफशां को बेलने पड़ेंगे या फिर दोनों बिना शरीयत के साथ रहेंगे। क्षेत्र का यह मामला इतना गरमाया कि इसे संसद में उठाया गया।












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