BHU: बीएचयू में हिंसा पर सरकार ने तीन 'बेकसूर' अफसरों पर गिराई गाज!
वाराणासी। नारी सुरक्षा की मांग को लेकर धरना देने वाली बेटियों पर लाठियां बरसाई गयीं तो छात्राओं के समर्थन में छात्र भी आ गए और शुरू हो गया गोरिल्ला युद्ध। वीसी के आवास पर मिलने गयी लड़कियों को शनिवार की रात अँधेरे में पीटा तो छात्रों ने जबाब देते हुए पथराव शुरू किया। पत्थर, लाठियां चलाने वाले पुलिसवालों ने भी फेंके। छात्रों ने इस ईंट का जबाब पत्थर से ना देकर कैम्पस से लेकर बाहर तक आगजनी शुरू की।

क्या ये तीन अफसर हैं दोषी?
हालत को बिगड़ता देख जिला प्रशासन से मदद मांगी गई। फिर शुरू हुआ स्टूडेंटों और पुलिस के बीच आर-पार की लड़ाई। पूरी रात लोग चीखते रहे तो रविवार की दोपहर सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। सीओ भेलूपुर, एसओ लंका और एडिशनल सिटी मजिस्ट्रेट को बीएचयू बवाल में दोषी मानते हुए हटाया गया। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या इतनी बड़ी घटना के जिम्मेदार ये ही तीन अफसर हैं जिनके कारण बवाल हुआ और लाठीचार्ज की कार्रवाई खुद इनके इशारे पर ही हुआ?

वीसी लॉज के पास शुरु हुआ था हंगामा, क्या वहां मौजूद थे अफसर?
यदि घटना के शुरुआत को देखें तो धरने के बीच लड़कियों को मनाने के लिए कई प्रयास हुए। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कोशिश की तो यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने भी खूब मान मन्नौव्वल किया लेकिन बच्चियां वीसी के बुलाने की मांग पर अड़ी रहीं। इस बीच बात बनी और सुरक्षा की मांग करने वालों को कुलपति आवास बुलाया गया। वहां सार्वजनिक रूप से कुलपति से बात करने की बात पर माहौल बिगड़ा तो क्या उस वक्त ये तीनों अधिकारी मौजूद थे जिनके आदेश पर लड़कियों को पीटा गया?

यूनिवर्सिटी के सुरक्षा अधिकारी और कर्मचारियों पर कब होगी कार्रवाई?
दरअसल यूनिवर्सिटी के अपने सुरक्षा अधिकारी और कर्मचारी हैं जो सेना से रिटायरमेंट के बाद यहाँ भर्ती किये जाते हैं। बताया जा रहा है कि वीसी आवास से लेकर कैम्पस के हर एरिया में इन्हें ही सुरक्षा करनी होती है और ये वही हैं जिन्होंने लड़कियों को जानवरों की तरह पीटा। अब ये जबाब कौन देगा कि इन पर कार्रवाई कब की जाएगी?












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