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क्यों चर्चा में है फूलन देवी का परिवार, जानिए चुनाव से पहले इनके परिवार से क्यों मिले अखिलेश

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लखनऊ, 14 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में चुनाव बिसात बिछनी शुरू हो गई है। सभी राजनीतिक दल अपने अपने हिसास से राजनीतिक रोटियां सेकने में जुट गए हैं। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी ने पिछले महीने की निषाद पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया था वहीं दूसरी ओर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी समाजवादी विजय यात्रा के दौरान निषाद समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पूर्व सांसद फूलन देवी की मां का आशीर्वाद लिया। अखिलेश के इस कदम को यूपी में चुनाव से पहले काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि यूपी में करीब 19 लोकसभा क्षेत्रों की करीब 150 सीटों पर इनकी अहम भूमिका होती है।

अखिलेश यादव

मुलायम ने फूलन के खिलाफ सभी मामले वापस लिए थे
समाजवादी पार्टी (सपा) सुप्रीमो अखिलेश यादव ने बुधवार को डाकू से नेता बनीं फूलन देवी की मां का आशीर्वाद लेने के लिए मुलाकात की। अपनी "विजय रथ यात्रा" के दौरान जालौन पहुंचने के बाद, यादव ने फूलन की मां मूल देवी को देखा। वह गाड़ी से उतरे और उनके पैर छुए। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के मूला देवी का आशीर्वाद लेने के वीडियो क्लिप मीडिया के साथ साझा किए गए।

सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि फूलन देवी की मां ने अखिलेश यादव को 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने "बैंडिट क्वीन" के नाम से लोकप्रिय फूलन देवी के खिलाफ मामले वापस ले लिए थे और बाद में, उन्हें राजनीति में प्रवेश सुनिश्चित किया।

फूलन देवी

मिर्जापुर लोकसभा से 1999 में चुनी गईं थीं सांसद

दरअसल, 1996 में, फूलन देवी पूर्वी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद बनीं और 1999 में फिर से चुनी गईं। 2001 में, उनकी दिल्ली स्थित आवास के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पूर्व सांसद मिर्जापुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में सबसे पिछड़ी जातियों (एमबीसी) के बीच लोकप्रिय थे।

निषाद पार्टी को काउंटर करने के लिए अखिलेश ने उठाया कदम
फूलन देवी का जन्म 1963 में जालौन जिले के घुरा का पुरवा गांव में निषाद (नाविक) जाति में हुआ था। सपा की पिछड़ी जाति शाखा ने हाल ही में रायबरेली में उनकी प्रतिमा स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन अनुमति नहीं दी गई। फूलन देवी का आशीर्वाद लेने के पीछे निषाद समुदाय के वोटों को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा गया था क्योंकि निषाद पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले सपा के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया था।

फूलन देवी

यूपी में निषाद समुदाय का राजनीतिक महत्व

दरसअल निषाद समुदाय उन 17 ओबीसी समुदायों में से हैं जिन्हें 2004 और फिर 2016 में समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार द्वारा अनुसूचित जाति का दर्जा देने का प्रस्ताव दिया गया था। राज्य सरकार ने इन जाति समूहों को अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने के लिए एक सरकारी आदेश जारी किया था। लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी। पिछले लोकसभा चुनाव निषाद समुदाय के लिए एक बदलाव का प्रतीक है, जिसने राजनीतिक सौदेबाजी की शक्ति हासिल कर ली है और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा स्वीकार किया गया है।

19 लोकसभा क्षेत्रों में है इस समाज की अहम भूमिका

दरअसल, निषादों को एकजुट करने के लिए जनवरी 2013 में एक राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद का गठन किया गया था। संगठन अभी भी मौजूद है। एक राजनीतिक उपस्थिति को चिह्नित करने के लिए, निषाद पार्टी को अगस्त 2016 में पंजीकृत किया गया था और 2017 में यूपी चुनावों में अपनी शुरुआत की और 62 सीटों पर चुनाव लड़ा, हालांकि यह केवल भदोही में जीती थी।

अखिलेश

यूपी की 403 विधानसभा क्षेत्रों में से 152 सीटों पर अच्छी मौजूदगी है। लगभग दो दर्जन लोकसभा क्षेत्रों में उनकी एक बड़ी आबादी है, उनमें से प्रमुख भदोही, जौनपुर, आजमगढ़, कुशीनगर, घोसी, देवरिया, बस्ती, डुमरियागंज, सलेमपुर, वाराणसी, बलिया और सुल्तानपुर हैं।

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English summary
Why Phoolan Devi's family in discussion, know why Akhilesh met her family before elections
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