अजय मिश्रा के इस्तीफे को लेकर असमंजस में BJP, जानिए उनको हटाने को लेकर दो धड़ों में क्यों बटी पार्टी
लखनऊ, 12 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले लखीमपुर खीरी कांड बीजेपी के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा उर्फ टेनी के बेटे आशीष मिश्रा के जेल जाने के बाद भी अब तक यह मामला शांत नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि एक तरफ जहां विपक्ष एक सुर से अजय मिश्रा को मोदी कैबिनेट से हटाने की मांग पर अड़ा हुआ है वहीं दूसरी ओर बीजेपी के भीतर भी अजय मिश्रा का विरोधी गुट सक्रिय हो गया है और उन्हें हटाने का माहौल बना रहा है। यही कारण है कि अजय के इस्तीफे को लेकर बीजेपी दो धंडों में बंटती जा रही है। हालांकि बीजेपी के सूत्रों का दावा है कि अजय मिश्रा के इस्तीफे से पहले बीजेपी हर सियासी नफा नुकसान का आंकलन कर लेना चाहती है ताकि चुनाव से पहले कोई बड़ी चूक न हो जाए।

अजय मिश्रा के इस्तीफे को लेकर असमंजस में बीजेपी आलाकमान
लखीमपुर खीरी और आसपास के तराई बेल्ट में बिगड़ रहे माहौल को लेकर बीजेपी का आलाकमान भी सक्रिय हो चुका है। एक तरफ लखीमुपर खीरी में मंगलवार को मृत किसानों के अंतिम अरदास में हजारों लोग शामिल हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर एक दिन पहले ही दिल्ली में बीजेपी की एक अहम बैठक हुई जिसमें प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, संगठन मंत्री सुनील बंसल, यूपी प्रभारी राधा मोहन सिंह, यूपी चुनाव के मुख्य प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद थे। बैठक में यूपी के वर्तमान राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में अजय मिश्रा के इस्तीफे को लेकर भी चर्चा हुई लेकिन पार्टी के नेता अभी असमंजस में हैं। सियासी नफा नुकसान का आंकलन करने के बाद ही मिश्रा को लेकर कोई बड़ा कदम उठाया जाएगा।

6 दिन पहले अमित शाह से अजय मिश्रा ने की थी मुलाकात
इस वक्त पूरे देश की सियासत लखीमपुर खीरी की घटना पर केंद्रित है। विपक्षी पार्टियों ने इस घटना को लेकर बीजेपी की सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष लगातार केंद्रीय राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा का इस्तीफा और उनके बेटे पर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को अजय कुमार मिश्रा से दिल्ली में मुलाकात की। माना जा रहा है कि शाह से मुलाकात के बाद सरकार अजय कुमार मिश्रा का इस्तीफा ले सकती है। हालांकि अजय कुमार मिश्रा ने अभी ऐसी खबरों को खारिज किया है।

अजय मिश्रा की डायरेक्ट मोदी कैबिनेट में हुई थी एंट्री
दो बार के सांसद होने के बावजूद, मिश्रा जुलाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपने आश्चर्यजनक चयन तक पार्टी के राष्ट्रीय परिदृश्य पर कभी नहीं थे। राज्य के भाजपा नेताओं ने स्वीकार किया कि वह राज्य की राजनीति में भी बहुत सक्रिय नहीं थे, उन्होंने खुद को लखीमपुर खीरी तक सीमित कर लिया, इस क्षेत्र पर सहकारी क्षेत्र के माध्यम से अपनी पकड़ मजबूत कर ली। मिश्रा 1999-2002 तक लखीमपुर खीरी में जिला सहकारी बैंक लिमिटेड के उपाध्यक्ष थे।

विरोधियों का दावा- वो कभी यूपी का नेता नहीं रहे
मिश्रा के राजनीतिक करियर के बारे में एक स्थायी सवाल यह है कि यह बड़े पैमाने पर स्थानीय खीरी राजनेता, जो कभी यूपी में भी मंत्री नहीं रहे, को सीधे केंद्रीय मंत्रिमंडल में ले जाया गया। मोदी सरकार के जुलाई कैबिनेट विस्तार में, मिश्रा ने कई लोगों को चौंका दिया, जब उन्हें समुदाय के अन्य ज्ञात दिग्गजों से आगे, यूपी के एकमात्र ब्राह्मण चेहरे के रूप में चुना गया। हालांकि अजय मिश्रा को लेकर एक प्रदेश पदाधिकारी ने बताया, '' मुझे लगता है कि अजय मिश्रा की कुर्सी चली जाएगी। बीजेपी आला कमान लखीमपुर कांड के बाद ही असमंजस की स्थिति में है कि अजय को हटाया जाए या नहीं। दरअसल अजय मिश्रा कभी यूपी के नेता नहीं रहे और न ही लखीमपुर खीरी से आगे की सोच पाए। अचानक केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिलना भी काफी आश्चर्यजनक था।''

बीजेपी के पदाधिकारी ने कहा- पार्टी से उपर कोई नहीं
बीजेपी पदाधिकारी से यह पूछे जाने पर कि वो केंद्रीय कैबिनेट में एक ब्राह्मण चेहरा है ऐसे में पार्टी उनको हटाने का खतरा कैसे उठा सकती है, इस पर पदाधिकारी ने कहा, '' केंद्रीय कैबिनेट में उनसे बड़े ब्राह्मण नेता पड़े हुए हैं। इस बात की दुहाई उनके समर्थक दे रहे हैं जिनको यह नहीं दिखता कि उनकी वजह से पार्टी किस तरह के संकट का सामना कर रही है। लखीमपुर खीरी के आसपास के कई जिलों में बीजेपी के खिलाफ माहौल बन रहा है। यह बात अवध क्षेत्र के सांसदों, विधायकों एवं जिला प्रभारियों की बैठक में भी उठाई गई थी। पार्टी से उपर कोई नहीं है।''

अजय मिश्रा को हटाने से गलत संदेश जाएगा
लखीमपुर कांड के बाद से ही बीजेपी के खिलाफ माहौल बना हुआ है। बीजेपी के एक अन्य प्रदेश पदाधिकारी ने कहा, '' 'अजय मिश्रा को हटाने से चुनाव से पहले गलत संदेश जाएगा। मुझे नहीं लगता कि उनको हटाने का खतरा पार्टी उठाएगी। रही बात उनपर लग रहे आरोप की तो उसके लिए एसआईटी बनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। उनके बेटे को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। इससे ज्यादा क्या हो सकता है।''

जांच आयोग दो महीने में देगा अपनी रिपोर्ट
इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को एकल सदस्यीय जांच आयोग नियुक्त किया है। आयोग का मुख्यालय लखीमपुर खीरी में होगा और इसे दो महीने में रिपोर्ट सौंपनी होगी। हालांकि, विपक्ष ने मांग की कि आयोग की अध्यक्षता एक मौजूदा न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए।

लखीमपुर हिंसा का इस्तेमाल कर रहा है विपक्ष
सूत्रों ने कहा कि पार्टी ने आकलन किया है कि इस घटना का अगले साल की शुरुआत में यूपी विधानसभा चुनावों में उसकी संभावनाओं पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। एक नेता ने कहा, "हालांकि, जांच की प्रगति के आधार पर पार्टी का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।" भाजपा सांसद और सह प्रभारी विवेक ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस यूपी चुनाव से पहले राज्य में खुद को पुनर्जीवित करने के लिए लखीमपुर खीरी हिंसा के मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे पर विपक्ष की मांग अतार्किक है क्योंकि निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच की जा रही है।

लखीमपुर खीरी हिंसा में हुई थी आठ लोगों की मौत
यह घटना 3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में हुई जब कई किसान केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे। किसान संघों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, आशीष मिश्रा ने इस दौरान तीन वाहनों के साथ दिखाया और किसानों को कुचल दिया। इस घटना में चार किसान और चार अन्य भाजपा नेताओं सहित कुल 8 लोग मारे गए थे, जिसके बाद आशीष मिश्रा को इस सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।












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