कौन है रूपेश राय? जिसके एक इशारे पर जल उठा नोएडा! पुलिस ने व्हाट्सएप चैट से खोली साजिश की पूरी कुंडली
नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में पिछले दिनों हुई हिंसा और आगजनी ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। हजारों की संख्या में मजदूरों का सड़कों पर उतरना और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ करना महज एक इत्तेफाक नहीं था। पुलिस की गहराई से की गई जांच में अब 'मजदूर बिगुल दस्ता' और इसके मुख्य संचालक रूपेश राय का नाम सबसे बड़े मास्टरमाइंड के रूप में उभरा है।
सेक्टर-39 पुलिस ने जब रूपेश को धर दबोचा और उसका मोबाइल खंगाला, तो साजिश की एक ऐसी परत दर परत कहानी सामने आई, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। आइए जानतें हैं नोएडा बवाल के पीछे की साजिश का पूरा घटनाक्रम क्या है...

डिजिटल साजिश और 17 व्हाट्सएप ग्रुप का जाल
आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस की पड़ताल में सबसे बड़ा खुलासा रूपेश राय के फोन से हुआ है। उसके डिवाइस में 17 ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप मिले हैं, जो सीधे तौर पर इस बवाल को कंट्रोल कर रहे थे। इन ग्रुप्स में क्यूआर कोड (QR Code) के जरिए लोगों को जोड़ा गया और उन्हें भड़काऊ वीडियो और मैसेज भेजे गए।
इन चैट्स से साफ जाहिर होता है कि रूपेश और उसके संगठन ने अप्रैल के पहले हफ्ते से ही मजदूरों के बीच नफरत फैलाना शुरू कर दिया था। उसने गुपचुप तरीके से मजदूर यूनियनों के साथ बैठकें कीं और रणनीति बनाई कि कैसे एक ही समय पर बड़ी संख्या में भीड़ जुटाकर फैक्ट्रियों का काम ठप कराया जाए।
बाहरी तत्वों की एंट्री और सोची-समझी आगजनी
इस पूरे विरोध प्रदर्शन में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, हिंसा के आरोप में पकड़े गए 66 लोगों में से 45 लोग फैक्ट्री के मजदूर थे ही नहीं। ये वे बाहरी तत्व थे जिन्हें खास तौर पर माहौल बिगाड़ने और आगजनी करने के लिए बुलाया गया था। रूपेश राय ने 'मजदूर बिगुल दस्ता' के जरिए इन लोगों को संगठित किया और भीड़ के बीच घुसा दिया। पुलिस का कहना है कि इसी ग्रुप ने जबरन फैक्ट्रियों के गेट खुलवाए और जो मजदूर काम करना चाहते थे, उन्हें डरा-धमकाकर बाहर निकाला।
बवाल के दौरान आग में घी डालने का काम सोशल मीडिया के कुछ हैंडल्स ने भी किया। मध्य प्रदेश की पुरानी घटनाओं के वीडियो को नोएडा का बताकर फैलाया गया, ताकि गुस्सा और ज्यादा भड़क सके। इसी सिलसिले में पुलिस ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ भी FIR दर्ज की है। इन पर आरोप है कि इन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भ्रामक जानकारी साझा की और सांप्रदायिक व सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की।
अब तक 396 से ज्यादा उपद्रवियों को गिरफ्तार
हिंसा की इस आग के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने बेहद संवेदनशीलता और सख्ती के साथ कदम उठाया। नोएडा में मजदूरों के हंगामे से जुड़े मामले में अब तक लगभग 396 से ज्यादा उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 7 एफआईआर दर्ज की हैं। । वहीं दूसरी तरफ मजदूरों की वाजिब मांग को मानते हुए उनके न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी कर दी गई। अकुशल मजदूरों का वेतन अब 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले और पुलिस की भारी मुस्तैदी के बाद अब नोएडा की फैक्ट्रियों में रौनक वापस लौट आई है। चप्पे-चप्पे पर फ्लैग मार्च और पेट्रोलिंग जारी है और सभी श्रमिक अब शांतिपूर्वक काम पर वापस लौट चुके हैं।















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