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काशी मॉडल क्या है ? जिसे पीएम मोदी ने कोरोना कंट्रोल करने के लिए सराहा

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वाराणसी, 20 मई: बुधवार को तौकते चक्रवात से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने वहां पर उत्तर प्रदेश के अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कोरोना महामारी के खिलाफ अपनाए गए उपायों की काफी सराहना की। जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी बोले कि वाराणसी में सख्त लॉकडाउन की जगह माइक्रो-कंटेंमेंट जोन पर फोकस किया गया और इससे संक्रमण रोकने में काफी मदद मिली। पीएम मोदी के चुनाव क्षेत्र होने की वजह से वहां पर कोविड मैनेजमेंट को लेकर पीएमओ की भी सीधी निगरानी है। पिछले महीने की ही बात है वाराणसी में कोरोना की वजह से हालात काफी खराब थे। आइए जानते हैं कि इतने कम समय में आखिर वहां ऐसा क्या किया गया, जिसकी प्रधानमंत्री मोदी अपने गृहराज्य के अधिकारियों के सामने उदाहरण रख आए हैं।

एक महीने में 40 से 3.8% पहुंचा पॉजिटिविटी रेट

एक महीने में 40 से 3.8% पहुंचा पॉजिटिविटी रेट

पिछले महीने तक वाराणासी दूसरी लहर में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल था। नए संक्रमण के मामले रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। ऐसे समय में प्रधानमंत्री कार्यालय से वहां पर स्थिति को नियंत्रण में करने की जिम्मेदारी एमएलसी अरविंद कुमार शर्मा को दी गई। शर्मा पूर्व नौकरशाह हैं, जो प्रधानमंत्री के बहुत ही भरोसेमंद व्यक्ति माने जाते हैं। अप्रैल के दूसरे हफ्ते से उन्होंने वहां पर काम करना शुरू कर दिया। वह पहले भी पीएम मोदी के साथ मिलकर काम कर चुके हैं। आज की तारीख में उन्हें पूर्वांचल के इस इलाके में कोरोना के खिलाफ जंग की अगुवाई करते हुए एक महीने से ज्यादा हो गया है। इतने कम समय में वहां की स्थिति ने कैसे करवट ली है, इसके बारे में ईटी को उन्होंने खुद बताया है। उन्होंने कहा, '18 अप्रैल को वाराणसी जिले में पॉजिटिविटी रेट 40% से ज्यादा था। ये वो लोग थे जिन्होंने वाराणसी में टेस्ट करवाया था। आज यह 3.8 % है।..............इसी तरह 17-18 अप्रैल के आसपास हमारे पास 2,700 की रेंज में पॉजिटिव केस आ रहे थे। आज रोजाना 239 ये 259 केस आ रहे हैं, उसका सिर्फ 10%....'

आज करीब 1,600 ऑक्सीजन बेड खाली पड़े हैं

आज करीब 1,600 ऑक्सीजन बेड खाली पड़े हैं

एमएलसी शर्मा पिछले 13 अप्रैल को वाराणसी आए थे। 15 अप्रैल को पीएम मोदी ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस कॉल किया था। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री लगातार हालात पर निगरानी रख रहे हैं और जिले को पीएमओ से लगातार मदद मिल रही है। इस समय बनारस के अस्पतालों की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अप्रैल के मध्य में यहां 430 ऑक्सीजन बेड की क्षमता थी,जो कि अब बढ़कर 2,400 हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 'सबसे अच्छा संकेत तो यह है कि आज उनमें से दो-तिहाई बेड खाली पड़े हुए हैं।' बुधवार को काशी में कोरोना के 240 नए केस सामने आए और 8 की मौत दर्ज की गई। जिले में तब 5,065 ऐक्टिव केस थे।

काशी कवच क्या है और यह कैसे सफल हुआ?

काशी कवच क्या है और यह कैसे सफल हुआ?

शर्मा ने काशी में कोरोना को कंट्रोल करने के लिए दो रणनीति तैयार की- शहरी और ग्रामीण। उन्होंने एक काशी कोविड रेस्पॉन्स सेंटर स्थापित किया जो कि एक 24x7 कॉल सेंटर है और हर कॉल यहीं भेजे जाते हैं। इसके अलावा सभी तरह की कोशिशों को केंद्रीकृत किया गया है, ताकि बेवजह का समय जाया न जाने पाए। उन्होंने आईएमए के डॉक्टरों और स्विगी और जोमैटो जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के अलावा पैथोलॉजी लैबोरेट्री के साथ दो बैठकें की थीं। आईएमए के डॉक्टरों को टेलीमेडिसीन के जरिए इलाज के काम पर लगाया गया। स्विगी और जोमैटो से कहा गया कि वह मरीजों तक दवा पहुंचाएं। पैथोलॉजी लैबोरेट्री को सैंपल कलेक्ट करने से लेकर रिपोर्ट डॉक्टरों और मरीजों तक समय पर पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनका कहना है, 'हम इसे काशी कवच कहते हैं और इससे केस कम करने और हल्के लक्षणों वाले मरीजों के घर पर इलाज करने में मदद मिलती है।' यही नहीं जिले में दो ऑटोमेटिक आरटी-पीसीआर टेस्टिंग मशीन लगाई गई है, जिससे रिपोर्ट आने में लगने वाला समय 4 या 5 दिनों से घटकर 24 घंटे रह गया है।

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वाराणसी के गांवों में कैसे कंट्रोल में आया कोरोना ?

वाराणसी के गांवों में कैसे कंट्रोल में आया कोरोना ?

उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया है कि गांवों में जिस तरह से संक्रमण फैलने लगा था, उससे डर का माहौल पैदा हो चुका था। लेकिन, समय पर सही कदम उठाने से हालात काबू में आना शुरू हो गया। उनके मुताबिक, 'हमने स्वास्थ्य, रेवेन्यू और पंचायत कर्मचारियों की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम बनाई, जिसकी एसडीएम और एडीएम रैंक के वरिष्ठ अधिकार निगरानी कर रहे हैं।' इन टीमों को एक लाख से ज्यादा मेडिकल किट देकर संक्रमण का पता लगाने के लिए घर-घर भेजा गया है।

English summary
PM Modi has praised the Varanasi model for dealing with Covid, the positivity rate has come down by more than 10 times in a month
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