चुनाव से पहले टेंशन बढ़ाएंगे कांग्रेस छोड़ चुके दिग्गज नेता और नाराज कांग्रेसी, कैसे निपटेंगी प्रियंका ?
लखनऊ, 13 सितंबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ चुके कई नेता राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के लिए चुनौती का सबब बने हुए हैं। साथ ही हाल ही में पार्टी से निकाले गए पदाधिकारी भी कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं। कांग्रेस छोड़ने वालों में जितिन प्रसाद, रीता बहुगुणा जोशी, जगदंबिका पाल, संजय सिंह और अनु टंडन जैसे बडे़ नाम शामिल हैं। पार्टी के नेताओं की माने तो पार्टी ने इन नेताओं को बहुत कुछ दिया था लेकिन महात्वाकांक्षा का कोई अंत नहीं होता और इसीलिए ये लोग कांग्रेस छोड़कर चले गए। दरसअल ये नेता हमेशा ही चुनावी समय में कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी करते रहे हैं। सवाल यह है कि क्या एक बार फिर नाराज कांग्रेसी क्या फिर कांग्रेस का खेल बिगाड़ेंगे।
Recommended Video

दरअसल, नवंबर 2019 में अनुशासनहीनता के आरोप में पूर्व मंत्रियों सहित यूपी में पार्टी के 10 दिग्गजों को निष्कासित कर दिया गया था। इनमें पूर्व सांसद संतोष सिंह, राज्य के पूर्व मंत्री रामकृष्ण द्विवेदी और सत्यदेव त्रिपाठी, पूर्व एमएलसी सिराज मेहंदी, पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्रा, विनोद चौधरी और नेक चंद्र पांडे, युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश गोस्वामी और गोरखपुर जिले के पूर्व अध्यक्ष संजीव सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। लेकिन क्या अब चुनाव से पहले इनकी वापसी होगी। पार्टी के नेता कहते हैं कि यदि प्रियंका गांधी चाहें तो इनकी वापसी हो सकती है।
राज्य कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि, "पार्टी ने इन नेताओं को बहुत कुछ दिया। लेकिन संकट के समय ये लोग पार्टी को छोड़कर चले गए। पार्टी में अब स्थितियां बदल चुकी हैं। जो काम करेगा वही टिक पाएगा। कहने का मतलब है कि जिस नेता को जो जिम्मेदारी दी जा रही है उसकी लगातार मॉनिटिरिंग और ब्रीफिंग हो रही है। उनके कामकाज का फीडबैक लिया जा रहा है। सिर्फ नाम के लिए पद लेकर घूमने वालों के लिए कांग्रेस में जगह नहीं है।"

20 सालों तक पार्टी से जुड़े रहे जितिन प्रसाद
जितिन प्रसाद का कांग्रेस से पारिवारिक नाता था। वो तकरीबन 20 साल तक पार्टी से जुड़े रहे, दो बार सांसद बने और केंद्र में मंत्री भी बने। इसकी बुनियाद उनके दादा ज्योति प्रसाद ही डाल चुके थे। उनके बाद जितिन के पिता जितेंद्र प्रसाद ने कांग्रेस की राजनीति की और एक वक्त उनकी पार्टी में लगभग वैसी ही हैसियत थी, जो हाल के वर्षों में अहमद पटेल निभा रहे थे। लेकिन, पहले पिता का सोनिया गांधी से राजनीतिक मोहभंग हुआ था और अब जितिन प्रसाद, राहुल और प्रियंका गांधी से राजनीतिक रिश्तों की डोर तोड़कर भाजपा का कमल खिलाने के लिए तैयार हो गए हैं। असल में यह स्थिति एक दिन में नहीं बनी है।
कांग्रेस से जितिन प्रसाद का क्यों हुआ मोहभंग ?
उत्तर प्रदेश में कम से कम दो ऐसे मौके आए जब जितिन ने उम्मीद पाली थी कि राहुल तक पहुंच होने का प्रसाद उन्हें जरूर मिलेगा और उन्हें पार्टी प्रदेशअध्यक्ष का कमान सौंपेगी। लेकिन, दोनों बार बाजी उनके हाथ से निकल गई। पहली बार राजबब्बर का सिक्का चल गया तो दूसरी बार अजय कुमार लल्लू में प्रियंका गांधी वाड्रा को लंबी रेस का घोड़ा नजर आया। जबकि, प्रसाद शायद इसी भरोसे रह गए कि उनके दादा के जमाने से ब्राह्मण-दलित और मुसलमानों की राजनीति करने वाला गांधी परिवार प्रदेश में 12 फीसदी ब्राह्मण वोट को देखकर उनपर दांव जरूर लगाएगा।

रीता बहुगुणा ने 24 साल कांग्रेस की सेवा की, अब बीजेपी में
रीता बहुगुणा जोशी उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा और कमला बहुगुणा की बेटी हैं, जो पूर्व सांसद थे। उन्होंने एमए पूरा किया और इतिहास में पीएचडी किया है। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मध्ययुगीन और आधुनिक इतिहास में प्रोफेसर भी हैं। उन्होंने इलाहाबाद की मेयर बनकर 1995 में राजनीति में प्रवेश किया। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वह 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षा थी। 20 अक्टूबर 2016 को, वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं।
पार्टी छोड़ने से पहले 24 साल तक वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ थीं। उन्होंने दो बार लोकसभा चुनाव में चुनाव लड़ा लेकिन दोनों बार हार गई। 2012 के विधानसभा चुनावों में, उन्हें लखनऊ छावनी के लिए विधान सभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया था। बाद में लोकसभा चुनाव 2019 में रीता जोशी को प्रयागराज से लोकसभा का चुनाव लड़ाया गया जहां से वह विजयी रहीं थीं।

जगदंबिका पाल को भी नहीं संभाल पायी कांग्रेस
जगदंबिका पाल उत्तर प्रदेश के एक बहुचर्चित भारतीय राजनेता हैं जिन्होंने 15 वें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और 2014 में भाजपा में शामिल हो गए।इसके बाद 2014 में, वह उत्तर प्रदेश के डोमरियागंज सीट से 16 वीं लोकसभा चुनाव में निर्वाचित हुए। इन्होंने1993-2007 तक लगातार तीन बार बस्ती निर्वाचन क्षेत्र के विधायक के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान की।
उन्होंने 1998 में 3 दिनों के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया जब उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने कल्याण सिंह की सरकार को बर्खास्त कर दिया। बाद में अदालतों के आदेश के बाद इसे जारी कर दिया गया। पेशे से वकील होने के साथ ही जगदम्बिका पाल ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान, प्राचीन और आधुनिक इतिहास में एम ए और गोरखपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी किया है।












Click it and Unblock the Notifications