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योगमाया से अंग्रेज अफसर को बताया उसकी पत्नी का हाल, चमत्कार देख सभी हुए नतमस्तक

By Rahul Goyal
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    वाराणसी। श्यामा चरण लाहिरी 18वीं शताब्दी के प्रसिद्ध गृहस्थ योगी संत थे। जिनको क्रिया योग 'एक्शन विदाउट रिएक्शन' (वह योग जिसमें शरीर छोड़ कर आत्मा के जरिए मनुष्य कही भी जा सकता है) में महारत हासिल थी। चौसट्टी घाट पर योगीराज का समाधी स्थल 'सत्य लोक' है। क्रिया योग की वजह से उन्हें योगीराज कहा गया। खास बात है कि गृहस्थ जीवन के साथ घर मे बैठकर वो क्रिया योग किया करते थे।

    varanasi yogiraj lahiri unique story

    वाराणसी के दानापुर में रेलवे क्लर्क की नौकरी के दौरान लाहिरी का एक ब्रि‍टि‍श अफसर बहुत परेशान था। अपने तप से उन्होंने उसकी परेशानी का अंदाजा लगा लिया। अफसर के पास पहुंचकर लाहिरी ने कहा, "आप परेशान मत होइए। इंग्लैंड में आपकी पत्नी एकदम ठीक है। मैं अभी-अभी वहीं से देख कर आ रहा हूं।" इस पर अधिकारी ने इन्हें पागल समझ कर नौकरी से बर्खास्त कर दिया, लेकिन ये अपनी नौकरी पर रोज आकर अधिकारी के गेट के बाहर खड़े रहते थे। कुछ दिनों बाद इंग्लैंड से अधिकारी की पत्नी आई। गेट पर इन्हें खड़ा देख कर वो चौंक गई। उसने पति से कहा, "यह आदमी तो मेरे घर आया था और मेरा हालचाल पूछा था।" यह सुनते ही ब्रिटिश अधिकारी सोच में पड़ गया। उसने सोचा कि इसने तो कभी छुट्टी नहीं ली, यह इंग्लैंड गया कब। चमत्कार का अहसास होते ही अंग्रेज इनके पैरो में गिरकर माफी मांगने लगा।

    नौकरी के दौरान उनकी पोस्टिंग देहरादून में हुई, जहां रेल की पटरियां बिछाने का काम किया जा रहा था। एक दिन लाहि‍री रेल की पटरी बिछवा रहे थे, अचानक एक आवाज आई, 'श्यामा इधर आओ'। अगले दिन फिर यही आवाज आई तो वह आवाज के पीछे-पीछे चल पड़े। काफी दूर पहाड़ों के बीच लाहिरी की मुलाकात एक बाबा से हुई, जिसे वह 'महावतार बाबा' के नाम से बुलाते थे। बाबा ने लाहिरी को पूर्व जन्म के बारे में बताया, 'पिछले जन्म में आपकी साधना अधूरी रह गई थी, जिसे अब पूरा करने का समय आ गया है।' बाबा ने लाहिरी के पूर्व जन्म के आसन, चटाई और समान दिखाए। इसके बाद दीक्षा देकर अपने साथ द्रोणगिरि पर्वत के खोह में लेकर गए। कई सालों तक साधना पूरी करने के बाद गुरु आज्ञा से लाहिरी वापस काशी आए और अंतिम समय तक नौकरी के बाद शिव भक्ति के साथ-साथ साधु लोगों को 'क्रिया योग' की दीक्षा देते रहे। बता दें, लाहिरी ने योग की पहली दीक्षा अपनी धर्मपत्नी को दी थी।

    बनारस के 'सत्य लोक' की इंटरेस्टिंग है कहानी
    काशी के चौसट्टी घाट पर योगीराज का समाधि स्थल 'सत्य लोक' आश्रम है। आश्रम मैनेजर विजय बाजपेयी ने बताया, कलकत्ता के एक जमींदार ने इसी स्थान पर एक शिव मंदिर बनवाया, जिसमें विशाल शिवलिंग स्थापित किया गया। शि‍वलिंग की नियमित पूजा नहीं होने से जमींदार बहुत दुखी हुआ। वह बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने पहुंचा। यहां माथा टेकने पर आंखों में एक तस्वीर आने लगी। इस बात को उसने वहां के महंत को बताई, जिस पर महंत ने उन्हें काशी के दो शिवभक्तों का नाम बताया। पहला तैलंग स्वामी और दूसरा श्यामा चरण लाहिरी का। जमींदार पहले तैलंग स्वामी के पास गया, लेकिन वहां संतुष्टि नहीं मिली तो लाहिरी के घर गया। उनको देखते ही पैरों में गिरकर रोने लगा और मिन्नत कर उन्हें अपने मंदिर का पुजारी बना दिया। इस पर भी जमींदार का मन नहीं भरा तो वह मिन्नत करने लगा कि ये पूरी संपत्ति दान देना चाहता हूं, लेकिन योगीराज तैयार नहीं हुए। उस समय एक रुपए लेकर उन्हें बेच दिया, जिसे आज लोग 'सत्य लोक' के नाम से जानते हैं।

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    English summary
    varanasi yogiraj lahiri unique story

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