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जीत गई काशी: काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के लिए ज्ञानव्यापी मस्जिद ने दी जमीन, बदले में क्या मिला जानिए

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वाराणसी, 23 जुलाई: सांप्रदायिक सौहार्द में एकबार फिर से काशी जीत गई है। यहां काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानव्यापी मस्जिद के बीच कानूनी लड़ाई अभी भी अदालत में है, लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्ष काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए जमीन के दो टुकड़ों की आपस में अदला-बदली को राजी हो गए हैं। बता दें कि यह कॉरिडोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी विकास के मॉडल से जुड़ा प्रोजेक्ट है, जो कि स्थानीय सांसद भी हैं। बताया जा रहा है कि मुस्लिमों ने मस्जिद की जो जमीन मंदिर कॉरिडोर के लिए दी है, उसपर सुरक्षा टावर बनाया जाना है।

मंदिर-मस्जिद की जमीन की अदला-बदली

मंदिर-मस्जिद की जमीन की अदला-बदली

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानव्यापी मस्जिद केस में मुसलमान पक्ष ने 1700 वर्ग फीट से ज्यादा की मस्जिद की जमीन काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के निर्माण के लिए दी है। ज्ञानव्यापी मस्जिद से सटी यह जमीन काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दी गई है। इसके बदले में मंदिर प्रशासन ने मुस्लिम पक्ष को ज्ञानव्यापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर से थोड़ी दूर बांसफाटक के पास 1,000 वर्ग फीट जमीन दी है। बता दें कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसकी शुरुआत भी खुद उन्हीं के हाथों हुई है। लेकिन, जिस तरह से वहां पर भी मंदिर-मस्जिद का मामला अदालत में पड़ा है, दोनों पक्षों की आपसी सहमति से उठाया गया यह कदम काफी सराहनीय है।

कैसे हुआ मंदिर को मस्जिद की जमीन देने का फैसला

कैसे हुआ मंदिर को मस्जिद की जमीन देने का फैसला

इस मामले की जानकारी देते हुए मस्जिद के अंजुमन इंतेजामिया के ज्वाइंट सेक्रेटरी एसएम यासिन ने टाइम्स नाउ से कहा है, 'मामला अभी भी अदालत में है। सरकार कॉरिडोर बना रही है, वह जमीन अधिग्रहण करना चाह रही थी। इसलिए हमने अपने लोगों से बात की और बोर्ड ने 1700 वर्ग फीट जमीन काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को आवंटित करने के फैसले पर मुहर लगा दी।' माना जा रहा है कि मस्जिद की जो जमीन मंदिर कॉरिडोर के लिए मिली है, उसपर सिक्योरिटी टावर बनाया जाएगा।

पहले से प्रशासन के पास थी वो जमीन

पहले से प्रशासन के पास थी वो जमीन

बता दें कि काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानव्यापी मस्जिद का विवाद पहले से अदालत में है। स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर महादेव और मंदिर की ओर से हिंदू पक्ष केस लड़ रहे हैं तो मस्जिद की ओर से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतेजामिया कमिटी मुकदमा लड़ रही है। दरअसल, मस्जिद की ओर से जो जमीन मंदिर कॉरिडोर के लिए दी गई है, वह सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पहले भी यहां पर प्रशासन का कंट्रोल रूम था और पुलिस के बड़े अधिकारी बैठते थे। यह जमीन मस्जिद से लीज पर ली गई थी।

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एएसआई के सर्वे को लेकर क्या आया था फैसला ?

एएसआई के सर्वे को लेकर क्या आया था फैसला ?

इसी साल अप्रैल में वारणसी की एक अदालत ने हिंदुओं की मांग मानते हुए ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) से यह पता लगाने के लिए कहा था कि 17वीं सदी में क्या यहां औरंगजेब के शासन के दौरान मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी ? अदालत ने एएसआई के डायरेक्टर जनरल को इसके लिए पांच सदस्यीय एक्सपर्ट कमिटी बनाने को कहा था, जिसमें दो सदस्य अल्पसंख्यकर समुदाय से जरूर रखने का आदेश मिला। अदालत में अपने आदेश में कहा था, 'एएसआई का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि विवादित स्थल पर अभी जो धार्मिक ढांचा है, क्या उसे किसी दूसरे ढांचे पर खड़ा किया गया है, क्या उसमें कोई बदलाव हुआ है या जोड़ा गया है....'

English summary
Land swap between Gyanvapi Mosque and temple for Kashi Vishwanath Temple Corridor in Varanasi, PM Modi's ambitious project
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