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उत्तर प्रदेश के इस गांव में कोरोना जैसे लक्षणों से 22 मौतें, लोग बोले- मुंबई से लौटे प्रवासी मजदूर जिम्मेदार

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लखनऊ, 23 मई: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के निंदुरा गांव में 22 लोगों की कोरोना वायरस जैसे लक्षणों की वजह से मौत हो गई है। गांव वालों का दावा है कि गांव में कई दिनों तक कोई मेडिकल हेल्प नहीं मिली है। ग्रामीणों ने दावा किया कि महाराष्ट्र में लॉकडाउन के बाद मुंबई के प्रवासियों के लौटने से पहले गांव में सबकुछ ठीक था। लेकिन उनके आने के बाद ही गांव के हालात खराब हो गए हैं। गांव वालों का दावा है कि ज्यादातर पंचायत चुनाव में सिर्फ वोट डालने के लिए मुंबई से वापस लौटे हैं, जो हमारे लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है। 'आजतक' ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में दावा किया है कि पंचायत चुनाव में वोट डालने मुंबई से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग गांवों में लौटे प्रवासी मजदूरों ने ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों को कोविड संक्रमित किया है।

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एक घर में पिता और बेटे की हुई मौत

गांव की हालत बताते हुए रिपोर्ट में लिखा गया है कि एक पिता और बेटे की गांव में कुछ ही दिनों के अंतराल में कोरोना से मौत हो गई। हार्डवेयर की दुकान पर काम करने वाले 28 वर्षीय मोहम्मद अरशद को सांस लेने में तकलीफ होने के बाद कर्नलगंज स्वास्थ्य केंद्र में मौत हो गई। वह अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं।

मोहम्मद अरशद के पिता 40 वर्षीय मोहम्मद साद भी कोरोना संक्रमित थे, वह भी कर्नलगंज स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती थी। बेटे की मौत के 2 दिन बाद उनकी भी मौत हो गई। मुकीद खंड और मोहम्मद शोएब सहित परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि गांव में कोई भी कोविड टेस्ट के लिए नहीं आया था और ना ही गांव में कोई भी मेडिकल किट या दवा किट दी गई थी।

किसी को नहीं मिला ऑक्सीजन, तो कोई अस्पताल भी नहीं पहुंच पाया

एक अन्य घटना में, कार के पार्ट्स का बिजनेस करने वाले 35 वर्षीय जमीउद्दीन खान ने अपने पिता फरखुद्दीन (60) को कोविड जैसे लक्षण होने के बाद खो दिया। जमीउद्दीन खान ने दावा किया है कि उसके पिता की हालत बिगड़ने पर वह उसे सीएचसी कर्नलगंज ले गया। उन्होंने उनके पिता को एडमिट करने से ये कहते हुए मना कर दिया कि उनके पास ऑक्सीजन के लिए कोई सपोर्ट नहीं है।

निंदुरा गांव के एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक, कररार अहमद को ऐसे ही दुख का सामना करना पड़ा और उन्होंने भी अपने बीमार पिता को कोविड जैसे लक्षणों से खो दिया। उसने अपने पिता को भर्ती कराने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसे अस्पताल ले जाने के लिए कोई एम्बुलेंस नहीं मिली, जिससे उसके पिता की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि अगर एम्बुलेंस समय पर पहुंच जाती, तो उनके पिता की मृत्यु नहीं होती।

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क्या कहते हैं अधिकारी?

ग्रामीणों की बातों पर कर्नलगंज एसडीएम शत्रुघ्न पाठक ने इन मामलों पर टिप्पणी करने से बचते नजर आए और गोंडा डीएम से बात करने की सलाह दी। गांव में मेडिकल हेल्प ना मिलने और खराब सुविधाओं पर गोंडा के डीएम मार्तंडे शाही ने कहा कि सीएमओ गोंडा से इस मामले में पूछा जाए।

सीएमओ गोंडा ने इस मामले पर तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन कहा कि हम सुनिश्चित करेंगे कि मेडिकल टीमें गांवों तक पहुंचें और पीड़ित लोगों को उचित सहायता प्रदान करें।

English summary
Uttar Pradesh: Gonda Nindura village 22 lost lives due to Covid-like symptoms when migrants returned
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